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‘We fast not to please the divine, but to cleanse our body’ – Gurudev Sri Sri Ravi Shankar. (हम ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए नहीं, बल्कि अपने शरीर को शुद्ध करने के लिए उपवास करते हैं’- श्री श्री रवीशंकर). नवरात्रि के अवसर पर कई श्रद्धालू व्रत उपवास करते हैं. इसके ज़रिए भक्त अपनी इष्ट देवी से मन की श्रद्धा व्यक्त करते हैं. नवरात्रि के अलावा भी हिन्दू धर्म सहित लगभग सभी धर्मों में किसी न किसी ढंग से उपवास रखने का रिवाज़ रहा है. अब जिस चीज़ को वैश्विक स्तर पर अपनाया जाता है, तो इसके धार्मिक महत्व के साथ ही वैज्ञानिक महत्त्व भी तो होंगे. 

तो चलिए जानते हैं कि उपवास रखने के फ़ायदे क्या होते हैं.  

मेटाबॉलिज़्म में सुधार

उपवास रखने की धार्मिक वजहें अलग-अलग हैं, लेकिन इसकी वैज्ञानिक अहमियत है, शरीर को आराम देकर मज़बूत बनाना और शरीर के इम्यून सिस्टम को सुधारना. हर रोज़ दिन में 4-5 बार खाने की आदत से हमारे शरीर को लगातार काम करता रहता है. जिससे वह थक सा जाता है. उपवास के ज़रिए, शरीर को कुछ वक़्त का आराम मिल जाता है. नतीजन शरीर का पाचन यानी मेटाबॉलिज़्म और बेहतर ढंग से काम करने लगता है. 

इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग की प्रैक्टिस (Intermittent Fasting)

आज के दौर में इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग ख़ूब चर्चा में है. यह टर्म उपवास के पुराने धार्मिक और आध्यात्मिक तरीकों से प्रेरित है. इससे जुड़े एक प्रयोग में, वैज्ञानिकों ने एक चूहे को उपवास जैसी स्थिति में रखा और पाया कि उसके वज़न में कुछ कमी आई है.(1) हम में से कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जो तय वक़्त तक कुछ नहीं खाते, इसके बाद उपवास  में खाई जाने वाली चीज़ों को पेट भरकर खाते हैं. इस तरह का उपवास करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी ख़बर यह है कि नवरात्रि के दौरान उन्हें इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग की भी प्रैक्टिस हो जाती है. जिसे वे बाक़ी दिनों में आज़मा सकते हैं. 

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संतुलित डाइट का चस्का 

उपवास  के दौरान हम तामसिक चीज़ें, आसान शब्दों में कहें तो देर से पचने वाली चीज़ें (मोटा अनाज) कम खाते हैं. इसके अलावा, मांसाहार और प्याज़, लहसुन जैसी चीज़ें बिलकुल नहीं खाते. उपवास  की सभी चीज़ों में सबसे ज़्यादा मात्रा होती है प्रोटीन और फ़ाइबर (ऐसा ही होना चाहिए) की. हम सूखे मेवे (Dry Fruits) फल और सब्ज़ियां ज़्यादा खाते हैं. हल्का-फुल्का खाने से शरीर को अच्छा और हल्का महसूस होने लगता है. जिसे हम उपवास ख़त्म होने के बाद भी फॉलो करने से परहेज़ नहीं करते. जिससे हमें अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सेहतमंद खानपान को शामिल करने में आसानी होती है. 

वज़न घटाने में कारगर  

उपवास के दौरान हम ढेर सारा पानी या दूसरे तरह के लिक्विड पीते हैं. जिससे शरीर के विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिंस) को बाहर निकालने (डेटॉक्स) में मदद मिलती है. सही वक़्त के अंतर पर पोषक तत्वों से भरपूर चीज़ें खाने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म सुधरता है. लाइट डाइट के चलते खाना जल्दी पच जाता है. पोर्शन कंट्रोल के सभी नियम पूरे होते हैं. फ़ास्ट-फ़ूड और जंक फ़ूड से भी बचाव होता है. कुल मिलाकर उपवास में हम बेवजह की कैलोरी नहीं खाते और शरीर में इकट्ठा कैलोरी भी ख़र्च करते हैं. नतीजन, उपवास रखने से वज़न घटाने में मदद मिलती है.   

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तनाव और डिप्रेशन से छुट्टी पाने में मददगार

अगर हम तनाव और अवशाद यानी डिप्रेशन से घिरे हुए हैं,तो ज़ाहिर सी बात है कि हमारी रूटीन लाइफ़ में कुछ ख़ामी है. लिहाज़ा, उपवास और ख़ासकर नवरात्रि जैसे मौकों पर हमारी रूटीन ज़िंदगी से ज़रा अलग घटनाएं होती हैं. जिससे मन बहलता है, लोगों से मिलना-जुलना होता है, खानपान की चीज़ें बदलती हैं. उपवास के बहाने ही सही कुछ वक़्त एकांत होकर हम अपने आपको देते हैं. कुछ पल हम दुनियादारी से दूर होकर अध्यात्म के तौर पर ख़ुद के शरीर और मन के नाम करते हैं. जिससे हमें तनाव और डिप्रेशन जैसी परेशानियों से लड़ने में मदद मिलती है.

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ख़ास बात: उपवास के फायदों को तो आप समझ गए हैं लेकिन अगर आप को टाइप 2 डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, दिल या किडनी से जुडी परेशानी है तो आप उपवास रखने से जुडी सलाह अपने डॉक्टर से ज़रूर लें.

कंटेंट की समीक्षा : Wellthy केयर की हेल्थ कोच जयश्री सालियन ने की है.

संदर्भ:

  1. Persynaki A, Karras S, Pichard C. Unraveling the metabolic health benefits of fasting related to beliefs of religion: A narrative review. Nutrition. 2017;35:14-20. doi:10.1016/j.nut.2016.10.005.

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