Breast cancer diabetes
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डायबिटीज़ और स्तन कैंसर दुनिया भर में लोगों की सेहत पर असर डालने वाली सबसे आम बीमारियों में शामिल हैं. टाइप-2 डायबिटीज़ और स्तन कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाली कई वजहें एक जैसी हैं. मसलन मोटापा, सुस्त जीवनशैली, सैचुरेटेड फ़ैट और रिफ़ाइन्ड कार्बोहाइड्रेट का ज़्यादा सेवन.[1]

बल्कि कई शोध डायबिटीज़ और स्तन कैंसर के जोखिम के बीच नाते को दर्शाते हैं. दोनों बीमारियों के बीच संबंध उन महिलाओं में ज़्यादा देखा गया है जिनका मासिक धर्म बंद हो चुका हो.[2]

आइये इस बारे में ज़्यादा जानते हैं.

क्या स्तन कैंसर की वजह बन सकती है टाइप-2 डायबिटीज़ ?

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग में वरिष्ठ सलाहकार डॉ एस के वांग्नू  के मुताबिक, “टाइप-2 डायबिटीज़ से स्तन कैंसर नहीं होता. लेकिन हाइपरइन्सुलिनेमिया में इसका जोखिम बढ़ जाता है.” हाइपरइन्सुलिनेमिया उस अवस्था को कहते हैं जब ख़ून में ग्लूकोज़ के मुक़ाबले इन्सुलिन की मात्रा बहुत बढ़ जाती है.

डॉ माली पाटिल मानते हैं कि अगर परिवार में पहले भी स्तन कैंसर के मामले सामने चुके हों, तो हर 6 महीने में डॉक्टरी जांच करवा लेनी चाहिए. वो ख़ुद ही अपनी जांच और स्तनों के आसपास के हिस्सों की पड़ताल करते रहने पर भी ज़ोर देते हैं. इस जांच में जिन बातों पर ग़ौर करना चाहिए, उनमें से कुछ नीचे दी गई हैं:

  • पूरे स्तन या उसके किसी हिस्से में सूजन (भले ही आपको गांठ महसूस ना हो). त्वचा में जलन या गड्ढे पड़ने पर भी ध्यान दें.
  • स्तन या निप्पल में दर्द का एहसास.
  • निप्पल का अंदर की ओर धंसना.
  • निप्पल या स्तन की त्वचा का मोटा हो जाना, उनमें लाल निशान का उभरना
  • निप्पल से स्तन के दूध के अलावा किसी दूसरे प्रकार का रिसाव

क्या कैंसर के इलाज से हो सकता है डायबिटीज़ ?

डॉक्टर वांग्नू बताते हैं, “डायबिटीज़ पर स्तन कैंसर के इलाज का असर इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर निर्भर करता है. आमतौर पर अगर इलाज के दौरान शुगर का स्तर बढ़ता है, तो डायबिटीज़ को लेकर मरीज़ की जांच होनी चाहिए. अगर इलाज के बाद शुगर का स्तर सामान्य हो जाए, तो भी भविष्य में डायबिटीज़ की आशंका को जांच लेना चाहिए.”

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कीमोथेरेपी का ब्लड शुगर के स्तर पर असर

व्हाइटफ़ील्ड, बेंगलुरू के कोलंबिया एशिया अस्पताल के कैंसर विभाग में सलाहकार डॉ वसवंत राव मालीपाटिल की राय के मुताबिक़, कैंसर और उसका उपचार मेटाबॉलिक चेंज (जैविक प्रक्रियाओं में बदलाव) ला सकते हैं, जिनसे डायबिटीज़ के लक्षण बढ़ने का ख़तरा रहता है. कई बार कीमोथेरेपी में पेशेंट को ऐसे स्टेरॉयड दिए जाते हैं, जो ख़ून में ग्लूकोज़ के स्तर को काफ़ी बढ़ा सकते हैं, जिससे ब्लड शुगर बढ़ सकता है.” 

कीमोथेरेपी के ब्लड शुगर पर कई तरह के प्रभाव हो सकते हैं. वैज्ञानिक शोध इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इन्सुलिन स्तन कैंसर के जोखिम और बीमारी के बढ़ाव पर असर डाल सकता है.[3]

क्या रेडियोथेरेपी ब्लड शुगर के स्तर पर असर डाल सकती है?

रेडियोथेरेपी में एक्सरे जैसी उच्च ऊर्जा वाली तरंगों (जैसे इलेक्ट्रॉन) से कैंसर का इलाज होता है. हालांकि, रेडियोथेरेपी में कैंसर की कोशिकाओं को ख़त्म किया जाता है लेकिन डायबिटीज़ से ग्रसित लोगों को ज़्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है. हालांकि कैंसर का इलाज डायबिटीज़ की वजह नहीं बनता, लेकिन उपचार के दौरान ब्लड शुगर के बढ़े स्तर को मैनेज करना ज़रूरी होता है.

डॉ वांग्नू कहते हैं, “आमतौर पर रेडियोथेरेपी के दौरान और इसके फ़ौरन बाद ब्लड शुगर के स्तर में बढ़ोत्तरी देखने को मिलती है. इसलिए रेडियोथेरेपी ट्रीटमेंट से पहले और बाद में सामान्य से ज़्यादा बार ब्लड शुगर को टेस्ट करना अहम हो जाता है.”

डायबिटीज़ के दौरान ऐसे करें ऑपरेशन की तैयारी:

अगर डॉक्टर स्तन कैंसर के इलाज के लिए ऑपरेशन की सलाह दे, तो ब्लड शुगर पर नियंत्रण ज़रूरी हो जाता है. डायबिटीज़ का बेक़ाबू होना सर्जरी के दौरान और बाद में जोखिम को बढ़ाता है. इससे संक्रमण की आशंका बढ़ती है और घाव भरने में भी ज़्यादा वक्त लगता है.

सर्जरी से पहले डॉक्टर से ब्लड शुगर को क़ाबू करने के तरीक़ों की सलाह लें. डॉक्टर आपकी दवाओं या फिर इन्सुलिन की मात्रा, यहां तक कि आपके भोजन और कसरत के रूटीन में भी बदलाव का परामर्श दे सकते हैं

अगर ऑपरेशन के दिन ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में नहीं है, तो डॉक्टर सर्जरी को स्थगित या फिर रद्द भी कर सकते हैं.

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स्तन कैंसर में डायबिटीज़ के जोखिम को कम करने के लिए क्या करें:  

  • मीट का सेवन कम करें
  • चीनी का सेवन या तो पूरी तरह बंद या कम करें
  • हरी सब्ज़ियां, फल वग़ैरह से भोजन में फ़ाइबर की मात्रा बढ़ाएं
  • स्तन कैंसर के उपचार से उबरने के लिए ज़्यादा प्रोटीन लें. बेहतर होगा कि इसके लिए सब्ज़ियां खाएं क्योंकि उन्हें पचाना आसान होता है.
  • कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला भोजन खाएं क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल को सही स्तर पर रखने में मदद मिलती है.
  • कई मामलों में ओमेगा-3 फ़ैटी एसिड (असंतृप्त अम्ल) का सेवन इन्सुलिन के प्रति प्रतिरोध (रेज़िस्टेंस)को कम करता है. जिन लोगों का शरीर इन्सुलिन को लेकर ज़्यादा रेज़िस्टेंस दिखाता है उनके ख़ून में अक्सर ट्राइग्लिसराइड की मात्रा ज़्यादा पाई जाती है. लेकिन ओमेगा-3 फैटी एसिड इस मात्रा को कम कर सकते हैं

याद रखें डायबिटीज़ की सही रोकथाम कैंसर के इलाज पर उल्टा असर नहीं डालेगी. डॉ माली पाटिल कहते हैं, “ब्लड शुगर के स्तर की सही रोकथाम ना करना ही कुछ वक्त के लिए ऐसे हालात पैदा कर सकता है, जिससे कैंसर के इलाज को टालना पड़े. लेकिन ऐसा दुर्लभ मामलों में ही देखने को मिलता है.”

संदर्भ:

  1. Fei Xue and Karin B Michels. Diabetes, metabolic syndrome, and breast cancer: a review of the current evidence. 2007 American Society for Clinical Nutrition. Am J Clin Nutr September 2007 vol. 86 no. 3 823S-835S. ajcn.nutrition.org/content/86/3/823S.full
  2. Fei Xue and Karin B Michels. Diabetes, metabolic syndrome, and breast cancer: a review of the current evidence. 2007 American Society for Clinical Nutrition. Am J Clin Nutr September 2007 vol. 86 no. 3 823S-835S. ajcn.nutrition.org/content/86/3/823S.full
  3. Giovannucci, E., Harlan, D. M., Archer, M. C., Bergenstal, R. M., Gapstur, S. M., Habel, L. A., … Yee, D. (2010). Diabetes and Cancer: A consensus report. Diabetes Care, 33(7), 1674–1685. http://doi.org/10.2337/dc10-0666

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