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ब्लड शुगर अपने आप में कोई समस्या नहीं है. बल्कि, देखा जाए तो हमारे शरीर के सभी अंगों को काम करते रहने के लिए ख़ून में 82-110 mg/dl ग्लूकोज़ का होना ज़रूरी होता है.

ग्लूकोज़ के रूप में इस शुगर का रिसाव तब होता है, जब पैंक्रियाज़ से ग्लूकागॉन नाम के हॉर्मोन का ख़ून में स्राव होता है. ग्लूकागॉन हॉर्मोन हमारे शरीर में इकठ्ठा हुए ग्लाइकोज़न को ग्लूकोज़ में बदलने के लिए लीवर और मसल्स को संकेत देते हैं, जिसकी वजह से ब्लड स्ट्रीम में ग्लूकोज़ रिलीज़ होता है, और शरीर के अहम अंगों को काम करने के लिए ऊर्जा मिलती. शरीर को काम करने के लिए सामान्य मात्रा में ग्लूकोज़ मिलते रहना और ख़ून में शुगर की इस मात्रा को नियंत्रित किया जाना ज़रूरी है. ख़ून में ग्लूकोज़ की ज़्यादा मात्रा नर्व और आर्टरीज़ को बर्बाद कर सकती है. ऐसे में ग्लूकोज़ की इस मात्रा को संतुलित बनाए रखने के लिए पैंक्रियाज़ इंसुलिन उत्पन्न करते हैं. ये एक ऐसा हॉर्मोन है जो शुगर को ब्लड स्ट्रीम में ज़्यादा समय तक ठहरने से बचाता है.

तनाव लेने पर क्या होता है

स्ट्रेस को हम व्यापक रूप में शरीर के लिए चुनौती के तौर पर समझ सकते हैं. यह भावनात्मक या फ़िज़ीऑलॉजीकल यानी शारीरिक रूप में भी हो सकता है. एक सर्वे से यह बात सामने आई कि ज़्यादातर लोग काम के चलते तनाव के शिकार होते हैं.(1) भावनात्मक तनाव को हम ग़ुस्सा, घबराहट, डर, उत्साह और फ़िक्र के रूप में महसूस करते हैं. वहीं, शारीरिक तनाव में बीमारी, दर्द या घाव वग़ैरह शामिल हैं.

तनाव से निपटने के लिए शरीर को ऊर्जा की ज़रूरत पड़ती है. इसलिए जब भी स्ट्रेस होता है, तो एड्रिनल ग्रंथि ख़ून में ग्लूकोज़ लेवल को बढ़ाती है, जिससे तनाव के समय ऊर्जा की ज़रूरत पूरी हो सके. जहाँ, बिना डायबिटीज़ वाले लोगों (नॉन डायबिटिक) के शरीर में शुगर, इंसुलिन हॉर्मोन के ज़रिये रेगुलेट होता है, वहीं डायबिटिक लोगों को अपने शुगर लेवल को सामान्य स्तर पर रखने के लिए काफ़ी कोशिशें करनी पड़ती हैं.

ब्लड में हाई शुगर लेवल के लगातार बने रहने से शारीरिक क्रियाओं में बाधाएं आती हैं और ब्लड वेसल्स (रक्त धमनियां) ख़राब हो जाती हैं. क्योंकि स्ट्रेस से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है, इसलिए यह किसी भी हाल में सही नहीं है, ख़ासकर उनके लिए जो डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं.

तनाव को कैसे संभालें

1. अपने स्ट्रेस से वाकिफ़ रहें

रोज़ाना की जीवनशैली में हो सकता है कि तनाव होने का निशान न मिले, हम अनजान रह जाएं. इसलिए हमेशा अपनी शारीरिक और मानसिक गतिविधियों पर नज़र बनाए रखें. आप रोज़मर्रा की स्थितियों पर क्या प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उस पर ग़ौर करें. जिस समय आपको लगे कि आप तनाव से ग्रस्त हैं, तो अपने ब्लड शुगर लेवल की जांच करें. बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल के प्रति सावधानी बरतें और अगर स्ट्रेस लेवल में बढ़त के आसार नज़र आये, तो गहरी सांसें लें और शरीर को शांत रहने के लिए तैयार करें. हो सकता है तब भी तनाव शरीर को प्रभावित करे, ब्लड शुगर लेवल के बढ़े होने की वजह से आपकी मौजूदा दिमाग़ी हालत स्थिर नहीं रहती है. साथ ही अगर आपको इंसुलिन लेने का निर्देश मिला है तो ऐसे हालात में अपने साथ इंसुलिन का डोज़ तैयार रखें.

2. मेडीटेट / ध्यान लगाएं

जब हमारा शरीर अलग-अलग हालातों और स्थितियों से जूझता है, तब हमारे अंदर तनाव पैदा होता है. साथ ही जब हमारी भावनाएं किसी वजह से नहीं संभलती तब भी हमारे तनाव का स्तर बढ़ता है. ऐसा तब भी होता है, जब हमें कुछ स्थितियों से कैसे निपटा जाए इसका पता नहीं होता. यह उन हालातों में भी होता है, जब हमारा दिमाग़ नकारात्मक सोच में डूबा हो. ध्यान लगाने (मेडिटेशन) से आपको स्थितियों को लेकर वाकिफ़ रहने और दिमाग़ को इन नकारात्मक चीज़ों से उबारने में मदद मिलती है. यह साबित हो चुका है कि मेडिटेशन से घबराहट कम करने में मदद मिलती है, जिससे आप आसानी से हालातों पर क़ाबू पा लेते हैं.(2)

वीडियो देखें: हाई ब्लड शुगर लेवल पर कैसे क़ाबू करें.

3. कुछ चीज़ों को नियंत्रित करें

हो सकता है कि बीमारी या चोट लगने जैसे शारीरिक तनाव पर आपका नियन्त्रण ना हो, पर जिन मामलों में तनाव पैदा होने के बारे में आपको पहले ही अंदाज़ा हो उन्हें आगे बढ़कर ख़ुद के क़ाबू में करने की कोशिश करें. तनावपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या कुछ कर सकते हैं उसके लिए पहले से तैयार रहें. स्ट्रेस को कैसे मैनेज किया जाए और उसे कैसे नियंत्रित करें, इससे जुड़े लेख भी पढ़ने की कोशिश करें. एक साधारण और भरोसेमंद ट्रिक के तहत आप पहले से कुछ बातों की योजना बना लें इससे आपको आगे आने वाले तनाव से छुटकारा मिल सकता है.  

4. ख़ूब करें बातें

स्ट्रेस से निपटने का सबसे अच्छा तरीक़ा होता है कि जो बात परेशान कर रही हो, उसके बारे में बात करें या मदद ली जाए. ऐसे लोगों से बात करें जो आपको उस तनाव से छुटकारा दिला सकें. आपकी परेशानी सुलझाने के अलावा यह आपके तनाव को भी कम करने में आपकी मदद करेगा. अगर उस तनावपूर्ण हालात में कोई आपके साथ मौजूद ना हो, तो ख़ुद से बातचीत करें. हाल ही में की गई स्टडीज़ के मुताबिक़ ख़ुद से बातें करना भी काफ़ी फ़ायदेमंद होता है.(3)

5. व्यायाम  करें

पसीना बहाने से वज़न और शरीर का आकार सही बना रहता है. इतना ही नहीं, व्यायाम से स्ट्रेस यानी तनाव पर भी सीधा असर पड़ता है. असल में व्यायाम करने से एंडोर्फ़िन नाम का फ़ील गुड हॉर्मोन बनता है जो तनाव का ख़ात्मा और हमें ख़ुश रहने में मदद करता है. इसलिए अगर आप मानसिक तनाव महसूस करें तो हल्क़ा-फुल्क़ा व्यायाम करने की कोशिश कीजिए. बाहर वॉक करने जाएं या अपने घर के काम करें. इससे एंडोर्फ़िन रिलीज़ होता है, जो फ़ौरन आपके शरीर से तनाव के स्तर को कम करता है.(4)

नियमित एक्सरसाइज़ के ज़रिये आप अपने शरीर को अच्छा महसूस करने की आदत में ढाल सकते हैं. आगे चलकर यह स्ट्रेस के हमले को कम करता है, और आपके शरीर को उस स्थिति से भी निबटने में मदद करता है जब आप तनाव में होते हैं. पढ़ें, सुरक्षित एक्सरसाइज़ करने के टिप्स.

व्यायाम का सीधा असर आप अपने ब्लड शुगर लेवल पर देख सकते हैं. जो कि तनावपूर्ण हालातों में भी नहीं बढ़ता. इसलिए तनाव से निपटने का सबसे अच्छा ज़रिया नियमित एक्सरसाइज़ है ख़ासकर तब अगर आप डायबिटीज़ से ग्रसित हों. पर हाँ, एक बात की सावधानी भी बरतें, किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि शुरू करने के पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें, क्योंकि इससे आपके शरीर पर असर पड़ सकता है और ये आपके ब्लड शुगर लेवल के बैलेंस को बिगाड़ सकता है.

कंटेंट की समीक्षा :अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

संदर्भ:

  1. Blood sugar fluctuations by Dr Ananya Mandal, MD https://www.news-medical.net/health/Blood-Sugar-Normal-Values.aspx
  2. Mindfulness, meditation may ease anxiety, mental-stress https://www.health.harvard.edu/blog/mindfulness-meditation-may-ease-anxiety-mental-stress-201401086967
  3. Making meaning out of negative experiences by self-distracting http://selfcontrol.psych.lsa.umich.edu/wp-content/uploads/2013/09/2011_1_Kross_Ayduk_CDPS1.pdf
  4. Exercise reorganizes the brain to be more resilient to stress https://www.princeton.edu/news/2013/07/03/exercise-reorganizes-brain-be-more-resilient-stress

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