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डायबिटीज़ के मरीज़ों को त्वचा से जुड़ी समस्याएं होना बहुत आम है, फिर भी लोग इस पर ध्यान नहीं देते. आंकड़ों के मुताबिक़, लगभग 30% डायबिटिक में त्वचा से जुड़ी बीमारी पाई जाती है[1] डर्मेटोलॉजिस्ट के पास जाने वाला हर 5 में से एक शख़्स, डायबिटीज़ की वजह से होने वाली त्वचा से जुड़ी बीमारी के इलाज के लिए ही जाता है.

डायबिटीज़ में त्वचा की देखभाल करना बहुत ज़रुरी है. समय रहते किसी भी बीमारी का इलाज करवाने से बीमारी जल्दी ठीक होती है. देर करने से बीमारी का इलाज काफ़ी मुश्किल हो जाता है. डायबिटीज़ से होने वाली दूसरी परेशानियों की तरह ही, अगर आप ब्लड शुगर को लंबे समय तक ठीक ढंग से नियंत्रित रखते हैं, तो त्वचा से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है. साथ ही, उनकी गंभीरता या अवधि दोनों को कम किया जा सकता है.

त्वचा से जुड़ी बीमारी, डायबिटीज़ की वजह से कैसे होती है?

ब्लड ग्लूकोज (hyperglycemia) का लेवल ज़्यादा होने से खून में इंसुलिन का लेवल काफी बढ़ जाता है. साथ ही, बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कमज़ोर होने लगती है. इन्हीं वजहों से डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों में त्वचा से जुड़ी परेशानी होने लगती है.

किस तरह की त्वचा से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं?

1. इंफ़ेक्शन

डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों में वैसे भी इंफ़ेक्शन होने की आशंका ज़्यादा ही रहती है, त्वचा पर इंफ़ेक्शन होना कोई नई बात नहीं है. डायबिटीज़ से जुड़ी सबसे आम त्वचा की बीमारी (लगभग 40%) जननांगों का संक्रमण (बैक्टीरियल और फ़ंगल) है.

2. त्वचा पर मस्से

कई लोगों की गर्दन और पीठ पर आपने छोटे-छोटे मुलायम मस्से निकले हुए देखें होंगे. दरअसल ये उन लोगों में ज़्यादा होते हैं, जिनका ब्लड शुगर और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) दोनों काफ़ी बढ़ा हुआ रहता है. यह समस्या प्री-डायबिटीज़ (फ़ास्टिंग ब्लड ग्लूकोज़ 110 से 125 mg/dL) वाले लोगों में भी हो सकती है.

3. एकैनथोसिस नाइग्रिकेंस

शरीर में जिन हिस्सों पर त्वचा मुड़ी हुई रहती है जैसे कि गर्दन या बगल, वहां की त्वचा का रंग बदल जाता है. वह हिस्सा वेलवेट जैसा लगने लगता है. इस अवस्था को एकैनथोसिस नाइग्रिकेंस कहते हैं. यह उन लोगों में ज़्यादा नज़र आता है, जिनका वज़न ज़्यादा होता है. असल में ऐसा इंसुलिन लेवल बढ़ जाने (जैसे कि हाइपरग्लाईसेमिया) के कारण होता है. महिलाओं में यह समस्या होना आम बात है. रो़ज़ाना एक्सरसाइज़ करने और वजन कम करने के साथ, अगर आप ब्लड शुगर को नियंत्रित रखते हैं तो इस परेशानी को कम कर सकते हैं.

4. रुखी त्वचा (ज़ेरोसिस)

डायबिटीज़ होने पर त्वचा में रूखापन होना भी ऐसी ही एक और परेशानी है जिस पर लोग ध्यान नहीं देते. मौसम/जलवायु के आधार पर (जैसे कि गर्म या ठंडे मौसम में), यह परेशानी 44% तक मधुमेह से ग्रस्त लोगों को हो सकती है.

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5. शिन स्पॉट (डायबिटिक डर्मोपैथी)

शिन स्पॉट, डायबिटिक लोगों में पाई जाने वाली त्वचा की सबसे आम समस्याओं में से एक है. इसमें घुटनों के नीचे छोटे-छोटे, गोल, हल्के लाल रंग के धब्बे उभर आते हैं. डायबिटीज़ से प्रभावित 55% लोगों ख़ासतौर पर पुरुषों में यह शिक़ायत होती ही है.[2] कुछ मामलों में कुछ ख़ास दवाइयों (जैसे कि एंटी-मलेरिया) की वजह से ऐसा हो जाता है.

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6. खुजली

डायबिटीज़ से प्रभावित ज़्यादातर लोग खुजली से परेशान रहते हैं. ख़ासतौर पर, शरीर के ऊपरी हिस्से और जननांगो के आस-पास खुजली ज़्यादा होती है. धुम्रपान ना करने वालों के मुक़ाबले धुम्रपान करने वाले डायबिटिक लोगों में खुजली ज़्यादा होती है.[3] इसका संबंध हाई ब्लड शुगर से भी हो सकता है.

7. चेहरा लाल होना (Rubeosis faciei) :

चेहरे का लाल होना भी डायबिटीज़ मेलिटस का एक लक्षण है. इस पर भी, आमतौर पर लोग ध्यान नहीं देते. ऐसे में अगर हाई ब्लड प्रेशर भी हो, तो स्थिति ज़्यादा ख़राब हो जाती है. इस समस्या से पता चलता है कि आप शुगर लेवल को ठीक से मैनेज नहीं कर पा रहे हैं. हालांकि यह समस्या उन लोगों में कम पता चलती है जिनकी त्वचा का रंग गहरा या सांवला होता है.

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अगर आपको ऊपर बताई गई कोई भी त्वचा से जुड़ी परेशानी है, तो आपको नज़दीकी डॉक्टर के पास जाकर डायबिटीज़ की जांच करवानी चाहिए. अगर आपका वज़न औसत से ज़्यादा है या फिर आपके परिवार में पहले से ही कोई डायबिटीज़ से प्रभावित है, तो आपको डायबिटीज़ होने की संभावना बहुत ज़्यादा रहती है. इनमें से कुछ लक्षण जैसे कि त्वचा पर मस्से और मुड़ी हुई त्वचा, हाइपर-पिगमेंटेशन और प्री-डायबिटिक में भी देखे जा सकते हैं. इन लक्षणों से परेशानी का पता लगाना आसान हो जाता है और इलाज जल्दी शुरु किया जा सकता है.     

डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों में त्वचा रोग के साथ हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ से जुड़ी दूसरी समस्याएं एक साथ भी हो सकती हैं. अगर आपको डायबिटीज़ से जुड़ी त्वचा की कोई समस्या है, तो अपने ब्लड प्रेशर की जांच कराएं. साथ ही ब्लड टेस्ट भी कराएं ताकि पता चल सके कि आपके बाकी अंग ठीक ढंग से काम कर रहें हैं या नहीं.  

डायबिटीज़ में होने वाली त्वचा की बीमारियों से बचाव कैसे करें?

अगर आपको किसी भी तरह की त्वचा से जुड़ी तकलीफ़ नहीं है, लेकिन आप या आपके परिवार में कोई डायबिटीज़ ग्रस्त है, तो अपनी त्वचा की नियमित जांच करते रहें. जैसे कि नहाते समय देखें कि त्वचा में कहीं पर दाग-धब्बे, लाल निशान, रैशेज़ वग़ैरह  तो नहीं हो रहे. इससे शुरूआत में ही रोग को पहचानने में और ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.

खाने में शुगर का खयाल रखने, वज़न कम करने और कार्बोहाइड्रेट का कम या सीमित सेवन करने से इंसुलिन लेवल को नियंत्रित रखना आसान हो जाता है और इससे त्वचा की बीमारियों (साथ ही, डायबिटीज़ से जुड़ी दूसरी बीमारियों) की रोकथाम भी होती है. धूम्रपान से बचें और डायबिटीज़ के लिए निर्धारित पौष्टिक आहार अपनाएं.

 

संदर्भ :

  1. Goyal A, Raina S, Kaushal SS, Mahajan V, Sharma NL. Pattern of cutaneous manifestations in diabetes mellitus. Indian J Dermatol. 2010;55(1):39.
  2. Vahora R, Thakkar S, Marfatia Y. Skin, a mirror reflecting diabetes mellitus: A longitudinal study in a tertiary care hospital in Gujarat. Indian J Endocrinol Metab. 2013;17(4):659.
  3. Bustan RS, Wasim D, Yderstræde KB, Bygum A. Specific skin signs as a cutaneous marker of diabetes mellitus and the prediabetic state–a systematic review. Dan Med J. 2017;64(1):5316.

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