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कंटेंट की समीक्षा अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

आपको डायबिटीज़ है इस बात का पता लगने के बाद, ये आपको तय करना होता है कि ये बात आप कब और किसे बताएंगे. ऐसे कई हालात होते हैं, जिसके चलते कुछ लोगों को इसके बारे में बताना ज़रूरी हो जाता है. जैसे कि आपके जीवनसाथी को, आपके डायबिटिक होने की जानकारी होनी ही चाहिए.

कुछ और परिस्थितियों में जैसे कि आपके ऑफ़िस में सबके साथ आपको ये जानकारी शेयर करने की कोई ज़रूरत नहीं है. लेकिन, जिनसे आप नियमित मिलते रहते हैं या जिनके साथ आप ट्रेवलिंग की प्लानिंग कर रहे हों या किसी सामाजिक कार्यक्रम का हिस्सा बन रहे हों, तो ऐसे में उससे जुड़े लोगों को व्यवहारिक रूप से आपके डायबिटिक होने की बात का पता होना सुरक्षा के लिहाज़ से बेहतर है.

तो फिर आपको ये कैसे पता चलेगा कि कब ये जानकारी शेयर करना ज़रूरी है और कब इसे नज़रअंदाज़ कर सकते हैं?

हम यहां आपको कुछ प्वाइंट्स और उन स्थितियों के बारे में बता रहे हैं, जहां डायबिटीज़ के बारे में बताना सही है और ये ज़रूरी भी हो जाता है:

  • अपने लाइफ़ पार्टनर के साथ

अगर आप सीरियस रिलेशनशिप में हैं या शादी करने वाले हैं, तो बेहतर होगा कि आप उनसे अपने डायबिटीज़ के बारे में भी बात करें, इस बात को यूं ही नज़रंदाज़ मत कीजिए. डायबिटीज़ की बात बताने पर आपके होने वाले पार्टनर को भी समझने में आसानी होगी कि शादी के बाद उन्हें किन स्थितियों के लिए तैयार रहना होगा.

मेडिकल साइंस, लाइफ़ स्टाइल सर्विस मुहैया कराने वाली ऐप्स और एजुकेशनल वेबसाइट्स की मदद से डायबिटीज़ को नियंत्रित और मैनेज करना अब ज़्यादा आसान है. बहरहाल, अपने साथी को इसके बारे में बताना हमेशा बेहतर होता है.

अगर आप शादीशुदा है तो पार्टनर को अपने स्वास्थ्य की जानकारी नियमित रूप से देते रहें. डायबिटीज़ को मैनेज करने में वो आपकी काफ़ी मदद कर सकते हैं, फिर चाहे वह डाइट, नियमित व्यायाम या रूटीन चेक-अप से जुड़ी चीज़ें ही क्यों न हो.

नोट: अगर आप डायबिटीज़ की बात अपनों को बताने जा रहे हैं, और उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं है, तो उनसे ये बात साझा करने से पहले आप डायबिटीज़ से जुड़ी सभी जानकारियां और इसे समझाने में मदद करने वाले साधन अपने साथ रख लें. इससे आप उनके डर को दूर और सवालों के जवाब दे सकेंगे. क्योंकि, आपका ‘फ़िक्र की कोई बात नहीं’ इतना भर कहना उनके सवालों के जवाब के तौर पर काफ़ी नहीं है और इससे उनपर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

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  • आपके ऑफ़िस में

आज के दौर में हम लोगों का वक़्त अपनों से ज़्यादा ऑफ़िस के सहकर्मियों के साथ गुज़रता है. आपके साथ वो पूरे समय ऑफ़िस की मीटिंग, कॉन्फ्रेंस कॉल, प्रोजेक्ट्स की माथापच्ची में शामिल होते हैं. ऐसे हालात में दूसरों को ये पता होना ज़रूरी है कि आपको रेगुलर डाइट लेनी है, जिससे आपका ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहे. जिसका सीधा मतलब है कि कुछ समय के गैप में आप डायबिटीज़ के लिहाज़ से बेहतर डाइट खाते रहें. इसके अलावा चाय, कॉफ़ी में भी शुगर फ़्री का इस्तेमाल हो,और लंबी मीटिंग के दौरान ब्रेक मिलता रहे.

नोट: बेहतर होगा कि आप ख़ुद अपने नाश्ते को ऑर्डर करें या खाने की चीज़ें साथ लेकर चलें. इसके साथ ही शुगर फ़्री स्वीटनर भी हमेशा चाय-कॉफ़ी के लिए अपने साथ रखें. इससे तुरंत मीठे की ज़रुरत पड़ने पर आपको परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. ये ख़ासकर तब ज़रूरी हो सकता है, जब आप मीटिंग के लिए ऑफ़िस के बाहर गए हों और वहां आपकी ये ज़रूरतें पूरी न हो सकें.

  • लंबे टूर या ट्रिप पर जाने के दौरान

काम के दौरान आपको कई मर्तबा बाहर जाना पड़ता है,दिन में किसी भी समय ट्रेवलिंग करने की वजह से आपके खाने का और एक्सरसाइज़ का रूटीन बिगड़ जाता है. इसलिए अपने सहयात्री, सहकर्मी, सहायक को आप अपनी सेहत से जुड़ी सभी जानकारियों और ज़रूरतों की सारी बातें पहले से ही बता दें. उन्हें यह बताएं कि इमरजेंसी की हालत में वे क्या करें या आपका ब्लड शुगर लेवल कम हो जाए तो क्या क़दम उठाएं. यह सूचना आगे चलकर काम आ सकती है.

नोट:  हमेशा इस बात को ध्यान में रखें कि आपने कितने घंटों की नींद ली है और पूरे दिन आपने क्या खाया. काम के दौरान सुबह जल्दी फ़्लाइट लेने या फिर रात भर चलने वाली मीटिंग्स के चलते आप अक्सर भूल जाते हैं कि आपने आख़िरी बार क्या खाया था. इसलिए अपने सहकर्मियों के साथ आपकी सेहत से जुड़ी ये बातें शेयर करने में ज़रा भी संकोच न करें, ताकि इससे उन्हें भी पता चले कि आप ठीक हैं या आपको किसी बात की ज़रूरत है.

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  • एथलेटिक इवेंट या सामाजिक सभा

ये काफ़ी अच्छी बात है कि इनदिनों ज़्यादा से ज़्यादा मधुमेह से ग्रस्त लोग फ़िट बने रहने की कोशिश करते देखे जा सकते हैं, और वे डायबिटीज़ को रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में आड़े नहीं आने देते. फिर चाहे बात मैराथन में भाग लेनी की हो या फिर रिश्तेदारों के यहां कुछ दिनों के लिए किसी जश्न में जाने की. ऐसे में अपने साथियों को ज़रूर बताएं कि अगर आप अचानक थक जाएं या शारीरिक रूप असहज हों तो उन्हें क्या कुछ करना चाहिए और किन बातों को लेकर एहतियात बरतनी होगी.

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नोट: अपने बैकपैक या पॉकेट में इमरजेंसी नंबर और दवाइयों की लिस्ट के बारे में अपने साथी को बताकर रखें, क्योंकि हो सकता है आपके इन्सुलिन का स्तर कम होने पर आपको इसकी ज़रूरत पड़े. वैसे आप डायबिटीक होने की बात को साथियों से मज़ाकिया अंदाज़ में भी कह सकते हैं, देखा जाए तो ऐसा करने पर आपका मक़सद उन्हें अपनी सेहत को लेकर डराना नहीं होता, बल्कि उनमें विश्वास जगाना होता है कि किसी भी हालत में वो आपका ख़याल रख सकते हैं.

डायबिटीज़ का होना ज़िंदगी की आम घटना की तरह ही है. अपने परिजनों को डायबिटीज़ से जुड़ी बातों को आप इस तरह समझाएं कि वे इमरजेंसी में बिना घबराए हालात पर क़ाबू पा सकें. आपकी डायबिटीज़ से जुड़ी जानकारी और ज़रूरतों का कुछ ख़ास लोगों को पता होना बेहतर होता है. इससे आपके रिश्तों में भी मज़बूती बनी रहती हैं.

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