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जैसाकि बहुत से लोगों को पता है, ख़ासकर डायबिटीज़ से प्रभावित लोग तो जानते ही हैं कि डायबिटीज़ में शरीर या तो ज़रूरत भर का इंसुलिन बना नहीं पाता है या फिर शरीर में मौजूद इंसुलिन का ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता. इसकी वजह से ख़ून में शुगर का लेवल बढ़ जाता है. इससे किडनी, हार्ट, नर्व, दिमाग़, आंखों और ख़ून की धमनियों को नुक़सान पहुंचता है. इसके अलावा, शरीर का थोड़ा सा भी बढ़ा हुआ वज़न इंसुलिन के इस्तेमाल में बाधा बन सकता है[1]. ये ऐसी कंडीशन होती है जिसमें आपका शरीर इंसुलिन का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर सकता है. यहीं पर डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों के लिए असरदार डाइट प्लान अपनाना ज़रूरी हो जाता है. तो इसका सबसे असरदार तरीक़ा क्या है और डायबिटीज़ से प्रभावित एक आम व्यक्ति इसे कैसे अपना सकता है? आइए इस बारे में जानते हैं.

ह्यूमन-पॉवर्ड कैलोरी काउंटिंग सर्विस, द फ़ूड एनालिस्ट्स के फाउंडर वीर रामलुगॉन ये जानने में हमारी मदद करेंगे कि डायबिटीज़ में फ़ायदा पहुंचाने वाली डाइट कैसी होनी चाहिए, जिसे डायबिटीज़ से प्रभावित सभी लोग अपनाएं.

डायबिटीज़ में खानपान के कुछ ख़ास नियम:

  • भोजन करने में लापरवाही ना करें, ख़ासकर नाश्ता तो ज़रूर करें 
  • थोड़े-थोड़े समय पर कुछ ना कुछ खाते रहें 
  • देखें कि आप कितना कार्बोहाइड्रेट खा रहे हैं 
  • लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स के साथ कार्बोहाइड्रेट पर ध्यान दें 
  • भोजन में से ग्लाइसेमिक लोड को कम करने के लिए कार्बोहाइड्रेट से भरपूर ऐसा भोजन लें जिसमें प्रोटीन और ज़रूरी फ़ैट शामिल हों   
  • शाम 4 बजे के बाद फल ना खाएं 
  • शुगर और फ़ैट वाली चीज़ें एक साथ कम से कम खाएं 
  • एक समय में बहुत ज़्यादा खाना ना खाएं 
  • खाने पीने की डिब्बाबंद चीज़ें ख़रीदते समय लेबल पर चेक करें कि उसमें कौन सी चीज़ कितनी है और मात्रा के अनुपात में उसमें कैलोरी ज़्यादा तो नहीं है 
  • दिन में कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज़ करें 
  • शुगर-स्वीटेंड ड्रिंक और फ़ूड से बचें 
  • फलों को पीने के बजाए उन्हें खाएं (जूस लेने से बचें)
  • नाश्ते में कम कार्बोहाइड्रेट वाली चीज़ें चुनें जैसेकि सूखे मेवे और तिलहन या दूध-दही वगैरह
  • आपकी थाली में दूसरी चीज़ों के मुक़ाबले प्रोटीन ज़्यादा होना चाहिए 
  • शक्कर के बजाए स्वीटनर इस्तेमाल करें 
  • आलू और ब्रेड के बजाए सब्ज़ियां खाएं
  • गेंहू के आटे की जगह ज़्यादा फाइबर वाले अनाज खाएं
  • बिना स्टार्च वाली सब्ज़ियां खाने पर ज़ोर दें 
  • दूध से बनी ऐसी चीज़ें चुनें जिनमें कार्बोहाइड्रेट कम हो
  • जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ता जाए, कार्बोहाइड्रेट वाली चीज़ें कम ही खाएं
  • अपने भोजन में फ़ायदेमंद फ़ैट शामिल करें
  • मैक्रो-काउंटर की मदद से चेक करें कि आप कितना कार्बोहाइड्रेट खा रहे हैं 

अब हम ऊपर बताए गए नियमों में से कुछ ख़ास मुद्दों पर बात करेंगे.

ब्लड शुगर में उछाल आने से बचने के लिए ग्लाइसेमिक लोड पर ध्यान दें:

ग्लाइसेमिक लोड आपको बताता है कि कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाने की कितनी मात्रा आपके शुगर लेवल को बढ़ा देगी. जब आप हाई ग्लाइसेमिक लोड और ग्लाइसेमिक इंडेक्स फ़ूड खाते हैं, आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है. इससे आपको कुछ देर पेट भरा होने का एहसास होता है. लेकिन जैसे ही ब्लड शुगर लेवल नीचे आता है, आप फिर से भूख महसूस करते हैं. आप फिर से खाना चाहते हैं (ख़ासकर कार्बोहाइड्रेट). और होता ये है कि इस चक्कर में आप ज़्यादा कैलोरी खा लेते हैं. ज़्यादा कैलोरी का सीधा संबंध वज़न बढ़ने और शुगर लेवल हाई होने से है. ग्लूकोज़ के सही इस्तेमाल के लिए लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फ़ूड खाएं और लो ग्लाइसेमिक लोड भोजन लें. इस तरह आप देर तक पेट भरा हुआ महसूस करेंगे और आपके ख़ून में शुगर लेवल का बैलेंस सही रहेगा.

खाने की मात्रा पर ध्यान दें:

खाने की मात्रा पर कंट्रोल रखने से आप खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर भी कंट्रोल रख सकते हैं. इससे ख़ून में ग्लूकोज़ की रिलीज़ ज़रूरत के मुताबिक़ और लगातार बनी रहने में मदद मिलती है क्योंकि इस तरह आप ज़्यादा कैलोरी नहीं खाते, ऐसे में इससे वज़न पर कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है. नतीजा ये कि इंसुलिन के लिए आपके शरीर की सेंसिविटी में सुधार आता है और ब्लड ग्लूकोज़ का लेवल ज़्यादा संतुलित रहता है.

खाने की चीज़ें ख़रीदते समय नुट्रीशनल वैल्यू को समझें:

डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों के लिए फ़ायदेमंद होने का दावा करने वाले सैकड़ों खाने की चीज़ों से आज बाज़ार भरा पड़ा है. कम शुगर वाले क़ुदरती फ़ूड आज ‘डायबिटीज़ में फ़ायदेमंद’ का दावा करते हुए अपने डिब्बाबंद अवतार में आ चुके हैं, जैसेकि रागी बिस्किट. लेकिन सच तो ये है कि ऐसा बिस्किट जो प्रोसेस्ड और रिफाइंड हो, वो कभी भी साबुत अनाज की ख़ूबियों की बराबरी नहीं कर सकता. असल में तो ये बस अपना माल बेचने का एक चालाकी भरा तरीक़ा है. मिसाल के तौर पर, कम फ़ैट वाले खानपान आमतौर से शुगर से भरे होते हैं और जिनमें शुगर कम हो, वो फ़ैट से भरपूर होते हैं. डायबिटीज़ वालों के लिए ये दोनों ही तरह के खानपान नुक़सानदेह होते हैं.

इसी तरह बाज़ार में मिलने वाले कुछ फ़ूड फ़ाइबर से भरपूर होने का दावा करते हैं; हालांकि ऐसे फ़ूड की एक बार में जितनी मात्रा खाई जाती है, उससे हमारी रोज़ाना की ज़रूरत भर के फाइबर का 10% भी पूरा नहीं होता. इसके अलावा, आम लोगों को फ़ूड में मौजूद चीज़ों के बारे में ज़्यादा जानकारी तो होती नहीं, जिसका फ़ायदा उठाते हुए लेबल पर कुछ चीज़ों के दूसरे नाम छाप दिए जाते हैं और एक आम आदमी आसानी से ठग लिया जाता है. इस तरह, लेबल पर दी गई जानकारी को सही तरह समझना और फ़ूड प्रोसेसिंग की तकनीक को जानना बेहद अहम है, जबकि हेल्दी खानपान के मामले में इस पहलू को अब तक नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है.

तो ये हैं हेल्दी खानपान के बारे में कुछ बुनियादी बातें, जो डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों की मदद तो करेगी ही, हेल्दी खानपान की चाह रखने वालों के लिए भी कम फ़ायदेमंद नहीं हैं. इन बातों को ध्यान में रखते हुए खानपान के मामले में इन्हें अपनी आदत में शामिल करें. आप अपने खाने के अंदाज़ में ही नहीं, अपनी सेहत में भी बड़ा और बेहतर बदलाव देखेंगे.

संदर्भ:

  1. Barbara B. Kahn and Jeffrey S. Flier.  Obesity and insulin resistance.  J Clin Invest. 2000 Aug 15; 106(4): 473–481. doi: 10.1172/JCI10842,   https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC380258/

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