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जब भी आप वज़न घटाना चाहते हैं, तो पहली बात आपके दिमाग में क्या आती है? यही न कि अब से तेल, मक्खन और घी खाना कम कर दिया जाए. इससे पहले कि आप फिर से वज़न घटाने की एक और कसम खाएं, जान लें कि वज़न घटाने की कहानी में खलनायक कौन है.

लोहा, लोहे को काटता है

खाने की चीज़ों में फ़ैट यानी फ़ैट को सबसे ज़्यादा गलत समझा गया है. अगर बात पेट, कूल्हों और जांघों की ज़िद्दी चर्बी को कम करने की हो और हम कहें कि चर्बी घटाने के लिए फ़ैट ज़रूरी है तब आपको लगेगा कि हम मज़ाक कर रहे हैं! बढ़े हुए फ़ैट युक्त आहार में ऐसी क्षमता होती है, जो शरीर की फ़ैट कोशिकाओं को ज़्यादा कैलोरी बर्न (ख़र्च) करने के लिए प्रेरित करती हैं.

हमारी बात पर भरोसा करें, हम आपको ‘अप्रैल फूल’ नहीं बना रहे हैं.

शरीर से फ़ैट कम करने में बहुत सारे कैलोरी वाली गतिविधि शामिल होती है

फ़ैट में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के मुकाबले ज़्यादा कैलोरी होती हैं. मतलब यह हुआ कि फ़ैट से आपको हर ग्राम पर 9 कैलोरी मिलती है जबकि कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के हर ग्राम से 4 कैलोरी मिलती है. अगर आप कैलोरी से भरपूर आहार नहीं लेंगे, तो आपके शरीर को कैलोरी ख़र्च करने के लिए ज़रूरी ताकत नहीं मिल पाएगी. यह मेटाबॉलिक गतिविधियों के लिए भी ज़रूरी है.

आप आहार में जो फ़ैट लेते हैं, वह चर्बी घटाने वाले एंज़ाइम और हॉर्मोन को सक्रिय करती है. इस तरह शरीर से फ़ैट घटाने की प्रक्रिया आसान हो जाती है.

शरीर में इंसुलिन का लेवल अहम भूमिका निभाता है. आइए देखते हैं, यह कैसे काम करता है. जब आप कार्बोहाइड्रेट खाते हैं, तो इंसुलिन का लेवल पहले बढ़ता है और फिर गिर जाता है. इस गिरावट की वजह से ही आपको फिर भूख लगने लगती है. फ़ैट वाले खाने से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है.

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जब आप कम कार्बोहाइड्रेट और ज़्यादा फ़ैट वाला खाना खाते हैं, तो आपका शरीर कीटोसिस की अवस्था (ऐसी अवस्था जिसमें शरीर में कीटोन की मात्रा बढ़ जाती है) में चला जाता है. ऐसे में आपका शरीर एनर्जी के लिए फ़ैट का इस्तेमाल करने लगता है. इसका मतलब यह हुआ कि पहले आपका शरीर एनर्जी के लिए खाने में लिए गए फ़ैट का इस्तेमाल कर लेता है और इसके बाद शरीर में जमी चर्बी से एनर्जी का उत्पादन करने लग जाता है. इस तरह से आपका वज़न कम होता है.

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सीधे शब्दों में कहें तो, यह वज़न कम करने और इंसुलिन का लेवल स्थिर रखने में सहायक है .

सभी फ़ैट एक तरह से नहीं बनते.

यहां एक मुश्किल है. फ़ैटयुक्त आहार लेने का ये मतलब बिल्कुल नहीं होता कि आप चिप्स जैसी चीज़ें बहुत ज़्यादा खाने लगें. यहां फ़ैट का मतलब सेहतमंद फ़ैट से है.

सेहतमंद मोनो अनसैचुरेटेड फ़ैट:

माना जाता है कि फ़ैट, कोलेस्ट्रॉल लेवल के लिए नुकसानदेह होता है. हालांकि, यह सभी तरह के फ़ैट के लिए सच नहीं है.

असल में, खाने की ऐसी चीज़ें जिनमें नट्स, बीज और कुछ ख़ास किस्म के तेल शामिल हैं, उनमें मोनो अनसैचुरेटेड फ़ैटी एसिड यानी एमयूएफ़ए होता है. खाने की ये चीज़ें दिल की बीमारी के ज़ोखिम को कम करते हैं. ऐसा इसलिए हो पाता है क्योंकि इस तरह की खाने की चीज़ें नुकसानदेह कोलेस्ट्रॉल (इसमे कुल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल अर्थात लो डेंसिटी लाइपोप्रोटीन्स शामिल हैं) को कम करके सेहतमंद कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल अर्थात हाई डेंसिटी लाइपोप्रोटीन्स) को बनाये रखते हैं.

इसके अलावा, एमयूएफ़ए का इंसुलिन और ब्लड शुगर के नियंत्रण पर सकारात्मक असर पड़ता है, जो टाइप 2 डायबिटीज़ में फायदेमंद होता है .

एमयूएफ़ए वाले इन खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए: बादाम, जैतून का तेल, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज, तिल का तेल, कद्दू के बीज और चिया के बीज (सब्जा).

ज़रूर खाएं ये एसेंशियल फ़ैट

ओमेगा 3 फ़ैट सेहत के लिए अच्छा होने की वजह से बहुत पौष्टिक होता है.

यह एसेंशियल फ़ैट, एरिदमिया (हृदय का अनियमित रूप से धड़कना) को रोकता है और साथ ही धमनियों में पट्टी अर्थात प्लैक का निर्माण करता है. अपने एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों की वजह से, ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड जोड़ों के दर्द को कम करता है. उसके साथ ही ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड रुमेटाइड आर्थराइटिस से प्रभावित लोगों के जोड़ों के दर्द और जकड़न को भी कम करता है. यही नहीं, ये एसेंशियल फ़ैट मस्तिष्क के विकास और कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और साथ ही हड्डियों के स्वास्थ्य में भी सहायक होते हैं. इस प्रकार, ओमेगा 3 फ़ैट दिल के दौरे, अवसाद, डिमेंशिया, ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया के ज़ोखिम को कम करता है.

मैकेरल (एक छोटी समुद्री मछली), अखरोट, अलसी के बीज, सरसों का तेल, और सार्डिन (एक छोटी मछली) जैसे ओमेगा 3 फ़ैट से भरपूर खाने की चीज़ों को आपको अपने आहार में ज़रूर शामिल करना चाहिए .

इसी तरह, ओमेगा 6 फ़ैटी एसिड, कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करने और दिल संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है.

ओमेगा 6 फ़ैट सूरजमुखी, सोयाबीन, मक्का और सूरजमुखी के तेल में पाया जाता है .

चेतावनी: कुछ फ़ैट दूसरे सेहतमंद फायदों के साथ आपके लिपिड प्रोफाइल में गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं. आइए इसे और अच्छी तरह समझते हैं.

सैचुरेटेड फ़ैट:

यह फ़ैट आपके फेफड़ों, मस्तिष्क और बीमारियों से लड़ने की क्षमता के लिए फ़ायदेमंद है.

हालांकि, ज़्यादा सैचुरेटेड फ़ैट युक्त भोजन से बचना चाहिए क्योंकि ये आपके कोलेस्ट्रॉल (ख़ासतौर पर नुक़सान पहुंचाने वाले एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है). ऐसे में धमनियों में अवरोध होते हैं, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ता है.

यह हमेशा ध्यान रखें कि सैचुरेटेड फ़ैट की मात्रा आपके द्वारा ली गई कुल कैलोरी की मात्रा के 10% से कम ही रहनी चाहिए.

सैचुरेटेड फ़ैट के बड़े स्रोत लाल मांस, अंडे का पीला भाग अर्थात अंडे की ज़र्दी, और सभी डेयरी उत्पाद जैसे मक्खन, पनीर और घी हैं. इसके अलावा नारियल का तेल, पाम ऑइल और कोकोआ बटर भी सैचुरेटेड फ़ैट के अच्छे स्रोत हैं.

ट्रांस फ़ैट:

यह सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाने वाला फ़ैट है. यह आपके दिल को नुकसान पहुंचा सकता है और इससे जितना हो सके उतना बचना चाहिए.

क्यों?

ट्रांस फ़ैट आपके कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल, ट्राइग्लिसराइड के स्तर को बढ़ाता है और एचडीएल के स्तर को कम करता है. इस तरह की परिस्थिति कार्डियोवस्कुलर (हृदय और रक्त वाहिनियों) संबंधी बीमारियों का ख़तरा काफ़ी हद तक बढ़ा देती है.

व्यवसायिक तौर पर उपलब्ध बेकरी उत्पादों जैसे केक, क्रैकर्स, डोनट, फ्रोजेन पिज़्जा और कुकीज़ तथा स्नैक्स जैसे टोर्टिला या आलू के चिप्स में ट्रांस फ़ैट पाया जाता है.

अब आप अलग-अलग तरह के फ़ैट और उनसे होने वाले फ़ायदों के बारे में समझ चुके हैं. फिर भी, आपके लिए यह समझना अब भी मुश्किल है कि फ़ैट का सेवन कितनी मात्रा में करना चाहिए.

इसलिए, हम आपको 7 ऐसे टिप्स बता रहे हैं जिससे फ़ैट से जुड़ी आपकी सारी उलझनें ख़त्म हो जाएंगी.

  • 4 लोगों के एक परिवार के लिए फ़ैट की मासिक खपत 2 लीटर होनी चाहिए. अगर दिल से जुड़ी कोई बीमारी न हो, तो आपके खाने में फ़ैट का अनुपात इस प्रकार होना चाहिए- 350 ग्राम घी, 150 ग्राम मक्खन और 1.5 लीटर तेल.
  • ऐसे उत्पाद खरीदें जिनमें हर 100 ग्राम में फ़ैट की मात्रा 17.5 ग्राम से कम और सैचुरेटेड फ़ैट की मात्रा 5 ग्राम से कम हो.
  • हर महीने अपने खाने वाले तेल को बदलते रहें. एक महीने आप मूंगफली के तेल में अपना खाना बनाएं. आने वाले महीनों में आप तिल, राइस ब्रान और सरसों का तेल चुन सकते हैं. इससे आपको एसेंशियल फ़ैट की पूरी ख़ुराक और उसके फ़ायदे आसानी से मिल जाएंगे.
  • सैचुरेटेड फ़ैट वाले किसी भी तेल के हर 100 मिली लीटर में सैचुरेटेड फ़ैट  की मात्रा 20 ग्राम से ऊपर नहीं होनी चाहिए.
  • व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध किसी भी तेल के पैक पर ‘कोल्ड प्रेस्ड’ या ‘फिल्टर्ड’ लिखा हुआ देखें, तो इसका मतलब है कि ये तेल रिफाइंड तेलों की अपेक्षा कम प्रक्रियाओं से गुजरा हुआ है.
  • ऐसे उत्पाद न खरीदें जिसमें, वनस्पति, मार्जरीन अर्थात कृत्रिम मक्खन या डालडा शामिल हो. इनके ज़रिए ट्रांस फ़ैट आपके आहार में चुपचाप पहुंच जाता है और आपकी सेहत को नुक़सान पहुंचाता है.
  • रोज़ाना बिना नमक के नट्स खाएं. रोज़ाना 6-8 बादाम, 4-5 अखरोट, 12-15 मूंगफली, 4-5 काजू या 8-10 पिश्ते खाने की सलाह दी जाती है.

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