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दूध हम में से ज़्यादातर लोगों के आहार का अहम हिस्सा होता है. क्योंकि हम दूध को कैल्शियम का बेहतरीन स्रो
त समझते हैं. पर इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि दूध में कार्बोहाइड्रेट्स भी होता है, ऐसे में अगर आप मधुमेह यानी डायबिटीज़ के हिसाब से आहार लेते हैं तो आपको दूध, दही, चीज़, मक्खन, घी, पनीर से बनी चीज़ों से कितनी कैलोरी मिल रही है इसपर ध्यान देना चाहिए.

अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन के मुताबिक़, डायबिटिक लोगों को 45 से 60 ग्राम कार्बोहाइड्रेट प्रति भोजन अपने आहार में शामिल करना चाहिए. अगर आप ब्रेकफ़ास्ट में एक ग्लास दूध भी पीते हैं (इसमें लगभग 27 ग्राम कार्बोहाइड्रेट्स होता है) तो आपके भोजन में ये कितना कैलोरी बढ़ा रहा है, इस बात पर ग़ौर करना चाहिए. जानें, आप अपने खाने को कैसे संतुलित और डायबिटीज़ फ़्रेंडली बना सकते हैं.

दूध का कौन सा प्रकार है बेहतर

  • दूध में जब सभी तत्व मौजूद रहें जैसे कि क्रीम, तो उस दूध को कच्चा दूध या वसा युक्त दूध कहा जाता है. इस दूध में भरपूर मात्रा में फ़ैट(वसा) मौज़ूद होता है, इसलिए इसमें ढेर सारी कैलोरी पाई जाती है.
  • जिस दूध से वसा यानी फ़ैट निकाल दिया जाता है, उसे स्किम्ड मिल्क कहते हैं. हालाँकि, इस दूध में फ़ैट की मात्रा कम या बिलकुल नहीं होती, जबकि इसमें कार्बोहाइड्रेट्स मौजूद रहते हैं.
  • गाय या भैंस के दूध की बजाय बादाम का दूध बेहतर विकल्प हो सकता हैं, क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा भी कम होती है.
  • ये सभी बातें इस ओर इशारा करती हैं कि डायबिटिक लोगों के लिए गाय या भैंस का दूध स्वस्थ विकल्प नहीं है. लेकिन एक हालिया शोध से दूसरी बातें सामने आई हैं.

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कच्चा दूध हो सकता है टाइप 2 डायबिटीज़ में फ़ायदेमंद!

2013 में कई शोधों पर की गई एक समीक्षा में ये सुझाव दिया गया कि दरअसल, कच्चे दूध (होल मिल्क) का इस्तेमाल करने से डायबिटीज़ और दिल की बीमारी से सुरक्षा होती है. ऐसा दूध के वसा में मौजूद ट्रांस पामिटोलेक एसिड नाम के कंपाउंड की वजह से होता है, जो शरीर की इन्सुलिन सेंसिटिविटी को सुधारता है.[1],[2]

30 से 75 साल की उम्र के 3,300 हेल्दी लोगों पर 15 वर्षों तक स्टडी की गई जिसका नतीजा 2016 में पेश किया गया. इस प्रकाशन में बताया गया कि हाई फ़ैट युक्त डेरी उत्पादों का इस्तेमाल करने वालों में, लो फ़ैट फूड्स का सेवन करने वालों के मुक़ाबले टाइप 2 डायबिटीज़ के होने का ख़तरा 44% कम होता है. लेखकों ने सलाह देते हुए कहा है कि डेरी उत्पादों से मिलने वाले इस फ़ैट के चौकाने वाले परिणाम को समझने के लिए इसपर और स्टडी करने की ज़रूरत है.(3)

टाइप 1 डायबिटीज़ में ऊंटनी का दूध बेहतर है  

ऊंटनी के दूध पर किए गए शोध की समीक्षा में एक दिलचस्प बात सामने आई, इसमें ये पता चला कि ऊंटनी का दूध पीने से टाइप 1 डायबिटीज़ से ग्रस्त लोगों के ब्लड शुगर लेवल और इन्सुलिन की ज़रूरत को कम करने में मदद मिलती है.(4) इसी प्रकाशन में ये बात भी कही गई है कि ऊंटनी के दूध का इस्तेमाल करने पर डायबिटीज़ से जुड़ी किडनी, लीवर और घाव देर से भरने जैसी परेशानियों से बचने या इससे उबरने में मदद मिल सकती है.

दूध से बने उत्पाद और डायबिटीज़

यूएस में की गई एक स्टडी में ये पाया गया कि ज़्यादा दही खाने वाले वयस्कों को टाइप 2 डायबिटीज़ के होने का ख़तरा कम होता है.(5) डेरी उत्पादों पर की गई स्टडी के रिव्यू में कहा गया कि दूध से बने उत्पादों और पनीर का इस्तेमाल करने से असरदार ढंग से टाइप 2 डायबिटीज़ के होने के ख़तरे को कम किया जा सकता है.(6

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अब आपका सवाल ये हो सकता है कि इन आंकड़ों के मुताबिक़ मैं डायबिटीज़ में दूध और इससे बनी चीज़ें खा सकता/सकती हूँ? वो भी इस बात की फ़िक्र किए बिना कि इसका मेरे डायबिटीज़ पर कैसा असर होगा. तो फ़िलहाल इस सवाल का साफ़ तौर पर कोई जवाब मौजूद नहीं है; हम आपको एक साधारण मशवरा ये दे सकते हैं कि अपने आहार में इन चीज़ों को सीमित मात्रा में शामिल करें. इन चीज़ों से कितनी कैलोरी आपको मिल रही है इसका ध्यान रखें और अगर ज़रूरत पड़े, तो सावधानी बरतें, जिससे आपका ब्लड शुगर लेवल संतुलित बना रहे.

कंटेंट की समीक्षा: अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरुक कर रहीं हैं.


संदर्भ:

  1. D. Mozaffarian, H. Cao, I.B. King, R.N. Lemaitre, X. Song, D.S. Siscovick et al. Trans-Palmitoleic Acid, Metabolic Risk Factors, and New-Onset Diabetes in U.S. Adults. Annals of Internal Medicine, December 21, 2010. Available online at
    http://annals.org/aim/article-abstract/746575/trans-palmitoleic-acid-metabolic-risk-factors-new-onset-diabetes-u?volume=153&issue=12&page=790
  2. M. Kratz, T. Baars, S. Guvenet. The relationship between high-fat dairy consumption and obesity, cardiovascular, and metabolic disease. Eur J Nutr. 2013 Feb;52(1):1-24. doi: 10.1007/s00394-012-0418-1.
  3. M.Y. Yakoob, P. Shi, W.C. Willett, K.M. Rexrode, H. Campos, E.J. Oray et al. Circulating Biomarkers of Dairy Fat and Risk of Incident Diabetes Mellitus Among US Men and Women in Two Large Prospective Cohorts. Circulation. 2016; https://doi.org/10.1161/CIRCULATIONAHA.115.018410
  4. A.B. Shori. Camel milk as a potential therapy for controlling diabetes and its complications: A review of in vivo studies. Journal of Food and Drug Analysis. December 2015; 23(4): 609-618 https://doi.org/10.1016/j.jfda.2015.02.007
  5. M.Chen, Q. Sun, E. Giovannucci, D. Mozaffarian, J.E. Manson, W.C. Willett et al. Dairy consumption and risk of type 2 diabetes: 3 cohorts of US adults and an updated meta-analysis. BMC Med 2014;12:215. Available online at https://bmcmedicine.biomedcentral.com/articles/10.1186/s12916-014-0215-1
  6. D. Aune, T. Norat, P. Romundstad, L.J. Vatten. Dairy products and the risk of type 2 diabetes: a systematic review and dose-response meta-analysis of cohort studies. The American Journal of Clinical Nutrition. October 2013; 98(4): 1066–1083  https://doi.org/10.3945/ajcn.113.059030

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