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डायबिटीज़, ग़लत लाइफ़स्टाइल की वजह से होने वाली परेशानी है. इसलिए डॉक्टर दवाओं के साथ-साथ लाइफ़स्टाइल में बदलाव की सलाह भी देते हैं. ये बदलाव ना सिर्फ़ आपके ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करते हैं, बल्कि इलाज को भी ज़्यादा कारगर बनाते हैं. लाइफ़स्टाइल के साथ किए जाने वाले इन इलाजों के नतीजे हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होते हैं. आमतौर पर सभी लोगों को पौष्टिक भोजन और नियमित व्यायाम की सलाह दी जाती है. किसी व्यक्ति को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसका जवाब इतना सीधा नहीं है. यह कई चीज़ों पर निर्भर करता है. इसमें व्यक्ति के स्वाद, इच्छा और खान-पान में बदलाव का उसके शरीर पर असर शामिल है.

पशुओं से मिलने वाले किसी भी तरह के उत्पाद का वनस्पतियों से बनने वाले आहार में होना ही इसकी ख़ासियत है. इस आहार के बारे में अक्सर लोग बात करते हैं. पशुओं से मिलने वाले उत्पादों में दूध, दही या इनसे बनने वाली दूसरी चीज़ें, मछली, अंडा, शहद जैसी चीज़ें शामिल हैं.

वीडियो देखें: डायबिटीज़ में ऐसे करें पोर्शन कंट्रोल 

इस बहस में दोनों तरफ से कई तर्क दिए जाते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि शरीर की प्रोटीन से जुड़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पशुओं से मिलने वाले उत्पाद ज़रूरी है. हालांकि वनस्पति आधारित आहार को खारिज़ करने के लिए सिर्फ़ यह तर्क काफ़ी नहीं है. औसतन एक व्यक्ति को 80-10-10 (80 कार्बोहाइड्रेट, 10 प्रोटीन और 10 फ़ैट) के अनुपात में पोषक तत्वों की जरूरत होती है. ये जरूरतें वनस्पति आधारित आहार जैसे हरी सब्जियों, फलियों, दालों, अनाज, नट्स, बीजों और सोयाबीन से बने टोफू जैसी चीज़ों से भी पूरी हो सकती हैं.

वनस्पतियों से मिलने वाले आहार के समर्थक तर्क देते हैं कि डायबिटीज़ और ख़ासतौर पर टाइप 2 डायबिटीज़ में इंसुलिन का प्रतिरोध ब्लड शुगर बढ़ा देता है. इससे इंसुलिन का प्रतिरोध कम होता है और शुगर के लेवल में सुधार होता है. इससे डायबिटीज़ को कंट्रोल किया जा सकता है.

यह जानने के लिए कि वनस्पतियों से मिलने वाले आहार को खाने में क्यों और कैसे शामिल करना चाहिए, हमने अपनी आहार विशेषज्ञ से बात की.

मधुरा वायल अमेरिका के केंटकी से आहार विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट हैं. वह इ-कॉर्नेल न्यूयॉर्क द्वारा प्रमाणित प्राकृतिक-आहार और वनस्पति आधारित आहार की विशेषज्ञ हैं.

मधुरा के मुताबिक ज़्यादा फ़ैट वाला भोजन डायबिटीज़ की अहम वजह है. “पशुओं से मिलने वाले उत्पादों में नुकसान पहुंचाने वाले एलडीएल (लो डेंसिटी लाइपोप्रोटीन) जैसे फ़ैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज़्यादा होती है. ये इंसुलिन के काम में रुकावट पैदा करके इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी तकलीफ़ पैदा करते हैं. जिससे कोशिकाएं ग्लूकोज़ लेना कम कर देती हैं और ब्लड शुगर की मात्रा बढ़ जाती है.(1,2,3) पशुओं से मिलने वाले उत्पादों को बहुत ज़्यादा प्रोसेस किया जाता है. इसमें रासायनिक तत्व और प्रिज़र्वेटिव होते हैं, जो हमारे हॉर्मोन के काम में भी रुकावट पहुंचाते है जिससे हॉर्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है. इससे डायबिटीज़ होता है.

मधुरा, पशुओं से मिलने वाले आहार के बजाय वनस्पतियों से मिलने वाले प्राकृतिक आहार की सलाह देती हैं. इसमें प्राकृतिक रूप से विटामिन, खनिजों की मात्रा ज़्यादा होती है और फ़ैट की मात्रा कम होती है. इनमें फ़ाइबर भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. फ़ाइबर, बढ़े हुए ब्लड शुगर को अवशोषित करने और शरीर की बढ़ी हुई चर्बी को घटाने में असरदार है. वनस्पतियों से मिलने वाले भोजन को इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में भी मददगार पाया गया है.

अगर आप पशुओं से मिलने वाले आहार की जगह वनस्पतियों से मिलने वाले आहार डाइट शुरू करना चाहते हैं, तो इन आसान उपायों को अपनाएं.

अपने दिन की शुरुआत ग्रीन स्मूदी से करें. इसे हरी पत्तेदार सब्ज़ियों से बनाएं और मिठास के लिए केला या खजूर का इस्तेमाल करें. यह शरीर में एसिड की मात्रा को बेअसर कर देता है. इसके साथ ही इससे जरूरी कार्बोहाइड्रेट और फ़ाइबर भी मिलता है, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है.

चाय और कॉफ़ी से परहेज़ करें. इसकी जगह जड़ी बूटियों का अर्क या ग्रीन टी, लेमन टी जैसी चीज़ें लें.

डेयरी उत्पादों की जगह चावल, सोयाबीन, बादाम और जौ से बने दूध का इस्तेमाल करें. ये सब उत्पाद आसानी से बनाए जा सकते हैं और साथ ही बाजार में भी मिलते हैं .

 पनीर पशुओं से मिलने वाला आहार है, इसलिए इसकी बजाय आप वनस्पतियों से मिलने वाले काजू चीज़, टोफ़ू मेयोनीज़ जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करें. इसी तरह दूध से बने दही की जगह, बिना दूध के बनने वाले दही का इस्तेमाल करें. इस दही को मूंगफली,चावल, बादाम और सोयाबीन के दूध से बनाया जाता है.

रीफ़ाइंड शुगर की जगह मिठास के लिए कुछ और इस्तेमाल करें. इसकी जगह आप सूखे अंजीर, खजूर और किशमिश जैसी चीज़ें इस्तेमाल कर सकते हैं. भीगे हुए खजूर को पीसकर उसका पेस्ट बनाएं. इस पेस्ट को आप मिठास के लिए कहीं भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

प्रोसेस्ड फ़ूड से भी परहेज़ करें. उनकी जगह घर पर बनी खाने की चीज़ें इस्तेमाल करें. इससे आप पशुओं से मिलने वाले उत्पादों और खाने की रीफ़ाइंड चीज़ों के इस्तेमाल से बच जाएंगे. इन दोनों का सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. खाने की रीफ़ाइंड चीज़ें जैसे मैदा, सफ़ेद चीनी, सफ़ेद चावल, रीफ़ाइंड तेल और रीफ़ाइंड नमक वग़ैरह रासायनिक रूप से प्रोसेस किए जाते हैं. प्रोसेस्ड फ़ूड जैसे कि चिप्स, ब्रेड, कैचप, बिस्कुट वगैरह में प्रिज़र्वेटिव के रूप में नुक़सानदायक केमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं. ये प्रिज़र्वेटिव, हॉर्मोन के काम में रुकावट पहुंचाते हैं. आप अपनी डाइट में खाने की ऑर्गेनिक चीज़ों और साबुत अनाज को ज़्यादा से ज़्यादा शामिल करें.

इस तरह आटे को बनाएं डायबिटीज़ फ़्रेंडली 

मैदे और सफ़ेद चावल की जगह साबुत अनाज और रीफ़ाइंड शुगर की जगह खजूर और किशमिश अपनाएं. अनाज और दाल का छिलका निकालने और उसे पॉलिश करने से बचें.

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