diabetes and infertility
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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाईजेशन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक़ “अगर 2 सालों तक शारीरिक संबंध रखने और गर्भधारण करने की कोशिश के बावजूद भी गर्भ ना ठहरे, तो वह इनफ़र्टिलिटी (बाँझपन) है’’

बेंगलोर स्थित नोवा IVI फ़र्टिलिटी, में फ़र्टिलिटी कंसलटेंट के तौर पर काम कर रहीं डॉ पल्लवी प्रसाद के अनुसार, “प्रत्येक 10-12 जोड़ों में से 1 जोड़े को गर्भधारण करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा जांच या इनफ़र्टिलिटी ट्रीटमेंट की ज़रूरत पड़ती है. कई नए जोड़ों को बच्चा पैदा करने के लिए जूझना पड़ रहा है, क्योंकि दोनों में से किसी एक को डायबिटीज़ या मधुमेह है”.

हालिया स्थिति यह है कि भारत में डायबिटीज़ की घटना बेहद आम होती जा रही है. आंकड़ों के मुताबिक़ 62 मिलियन से ज़्यादा भारतीयों को डायबिटीज़ की चपेट में पाया गया है.[1]

जिसका मतलब हुआ कि डायबिटीज़ की बढ़ती दर के साथ बाँझपन की दर में भी बढ़ोतरी हो रही है. डायबिटीज़ के चलते महिलाओं और पुरुषों की फ़र्टिलिटी की क्षमता यानी प्रजनन शक्ति पर कई प्रभाव पड़ते हैं.  

डायबिटिक महिलाएं और फ़र्टिलिटी दर में कमी  

2016 में की गई एक स्टडी के मुताबिक़, भारत में लगभग 8% विवाहित महिलाएं इनफ़र्टिलिटी से जूझती हैं. जिनमें से ज़्यादातर महिलाएं (5.8%) सेकंडरी इनफ़र्टिलिटी से ग्रसित थीं.[2]

महिलाओं में डायबिटीज़ का संबंध पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) नाम के हॉर्मोनल इंबैलेंस डिसऑर्डर से हो सकता है.

पीसीओएस की वजह से समय के साथ शरीर का वज़न बढ़ने लगता है, जो दूसरी परेशानियों को दावत देता है. मोटापे से ग्रसित या ज़्यादा वज़न वाली औरतों के लिए सहज गर्भधारण करना मुश्किल होता, यहाँ तक कि IUI या IVF जैसे इनफ़र्टिलिटी ट्रीटमेंट भी कई बार नाकामयाब हो जाते हैं.

डॉ पल्लवी प्रसाद आगे बताती हैं, इन सब बातों के अलावा, पहले पीरियड्स (मासिक धर्म) में देर होने और डायबिटिक महिलाओं के जल्दी मेनोपॉज़ (मासिक आना बंद होने) होने की वजह से बच्चा पैदा करने में परेशानी हो सकती है, ऐसा इसलिए, क्योंकि डायबटीज़ के चलते मासिक धर्म अनियमित हो सकता है. जैसे कि ओलिगॉमेनोरिया (असामान्य पीरियड आना) और सेकंडरी एमेनोरिया (वो महिलाएं जिनका प्रेगनंट न होने पर भी 3 या उससे ज़्यादा महीनों के लिए पीरियड रुक जाता है).”

डायबिटिक महिलाओं को भी प्रेगनंट होने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. ख़ासकर उन महिलाओं में यह दिक्क़त ज़्यादा आती हैं, जिन्हें डायबिटीज़ के साथ पीसीओएस और हाइपरथायराइड हो, उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान ज़्यादा परेशानी होती है.[3]

अगर आप सामान्य तौर पर प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही और आपको डायबिटीज़ है, तो आपको फ़ौरन नीचे बताये गये इन टेस्ट्स को करवा लेना चाहिए .

  • क्लैमाइडिया की जांच के लिए स्वाब टेस्ट
  • हॉर्मोन लेवल को नियंत्रित करने के लिए ब्लड टेस्ट, और अल्ट्रासाउंड स्कैन
  • डायबिटिक पुरुष और कम होती फ़र्टिलिटी दर

कई वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि जिन्हें डायबिटीज़ नहीं है उनके मुक़ाबले डायबिटिक लोगों के स्पर्म में डीएनए का ज़्यादा नुक़सान होता है. चाहे स्पर्म काउंट कम हो, सीमेन की मात्रा कम हो या स्पर्म के डीएनए का बर्बाद होना हो, डायबिटीज़ से ग्रसित वयस्क इनफ़र्टिलिटी की समस्या का सामना करते हैं.[4]

वीडियो देखें : डायबिटिक हैं और बाहर जा रहे हैं, तो ये बातें काम की हैं

विश्वभर में क़रीब 15% जोड़े यानी 48.5 मिलियन जोड़े इनफ़र्टिलिटी से प्रभावित होते हैं, इस स्टडी के अनुसार [5] 20-30% तक इनफ़र्टिलिटी अकेले पुरुषों में पाई जाती है, यानी पूरे मामले में लगभग 50% योगदान.

डॉ प्रसाद के मुताबिक़, “डायबिटीज़ से स्माल ब्लड वेसल्स की सेहत प्रभावित होती है, और साथ ही टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम हो जाता है. जिससे पुरुषों में एइरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) की समस्या पैदा होती है. इसके अलावा डायबिटीज़ का काम इच्छा (लिबिडो) पर भी प्रभाव पड़ता है. डायबिटिक पुरुषों में लो लिबिडो (यानी कामेच्छा की कमी) देखा जाता है, जिसकी वजह से उसका टेस्टोस्टेरोन लेवल घट जाता है.

इसके साथ ही डायबिटीज़, इजैकुलेट(स्खलन) की मात्रा (वीर्य) को भी कम करता है. जिसका सीधा असर छोटी नसों पर और टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम करने पर पड़ता है.”

तो, क्या मधुमेह में गर्भधारण किया जा सकता है?

हां, सारी उम्मीदें ख़त्म नहीं हुईं हैं. डॉ प्रसाद बताती हैं, “डायबिटीज़ को बेहतर तरीक़े से कंट्रोल करके और शरीर का वज़न संतुलित रखकर डायबिटिक कपल बच्चे पैदा कर सकते हैं. गंभीर मामलों में, गर्भधारण करने के लिए इनफ़र्टिलिटी ट्रीटमेंट के ज़रिये उनकी मदद हो सकती है, बशर्ते उनका ब्लड ग्लूकोज़ लेवल नियंत्रित हो.

कंटेंट की समीक्षा: अश्विनी एस कनाडे, रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और वो 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरुक कर रहीं हैं.

 

संदर्भ:

  1. Joshi SR, Parikh RM. India–diabetes capital of the world: now heading towards hypertension. J Assoc Physicians India. 2007 May;55:323-4.. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/17844690/
  2. Sanjit Sarkar* and Pallavi Gupta. Socio-Demographic Correlates of Women’s Infertility and Treatment Seeking Behavior in India. J Reprod Infertil. 2016 Apr-Jun; 17(2): 123–132.. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4842234/
  3. Romana Szaboova and Senan Devendracorresponding author. Infertility in a young woman with Type 2 diabetes. London J Prim Care (Abingdon). 2015; 7(3): 55–57. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4494467/
  4. Guo-Lian Ding, Ye Liu,1,2, Miao-E Liu,1,2 Jie-Xue Pan, Meng-Xi Guo, Jian-Zhong Sheng. The effects of diabetes on male fertility and epigenetic regulation during spermatogenesis. Asian J Androl. 2015 Nov-Dec; 17(6): 948–953. Published online 2015 Mar 24. doi: 10.4103/1008-682X.150844.  https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4814953/
  5. Ashok Agarwal,corresponding author Aditi Mulgund, Alaa Hamada, and Michelle Renee Chyatte. A unique view on male infertility around the globe. Reprod Biol Endocrinol. 2015; 13: 37. Published online 2015 Apr 26. doi: 10.1186/s12958-015-0032-1 https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4424520/

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