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अगर आपको हाल ही में अपने डायबिटिक होने के बारे में पता चला है या आप पिछले कुछ सालों से डायबिटीज़ से प्रभावित हैं, तो हो सकता है कि आप ज़्यादातर अपने शारीरिक स्वास्थ्य का ख़याल रखते होंगे. हालांकि डायबिटीज़ को नियंत्रित करना भावनात्मक रूप से भी कम मुश्किल नहीं होता. रोज़मर्रा की ज़िंदगी में छोटी-छोटी चीज़ों का ख़याल रखना काफ़ी चुनौती भरा काम है. काफ़ी कोशिशें करने के बाद भी अगर मनचाहे नतीजे न मिलें, तो मन अशांत हो उठता है. अगर आप ऐसा महसूस कर रहे हैं, तो इसमें कुछ ग़लत नहीं है. ऐसा महसूस करना सामान्य बात है. जानें कि आप इन विचारों को किस तरह समझ सकते हैं:

डायबिटिक होने की बात को स्वीकार करना

यह जानना कि आपको डायबिटीज़ है, आपको ग़ुस्से, निराशा या उलझन से भर सकता है. ऐसा महसूस होना स्वाभाविक है. स्थिति को समझना, इसे स्वीकार करना और ज़रूरी मदद लेना, इसे नियंत्रित करने और इसके साथ ज़िंदगी को सही तरीके से जीना आसान बनाता है. डायबिटीज़ होने का मतलब दुनिया का अंत होना नहीं है.

जानें, किसे और क्यों पता होनी चाहिए आपके डायबिटिक होने की बात?

चीज़ों को अच्छी तरह समझना

आप अपनी स्थिति को जितनी अच्छी तरह समझने की कोशिश करेंगे, उतनी अच्छी तरह से इसे संभाल सकेंगे. आप इससे होने वाली परेशानियों का अंदाज़ा लगा सकेंगे और इनके हल ढूंढ पाएंगे. छोटी-छोटी चीज़ों को समझने से मनचाहे नतीजे पाने में आपको मदद मिल सकती है. कभी-कभी छोटे बदलाव भी बड़े असर की तरफ़ ले जाते हैं.

लक्ष्यों को पाने के लिए प्लान बनाना

जब आपके पास किसी चीज़ को करने का प्लान होता है, तब चीज़ें अपने हाथ में लगती हैं. सेहतमंद खाना, व्यायाम और ब्लड ग्लूकोज़ मॉनिटर करने के लिए लक्ष्य बनाएं. इन लक्ष्यों को पूरा करने पर आपको अच्छा महसूस होगा और लाइफ़स्टाइल में बदलाव को रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करने में आसानी होगी.

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तनाव और बुरे ख़यालों से उबरना

अगर आप प्लान के मुताबिक काम नहीं कर पा रहे हैं या मनचाहे नतीजे नहीं मिल रहे, तो आप हताश महसूस कर सकते हैं. रोज़मर्रा के काम और घर-परिवार से जुड़ी समस्याएं डायबिटीज़ को मैनेज करना ज़्यादा चुनौतीभरा बना देती हैं.

अपना ख़याल रखें. अगर डायबिटीज़ के चलते ज़्यादा तनाव महसूस हो रहा हो, तो अपने प्लान में बदलाव करें और नए लक्ष्य तय करें. आप चाहें तो योग कर सकते हैं, अपने मन की बातें लिखने के लिए जर्नल बना सकते हैं और वे चीज़ें कर सकते हैं, जिनमें आपकी दिलचस्पी है.

अपनों से करें मन की बातें शेयर

डायबिटीज़ के शुरूआती दौर में हो सकता है आप दूसरों से दूरी बनाने लगें. पर ध्यान रखें कि आप इस सफ़र में अकेले नहीं है. अपने परिवार के लोगों, दोस्तों, क़रीबियों से बात करें या चाहें तो किसी पेशेवर से भी मदद लें. वे आपको अपने प्लान के मुताबिक लक्ष्य पूरे करने और तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं. आख़िरकार इन छोटी-छोटी बातों का नतीजा देखकर आपको ताज्जुब होगा.

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