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अपने ब्लड शुगर के लेवल का फ़ौरन अंदाज़ा लगाना हो, तो ग्लूकोमीटर एक काम का डिवाइस साबित हो सकता है. यह लैब में करवाए जाने वाले टेस्ट की तुलना में सस्ता और ज़्यादा आसान होता है. इसकी मदद से ब्लड शुगर के लेवल को बार-बार टेस्ट करने में मुश्किल नहीं होती है. यही नहीं, यह ब्लड ग्लूकोज़ पर खुद ही नज़र रखने में मददगार साबित होता है. ग्लूकोमीटर की यही ख़ासियतें इसे डायबिटीज़ या प्रीडायबिटीज़ को मैनेज करने के लिए काम आने वाले टूलकिट का एक ज़रूरी हिस्सा बनाती हैं.

हालांकि, ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल भी एक हद तक किया जा सकता है. इसलिए यह ब्लड शुगर के लेवल पर नज़र रखने का इकलौता विकल्प नहीं होना चाहिए.

डॉ. प्रकाश टी. राय, एमडी, राय क्लिनिक, जोगेश्वरी, के मुताबिक़, “ब्लड शुगर के लेवल पर क़ाबू रखना डायबिटीज़ की परेशानियों की रोकथाम के लिए बेहद ज़रूरी है. हालांकि ब्लड शुगर पर ख़ुद ही नज़र रखने (सेल्फ़-मॉनिटरिंग ऑफ ब्लड ग्लूकोज़ – एसएमबीजी) से शुगर लेवल की मोटी-मोटी जानकारी तो मिल जाती है, लेकिन ग्लूकोमीटर के नतीजे सही हैं, इसकी पुष्टि करने के लिए बैक-अप या विकल्प के तौर पर लैब टेस्ट करवाना ज़रूरी है.”

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ग्लूकोमीटर में वेरायटी

सबसे पहली बात, आम तौर पर ग्लूकोमीटर ब्लड शुगर लेवल की सिर्फ़ कुछ ही दिनों की रीडिंग का रिकॉर्ड रख पाते हैं. हालांकि, बाज़ार में आए कुछ नए ग्लूकोमीटर पिछली रीडिंग का रिकॉर्ड इकट्ठा करते हैं. लेकिन, इस रिकॉर्ड को देखना और समझ पाना आसान नहीं होता है. इस काम के लिए, Wellthy ऐप मददगार साबित होता है. आप अपने डेटा को इसमें स्टोर कर सकते हैं और अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करके उसे कहीं भी और कभी भी आसानी से देख सकते हैं.

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फ़र्क समझें 

ग्लूकोमीटर की मदद से ब्लड शुगर के लेवल का पता लगाने के लिए इसमें लगी सुई को उंगली पर चुभाया जाता है और ख़ून की एक बूंद का इस्तेमाल करके ब्लड ग्लूकोज़ (शुगर) को मापा जाता है. इस तरह यह आपकी पूरी कैपलेरी (केशिका) के ख़ून की जांच करता है. यह तरीक़ा ब्लड शुगर के लेवल की मोटी-मोटी जानकारी देता है. इसके नतीजों और लैब के नतीजों में मुश्किल से 10-20% का फ़र्क होता है. हालांकि ब्लड शुगर के लेवल पर ख़ुद ही नज़र रखने के लिहाज़ से यह एक अच्छा डिवाइस है, लेकिन जब इसकी रीडिंग बहुत ज़्यादा या बहुत कम हो या पिछले दिन की रीडिंग में बहुत ज़्यादा फ़र्क दिखाई दे, तो लैब टेस्ट का इस्तेमाल करके इस रीडिंग की पुष्टि की जानी चाहिए.

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वजह अहम हैं

कमरे का तापमान, ऊंचाई, अलग-अलग तरह की स्ट्रिप, उंगली पर सुई चुभाने के बाद निकले ख़ून की गुणवत्ता, डिवाइस या स्ट्रिप की हालत, कैलीब्रेशन कोड की गड़बड़ी (डिवाइस और असली डेटा में फ़र्क होना) जैसी सभी बातें उस नतीजे पर असर डालती हैं जिसे पाने के लिए ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल किया गया है. 

HbA1c को न भूलें

ग्लूकोमीटर HbA1c से जुड़े नतीजे नहीं दिखाते हैं. HbA1c या ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन आपको पिछले 3 महीनों के ब्लड शुगर के लेवल की जानकारी देता है जबकि ग्लूकोमीटर ब्लड ग्लूकोज़ की उस समय की रीडिंग दिखाता है जब जांच की जाती है. इसलिए, HbA1c डॉक्टर और टेस्ट करवाने वाले इंसान, दोनों को यह समझने में मदद करता है कि पिछले कुछ दिनों या महीनों में शुगर का लेवल कितना ऊपर-नीचे हुआ है.

इसलिए, यह ज़रूरी है कि आप अपने ग्लूकोमीटर का रखरखाव अच्छी तरह से करें, उनके नतीजों की पुष्टि करने के लिए समय-समय पर लैब टेस्ट करवाएं, HbA1c जैसे दूसरे टेस्ट भी करवाएं, ग्लूकोज़ के बारे में अपनी जानकारी बढ़ाएं, और Wellthy जैसे एप्लिकेशन का इस्तेमाल करें. यह आपके ब्लड शुगर के लेवल की बेहतर ढंग से निगरानी करने में मदद करेगा ताकि आप अपनी सेहत और लाइफ़ स्टाइल के लिए बेहतर फ़ैसला ले सकें.

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Disclaimer: The information provided in this article is for patient awareness only. This has been written by qualified experts and scientifically validated by them. Wellthy or it’s partners/subsidiaries shall not be responsible for the content provided by these experts. This article is not a replacement for a doctor’s advice. Please always check with your doctor before trying anything suggested on this article/website.