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अक्सर मधुमेह से प्रभावित लोगों को अपने ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को सही बनाए रखने के लिए इंसुलिन का इस्तेमाल करना पड़ता है. हालांकि, रोज़ाना इंसुलिन की सुई लगाने के ख़याल से हम बेज़ार भी हो सकते हैं, लेकिन इसके हॉर्मोन से जुड़े कई ख़ास फ़ायदे हैं. वहीं फ़ायदों के साथ इसके इस्तेमाल को लेकर कई गलतफ़हमियां भी लोगों में आम हैं. यहां इंसुलिन के इस्तेमाल से जुड़ी 6 ग़लतफ़हमियों के बारे में बताया गया है. आइए इनका सच जानें!

गलतफ़हमी नंबर 1: अगर डॉक्टर ने इंसुलिन लेने की सलाह दी है, तो इसका मतलब है कि मैं डायबिटीज़ को कंट्रोल करने में नाकामयाब रहा हूं

डायबिटीज़, ख़ास तौर पर टाइप 2 डायबिटीज़ लंबे वक़्त या ताउम्र रहने वाली बीमारी है और एक समय ऐसा भी आता है, जब डॉक्टर के बताए गए ट्रीटमेंट का असर पैन्क्रियाज़ यानी अग्न्याशय पर बिलकुल नहीं होता है. इसलिए आपके डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं. इससे इस बात पर कोई असर नहीं पड़ता कि आप अपने डायबिटीज़ को कैसे कंट्रोल करते हैं, बल्कि आपका पैन्क्रियाज़ शरीर में इंसुलिन की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाता इसलिए इसे लेने की सलाह दी जाती है.

गलतफ़हमी नंबर 2: इंसुलिन लेने की शुरुआत करने के बाद मेरी ज़िंदगी मुश्किल हो जाएगी

कोई भी बात सच्चाई से बड़ी नहीं हो सकती. एक्सपर्ट की मानें तो इंसुलिन शॉट लेने से न केवल डायबिटीज़ से परेशान लोग जीवन में ज़्यादा एनर्जेटिक और पॉज़िटिव महसूस करते हैं, बल्कि इससे उन्हें अपने शेड्यूल में और भी ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिल जाती है. हां यह सही है कि सेहतमंद खान-पान और डॉक्टर के बताए गए समय पर इंसुलिन शॉट लेने के लिए कुछ प्लानिंग करनी पड़ती है लेकिन यह सिर्फ छोटे-मोटे बदलाव करने जितना ही काम है. अगर मुमकिन हो तो अपने खान-पान और एक्टिविटी को सही तरीके से प्लान करने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें.

गलतफ़हमी नंबर 3: इंसुलिन से वज़न बढ़ता है

इंसुलिन की मदद से आपका शरीर, खाने में मौजूद एनर्जी का भरपूर इस्तेमाल करता है, जिसकी वजह से थोड़ा बहुत वज़न बढ़ सकता है. इसलिए कहा जाता है कि अपने वज़न को कुशलता से मैनेज करना डायबिटीज़ मैनेजमेंट का एक अहम हिस्सा है, जिससे बढ़ते वज़न पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

गलतफ़हमी नंबर 4:इंसुलिन लेने से हालात गंभीर हो सकते हैं और यहां तक कि मौत हो सकती है

यह भरोसा कि इंसुलिन लेने से हालात बद से बदतर हो सकते हैं और यहां तक कि जान जाने का ख़तरा भी हो सकता है, एक आम गलतफ़हमी है. यह गलतफ़हमी डायबिटीज़ से परेशान परिवार के सदस्यों या दोस्तों के बिगड़े हुए हालातों को देखकर होती है. लेकिन असलियत में इंसुलिन के उपयोग से उन लोगों पर मंडराने वाला ख़तरा भी कम हो जाता है, जिनका डायबिटीज़ कंट्रोल में नहीं होता.

गलतफ़हमी नंबर 5: इंसुलिन लेने की लत लग जाती है

सही से देखा जाए तो इंसुलिन की लत नहीं लग सकती और यह एक ऐसी चीज़ है, जिससे आपका शरीर काम करता है. यह धारणा कि इंसुलिन की लत लग सकती है, पूरी तरह से बेबुनियाद है.

गलतफ़हमी नंबर 6: इंसुलिन का इस्तेमाल डायबिटीज के इलाज आख़िरी विकल्प है

यह एक सामान्य सोच है कि इंसुलिन ट्रीटमेंट उन लोगों के लिए होती है, जिनका डायबिटीज़ हद से ज़्यादा बढ़ गया हो या गंभीर हो. लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो डायबिटीज़ मैनेजमेंट में इंसुलिन लेने की सलाह सबसे आख़िरी स्टेज में इसलिए दी जाती है क्योंकि पेशंट इसे लेने से हिचकिचाते हैं. लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि डायबिटीज़ के बढ़ने पर राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में फिज़िशियन अब इंसुलिन को पहले ही इस्तेमाल कर रहे हैं.

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