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कंटेंट की समीक्षा अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

शरीर की कोशिकाएं सही तरह से काम करें, इसके लिए शरीर में सही मात्रा में विटामिन का होना ज़रूरी हैं. अगर खाने से ज़रूरी पोषक तत्व न मिलें, तो अलग से  विटामिन या सप्लीमेंट लेने से उसकी भरपाई की जा सकती है. डायबिटिक लोगों के लिए रोजाना सही मात्रा में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, कॉपर, ज़िंक, मैग़्नीशियम और क्रोमियम लेना ज़रूरी है.

बेंगलुरु के शरजापुर रोड स्थित, कोलम्बिया एशिया हॉस्पिटल में सीनियर कन्सल्टेंट (इंटरनल मेडिसिन एंड डायबिटोलॉजी) डॉक्टर अमिता भटनागर  हमें बता रहीं हैं कि डायबिटिक लोगों को क्या ख़ास विटामिन लेने चाहिए.

डायबिटिक लोगों के लिए ज़रूरी विटामिन

1. विटामिन ए:

टाइप 1 डायबिटीज़ से प्रभावित बुज़ुर्गों में विटामिन ए की कमी पाई जाती है. ऐसी हालात में रेटिनॉल लेने की सलाह दी जाती है, जिसमें विटामिन ए की बहुतायत है. रेटिनॉल में पाया जाने वाला प्रोटीन इन्सुलिन सवेदनशीलता पर सीधे असर करता है.[1]

 2. विटामिन बी:

थाइमिन (B1), फ़ॉलिक एसिड (B9) और कोबालामिन (B12) डायबिटिक लोगों के लिए विटामिन बी के अहम प्रकार हैं:

  • बी1: टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ में बी1 की मात्रा कम पाई जाती  है. बी1 से डायबिटिक लोगों के ख़ून में ग्लूकोज़ और लेप्टिन का लेवल तेज़ी से कम होता है. लेप्टिन को एपेटाइट हार्मोन भी कहते हैं.[2] लिहाज़ा ये विटामिन डायबिटिक लोगों के लिए फ़ायदेमंद है. 

    वीडियो देखें: डायबिटीज़ में दिल की बीमारी से ऐसे करें बचाव

  • ख़ून में होमोसिस्टीन बढ़ने से विटामिन बी9 और बी12 की कमी हो जाती है. टाइप 2 डायबिटिक लोगों में होमोसिस्टीन का लेवल ज़्यादा पाया गया है. इसके कारण डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी परेशानियां भी होती हैं. टाइप 2 डायबिटीज़ में विटामिन बी9 ख़ून में शुगर लेवल बेहतर करने के लिए कारगर है, क्योंकि ये एचबीए1सी, फ़ास्टिंग ग्लूकोज़, सीरम इन्सुलिन और होमोसिस्टीन का लेवल कम करने में मददगार है. साथ ही इससे इन्सुलिन की संवेदनशीलता में इज़ाफ़ा होता है.

  • बी12: मेटफ़ॉर्मिन लेने से शरीर में बी12 की कमी हो सकती है. जो डायबिटिक मेटफ़ॉर्मिन नहीं लेते हैं, उनमें भी बी12 की कमी पाई जाती है. अगर ऐसे लोगों को नस /तंत्रिका से जुड़ी परेशानी भी होने लगे तो निश्चित रूप से उनकी हालत ख़राब होगी. गंभीर तौर से डायबिटिक न्यूरोपैथी से प्रभावित लोग अगर विटामिन बी12 लेना शुरू करें, तो उन्हें कुछ राहत मिल सकती है.

3. विटामिन सी:

ख़ून में शुगर का लेवल ज़्यादा होने से टाइप 2 डायबिटिक लोगों में ऑक्सिडेटिव तनाव (oxidative stress) ज़्यादा हो सकता है. ऐसे में विटामिन सी एंटीऑक्सिडेंट के रूप में काम कर सकता है.[3] विटामिन सी की मात्रा ज़्यादा होने से एचबीए1सी और ख़ून में ग्लूकोज़ का लेवल कम हो सकता है. विटामिन सी से भरपूर होता है आंवला और इसे फ़ायदेमंद भी माना जाता है.

4. विटामिन डी: 

टाइप 2 डायबिटीज़ का संबंध विटामिन डी के साथ भी हैं. विटामिन डी की कमी से पैन्क्रियाटिक बीटा कोशिकाएं सही ढंग से काम नहीं करतीं. इन्सुलिन का असर कम होता है और शरीर में जलन होने लगती है. टाइप 2 डायबिटिक लोगों पर इसका सीधा असर पड़ता है.

5. विटामिन ई: 

डायबिटिक लोगों में विटामिन ई की कमी पाई जाती है.[4] इसका मतलब ये है कि विटामिन एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है और डायबिटिक लोगों को ज़्यादा मात्रा में इसकी ज़रूरत है.

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वो सप्लीमेंट्स जिसे डायबिटिक ले सकते हैं:

मछली के तेल से बने कैप्सूल, क्रोमियम, मैग्नीशियम, सीलियम, अल्फ़ा, लिपॉइक एसिड और मेथी को बतौर सप्लीमेंट लिया सकता है.

  • मछली के तेल से बने कैप्सूल (फ़िश ऑयल कैप्सूल) में ओमेगा-3 फ़ैटी एसिड पाए जाते हैं, जो जलन कम करते हैं, दिल की धड़कन सामान्य करते हैं और जिन लोगों को दिल की बीमारियों का ख़तरा है, उनकी नसें ब्लॉक होने से रोकते हैं.
  • क्रोमियम इन्सुलिन का असर बढ़ाता है और पूरे शरीर से ग्लूकोज़ का लेवल कम करता है.
  • मैग़्नीशियम: टाइप 2 से प्रभावित लोगों में मैग़्नीशियम लेवल कम होता है, हालांकि मैग़्नीशियम क्यों फ़ायदेमंद है, इस बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है.
  • सीलियम (इसबगोल) से शरीर में घुलनशील फ़ाइबर का लेवल बढ़ता है, जो खाने के बाद ख़ून में शुगर लेवल बढ़ने से रोकता है.

डायबिटिक व्यक्ति सप्लिमेंट लेते वक़्त इन बातों पर ध्यान दें:

सबसे पहले, खाने का कोई भी ज़रूरी सामान और सप्लिमेंट्स, ख़ासकर औषधियां लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें. दूसरी बात, ज़रूरत से ज़्यादा कुछ भी लेना नुक़सानदेह है और उसके अच्छे नतीजे नहीं मिलते. लिहाज़ा सेहत को किसी भी नुक़सान से बचाने के लिए ये सावधानियां ज़रूर बरतनी चाहिए:

  1. ज़रूरत से ज़्यादा विटामिन ए लेने पर चक्कर आना, मितली, सिर में भारी दर्द की शिकायत हो सकती है, और यहां तक कि कुछ मामलों में इंसान कोमा में भी जा सकता है.
  2. सप्लिमेंट  के तौर पर ज़्यादा विटामिन बी1 लेने से डायबिटीज़ से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं. विटामिन बी6 ज़रूरत से ज़्यादा लेने पर त्वचा पर दाग़, मितली, सीने में जलन और ज़रूरत से ज़्यादा संवेदनशीलता हो सकती है.
  3. ज़रूरत से ज़्यादा विटामिन डी लेने से कब्ज़, कमज़ोरी, वज़न में कमी और उल्टी होने का ख़तरा हो सकता है साथ ही शरीर में कैल्सियम की मात्रा बढ़ती है, जिससे व्याकुलता महसूस और भ्रम होने लगता, किडनी को नुक़सान पहुंचता है, दिमाग़ी भटकाव होता है और दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है.

क्या एंटीबायोटिक किसी विटामिन के साथ रिएक्ट करते हैं?

एंटीबायोटिक और विटामिन सप्लिमेंट एक-दूसरे के साथ रिएक्ट नहीं करते. लेकिन अलग से कुछ भी लेने या उसे बंद करने से पहले (ख़ासकर हर्बल दवाएं) अपने डॉक्टर से सलाह लेना बेहद ज़रूरी है.

नोटऊपर बताए गए खाने के सामान और विटामिन्स, अपने डॉक्टर से मशवरा किये बिना न लें. ये जानकारियां सिर्फ़ जागरुकता के लिए हैं और बिना किसी मेडिकल सलाह के न तो ये बदले जा सकते हैं और न इनपर विचार किया जा सकता है.

संदर्भ:

  1. Thomas Reinehr, Birgit Stoffel-Wagner, and Christian L. Roth Retinol-Binding Protein 4 and Its Relation to Insulin Resistance in Obese Children before and after Weight Loss. J Clin Endocrinol Metab. 2008 Jun; 93(6): 2287–2293. Published online 2008 Apr 8. doi: 10.1210/jc.2007-2745. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2729181/\
  2. Bhavani Jayabalan and Lian Leng Low. Vitamin B supplementation for diabetic peripheral neuropathy. Singapore Med J. 2016 Feb; 57(2): 55–59. doi: 10.11622/smedj.2016027. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4759374/
  3. Christie-David D, Girgis C, Gunton J. Effects of vitamins C and D in type 2 diabetes mellitus. 10 February 2015 Volume 2015:7 Pages 21—28. https://www.dovepress.com/effects-of-vitamins-c-and-d-in-type-2-diabetes-mellitus-peer-reviewed-fulltext-article-NDS
  4.  Hagit Goldenstein, Nina S. Levy, Yisrael T. Lipener, and Andrew P. Levy. Patient Selection in Vitamin E Treatment in Diabetes Mellitus. Expert Rev Cardiovasc Ther. 2013 Mar; 11(3): 319–326. doi: 10.1586/erc.12.187. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3615189/

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