Blood-Sugar-Levels-Too-High-Walk-After-Eating
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कंटेंट की समीक्षा:अश्विनी एस कनाडे ने की है, जो रजिस्टर्ड डायटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियां लोगों तक पहुंचा रही हैं.

रोज़ाना टहलने और अच्छी सेहत के बीच बहुत पुराना रिश्ता है. टहलने के फ़ायदों से हम सभी ‘फ़ादर ऑफ़ मेडिसिन’ कहे जाने वाले यूनानी चिकित्सक हिप्पोक्रेट्स के ज़माने से वाक़िफ़ रहे हैं. इससे आपका मनोबल बढ़ सकता है, मांसपेशियां टोन हो सकती हैं और यहां तक कि उम्र भी बढ़ सकती है. टहलने से मेटाबॉलिज़्म बेहतर होता है और शरीर को सही आकार मिलता है. पर इसकी सबसे ख़ास बात जानते हैं क्या है? रोज़ाना टहलकर अपना ब्लड शुगर लेवल भी नियंत्रित किया जा सकता है.  

रोज़ाना की जाने वाली इस आसान सी एक्टिविटी ने कई लोगों की ज़िंदगी बदल दी है. ख़ैर, बात जब इस एक्सरसाइज़ के ज़रिए डायबिटीज़ से मुक़ाबला करने की हो, आपके टहलने का समय बहुत मायने रखता है.

टहलने का सही समय

यूं तो रोज़ाना किसी भी समय टहलना शरीर के लिए अच्छा ही होता है, लेकिन हर खाने के बाद 10 मिनट वॉक की बात ही और है. रिसर्च के मुताबिक़, हर खाने के बाद 10 मिनट टहलने वालों को किसी और समय एक बार में 30 मिनट की वॉक करने वालों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा फ़ायदा होता है.[1] यानी ब्लड ग्लूकोज़ लेवल पर क़ाबू पाने के लिए सही वक़्त पर सही क़दम उठाना ही सबसे अहम होता है.   

अब ऐसा क्यों है? इसका जवाब जानने के लिए आपको यह समझना होगा कि जब आप चलते हैं, तब आपके ग्लूकोज़ लेवल पर इसका क्या असर पड़ता है.

एक्टिव शरीर

शरीर को आराम के दौरान तो ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन किसी भी गतिविधि के लिए आपके शरीर को ऊर्जा की ज़रूरत पड़ती है. मांसपेशियों की यह ज़रूरत आपके ख़ून में मौजूद ग्लूकोज़ के ज़रिए पूरी होती है. एक्टिव शरीर में ऊर्जा की ज़रूरत पूरी करते रहने के लिए दिल की धड़कनों की रफ़्तार बढ़ जाती है, ताकि पूरे शरीर में ज़्यादा से ज़्यादा ख़ून पहुंच सके. अब बात करें टहलने की, तो इस साधारण गतिविधि से भी आपका दिल हर मिनट में 70 से बढ़कर 100 बार तक धड़कने लगता है. रक्त प्रवाह की रफ़्तार को बढ़ाने के लिए आपकी रक्त धमनियां (ब्लड वेसल्स) भी फैल जाती हैं.

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शुगर लेवल पर यह कैसे असर डालता है  

खाने के बाद ख़ून में ग्लूकोज़ लेवल बढ़ता है. ख़ून में ग्लूकोज़ लेवल के इस तरह के उछाल को नियंत्रित करने के लिए शरीर इंसुलिन का रिसाव करता है, पर जिन्हें मधुमेह है, उनके लिए यह स्थिति इतनी आसान नहीं होती, क्योंकि उनके शरीर में इंसुलिन सही तरह काम नहीं करता. इससे ब्लड शुगर लेवल पर नियंत्रण नहीं रह पाता और ब्लड शुगर पर नियंत्रण ना रहने से इसमें आया उछाल रक्त धमनियों को नुक़सान पहुंचा सकता है.

वहीं जब आप खाना खाने के तुरंत बाद चलते हैं, तब आपका बढ़ा हुआ ब्लड शुगर ऊर्जा निर्माण के लिए इस्तेमाल हो जाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने नहीं पाता. स्टडीज़ में देखा गया है कि खाना खाने के बाद थोड़ी दूर भी टहलने से ब्लड शुगर लेवल 12% तक कम हो जाता है.[2]

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बदलाव के छोटे-छोटे क़दम

खाना खाने के बाद कुछ देर टहलने की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बड़ी ही आसानी से अपनी जीवनशैली में शामिल किया जा सकता है. अपने ऑफ़िस के आसपास 10 मिनट टहलना या सीढ़ियों पर चढ़ना-उतरना भी काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है. इस एक्टिविटी से आपको थकान भी नहीं होती. इतना ही नहीं, लाइफ़स्टाइल में इस तरह का छोटा सा बदलाव आपकी छोटी-मोटी आदत सा बन जाता है, जिसे आप हमेशा के लिए अपना लेते हैं.

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स्टीफन गुइज़ ने अपनी किताब ‘मिनी हैबिट्स- स्माल हैबिट्स, बिगर रिज़ल्ट’- में लिखा है, “एक छोटी सी आदत एक तरह का अच्छा बर्ताव होती है, जिसे रोज़ाना करने के लिए आप ख़ुद पर ज़ोर डालते हैं; इसकी ‘मामूली सी’ समझी जाने वाली ख़ासियत इसे बेहद आसान, असरदार और आदत बनाने की बेहतरीन रणनीति में शामिल करती है. अगर आप हमेशा आगे बढ़ते रहेंगे तो ख़ुद पर भरोसा करने के अलावा आपके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होगा.”

टहलने के लिए सबसे अच्छा समय

ऐसे तो हर बार खाना खाने के बाद टहलना चाहिए, लेकिन किसी वजह से अगर आप हर खाने के बाद ना टहल सकें, तो रात के खाने के बाद 10 मिनट की वॉक करने की पूरी कोशिश करें. रात का खाना खाने के बाद की गई वॉक सबसे ज़्यादा असरदार मानी जाती है, क्योंकि सूरज डूबने के बाद मेटाबॉलिज़्म सुस्त पड़ जाता है. गाडगे डायबिटीज़ सेंटर की डायबिटीज़ विशेषज्ञ डॉ. रोशनी गाडगे कहती हैं, ‘रात के खाने के बाद 10-15 मिनट की वॉक खाने के बाद बढ़ने वाले ब्लड शुगर लेवल में 20-25% तक कमी ला सकती है’

भाग-दौड़ वाली ज़िंदगी के इस दौर आज जब हर किसी के पास समय की कमी है, आपको छोटे-छोटे बदलावों से बड़े और असरदार नतीजे मिल सकते हैं. हर बार खाना खाने के बाद 10 मिनट टहलने की आदत भी इन्हीं में से एक है. पूरी लगन से इसे अपना लें और ज़िंदगी में हो रहे अच्छे बदलावों को महसूस करें.  

संदर्भ:

  1. Incremental area under the blood glucose curve was significantly lower when participants walked after meals compared with on a single daily occasion (ratio of geometric means 0.88, 95% CI 0.78, 0.99) https://link.springer.com/article/10.1007/s00125-016-4085-2
  2. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21995867

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