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कंटेंट की समीक्षा : अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

प्रैक्टिस के दौरान, मैं रोज़ाना कई डायबिटिक लोगों से मिलती हूं. इन सभी में फैली ग़लतफ़हमी सबसे आम है.

कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा मधुमेह की चपेट में है. तो ग़लतफ़हमियों का होना आम बात है. इस दौर और उम्र में जब तमाम जानकारियां आपकी उँगलियों के इशारे पर हैं, तो ऐसे में सही और ग़लत जानकारी के बीच फ़र्क कर पाना आसान नहीं है.

लेकिन जब बात आपकी ख़ुशहाल और सेहतमंद ज़िंदगी की हो, तो डायबिटीज़ से जुड़ी ज़रूरी और सही जानकारी (वो भी विश्वसनीय सूत्रों से) होना बेहद अहम होता है.आपकी मदद करने के लिए मैं उन 5 ग़लतफ़हमियों को दूर करना चाहती हूं, जिन्हें डायबिटिक (और शायद आप भी) सही मानते आए हैं:

डायबिटीज़ की दवाएं आपको नुक़सान पहुंचाती हैं:

लेकिन डायबिटीज़ को नियंत्रित न करना बेशक़ ख़तरनाक है.

आप स्वस्थ आहार, व्यायाम, मेडिटेशन, प्राकृतिक उपचार (करेला, जामुन, दालचीनी का सेवन) ऑल्टरनेटिव मेडिसिन को अपना सकते हैं, लेकिन फिर भी आपका शुगर लेवल कम न हो, तो इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, एलोपैथिक दवाएं लेना शुरू कर दें.

डायबिटीज़ में ली जाने वाली एलोपैथिक दवाएं सुरक्षित होती हैं. इन दवाओं को बाज़ार में बेचने की मंज़ूरी देने से पहले कई अध्ययन किए जाते हैं. साथ ही हज़ारों लोगों पर आज़माने के बाद इसके असर की पुष्टि की जाती है. इसलिए इन दवाओं से नुक़सान के बजाय फ़ायदे होते हैं.

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इंसुलिन थेरेपी से होता है मौत का जोख़िम:

दुर्भाग्य से देश के मौजूदा हालात ऐसे हैं कि डायबिटिक अपनी ज़िंदगी के कई कीमती साल डायबिटीज़ के इलाज से जुड़ी दवाओं को खोजने या फिर वैकल्पिक दवाएं आज़माने में बर्बाद कर देते हैं. जब तक इंसुलिन से इलाज करना शुरू किया जाता है, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है.

इस दौरान मधुमेह से ग्रस्त कई लोग आंख और किडनी की ख़राबी जैसी डायबिटीज़ से जुड़ी परेशानियों की चपेट में आ चुके होते हैं, जिसका पता इंसुलिन शुरू करने के बाद चलता है. अफ़सोस की बात है कि इन सभी नतीजों (आँखों की और किडनी की ख़राबी) के लिए इंसुलिन को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.

जबकि इस नुक़सान की असल वजह इंसुलिन नहीं, बल्कि आपका अनियंत्रित ब्लड शुगर लेवल होता है, जिसे इंसुलिन का इस्तेमाल करके ठीक नहीं किया जा सकता.

इंसुलिन से जुड़ी सभी ग़लतफ़हमियों को दूर करने के लिए यहां क्लिक करें.

डायबिटिक बेफ़िक्र होकर अपनी मर्ज़ी से कोई भी फल खा सकते हैं:

हाल के समय में इस तरह के कई वीडियो सामने आये हैं, जो लोगों के बीच इस ग़लतफ़हमी को बढ़ाते हैं कि डायबिटीज़ में बेफ़िक्र होकर जितनी मर्ज़ी हो फल खाए जा सकते हैं. वीडियो में बताया जाता है कि फलों में शुगर के तौर पर फ़्रुक्टोज़ पाया जाता है, जिसे अवशोषित होने के लिए इंसुलिन की ज़रूरत नहीं पड़ती.

ये पूरी तरह ग़लत है

सभी तरह के कार्बोहाइड्रेट्स आख़िरकार ग्लूकोज़ के रूप में ही बदलते हैं, जिससे शरीर में मौजूद इंसुलिन को काम करना ही पड़ता है. ऐसे में मनमाने ढंग से फल खाने पर आपके ब्लड शुगर लेवल का बढ़ना तय है, जिससे परेशानियां बढ़ जाती हैं.

यहां जानें, उन फलों के नाम जिसे डायबिटीज़ में बेफ़िक्र खाया जा सकता है.

गर्भवती महिलाओं को ज़्यादा मात्रा में खाना चाहिए:

सबसे अहम है सही आहार खाना! न कि कम या ज़्यादा खाना

गर्भवती होने के पहले या इसके फ़ौरन बाद डायबिटीज़ की चपेट में आने वाली महिलाओं की संख्या तेज़ी से बढ़ी है. ऐसा क्यों ?

ठहरी हुई जीवन शैली, कार्बोहायड्रेट से भरपूर भोजन, दिनभर के काम से होने वाले तनाव, परिवार के सदस्यों के डायबिटिक होने जैसी बातें, प्रेगनेंसी के दौरान डायबिटीज़ के ख़तरे को बढ़ाती हैं.

गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त कैलोरी वाली चीज़ें खानी चाहिए, जिसमें भरपूर विटामिन, मिनरल और प्रोटीन हो, जो शिशु की सेहत के लिए ज़रूरी है. बहुत ज़्यादा कैलोरी से डायबिटीज़ का जोख़िम बढ़ता है और इससे शिशु को नुक़सान भी पहुंच सकता है.

इसलिए हम सभी महिलाओं को सेहतमंद रहने के लिए कम खाने और ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने की ज़रूरत है.

और आख़िर में..

अपनी सेहत से जुड़े सवालों के जवाब के लिए सिर्फ़ इंटरनेट पर ही निर्भर ना रहें:

रोज़ाना हमें सोशल मीडिया पर सेहत से जुड़े ढेर सारे मैसेज मिलते हैं. ध्यान रखें कि इंटरनेट पर मौजूद बहुत सारी जानकारी ग़लत भी होती हैं. इन्हें ख़ासतौर पर इस तरह से पेश किया जाता है जिससे लोगों का ध्यान इस तरफ़ जाए और लोग इन्हें शेयर करें. आप अक्सर कोई न कोई ऐसी वेबसाइट देखेंगे जिन पर आहारों के प्रकार, फ़ूड सप्लीमेंट्स या घरेलू नुस्खों के ज़रिए डायबिटीज़ का इलाज करने का दावा किया गया होगा.

वीडियो देखें: डायबिटीज़ बिगाड़ सकता है आपके दिल का हाल  

अगर इस तरह के इलाज से परेशानी से छुटकारा मिल जाता, तो रोज़ाना इतनी बड़ी तादाद में डायबिटिक हमारे क्लिनिक क्यों आते?

ग़लत तरीक़े से डायबिटीज़ का इलाज करने वाले, डायबिटीज़ ट्रीटमेंट को लेकर हताश हुए, बहुत सारे लोगों को अपने झांसे में फंसा लेते हैं. परेशान लोग डायबिटीज़ से राहत के लिए जड़ी-बूटियों, सप्लीमेंट और दर्ज़नों  डाइट प्लान के चक्कर में हज़ारों रूपए ख़र्च करके थक जाते हैं, लेकिन राहत नहीं मिलती.

इसलिए सतर्क रहें! नई दवा या सप्लीमेंट की शुरुआत करने के पहले अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें. डॉक्टर आपको, आपकी मेडिकल हिस्ट्री और क्या चीज़ें आपके लिए ठीक हैं, को अच्छे से जानते हैं. इससे वे आपकी डायबिटीज़ की बेहतर देखभाल में मदद कर सकते हैं.

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Disclaimer: The information provided in this article is for patient awareness only. This has been written by qualified experts and scientifically validated by them. Wellthy or it’s partners/subsidiaries shall not be responsible for the content provided by these experts. This article is not a replacement for a doctor’s advice. Please always check with your doctor before trying anything suggested on this article/website.