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एक्सरसाइज़ करना ना भूलें!
हमें यक़ीन है कि जब भी आप डॉक्टर के पास जाते होंगे, उनकी तरफ़ से आपको ये सलाह ज़रूर मिलती होगी. डायबिटीज़ पर कंट्रोल करने के लिए डाइट और दवाओं के साथ-साथ एक्सरसाइज़ भी बहुत ज़रूरी है.[1] बल्कि, हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक़, अपने एक्सरसाइज़ शेड्यूल को एक-दो दिन के लिए भी छोड़ने से आपकी कंडीशन ख़राब हो सकती है. 

एक्सरसाइज़ का प्रकार ख़र्च होने वाली कैलोरी 
चलना  186
तैराकी 223
साइकल चलाना 298 
तेज़ी के साथ डांस करना  223
स्ट्रेंग्थ ट्रेनिंग (वज़न उठाने वाली कसरत करना)112 

ऊपर दी गई लिस्ट में एक अंदाज़े के मुताबिक़ औसतन 70 किलो वज़न रखने वाले व्यक्ति के 30 मिनट एक्सरसाइज़ करने पर ख़र्च होने वाली कैलोरी बताई गई है. 

डायबिटीज़ वाले ज़्यादातर लोग एक्सरसाइज़ के तौर पर चलना या टहलना ही पसंद करते हैं. इसकी सीधी सी वजह ये है कि टहलना सबसे आसान एक्सरसाइज़ होती है. और वैसे भी आपका चयापचय सही रखने के लिए टहलना सबसे अच्छी एक्सरसाइज़ में से एक है. लेकिन, आप सिर्फ़ एक ही तरह की एक्टिविटी के भरोसे नहीं रह सकते. डायबिटीज़ को कंट्रोल में रखने के लिए एरोबिक और स्ट्रेंग्थ ट्रेनिंग बहुत ज़्यादा अहमियत रखती हैं. आइए देखते हैं कि अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज़ किस तरह डायबिटीज़ पर कंट्रोल रखने में मदद करती हैं.

1. एरोबिक एक्सरसाइज़ 

एरोबिक एक्सरसाइज़ से शरीर में ऑक्सीज़न की खपत में सुधार आता है, दिल का कामकाज और सांस लेने की प्रक्रिया बेहतर होती है. एरोबिक एक्सरसाइज़ को कार्डियो एक्सरसाइज़ के तौर पर भी जाना जाता है. तैराकी, साइकिल चलाना, ट्रेडमिल पर चलना, टहलना, दौड़ना और रस्सी कूदना कुछ ऐसी एरोबिक एक्सरसाइज़ हैं, जो इंसुलिन का बेहतर ढंग से इस्तेमाल करने में शरीर की मदद करती हैं. एरोबिक एक्सरसाइज़ ब्लड ग्लूकोज़ और ब्लड प्रेशर कम करके दिल की बीमारियों के जोखिम को भी कम करती हैं. हल्की-फुल्की शुरुआत के साथ ये कार्डियो एक्सरसाइज़ आज़माएं;

चलना 

चलना एक्सरसाइज़ का एक बुनियादी रूप कहा जा सकता है. लेकिन, डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों के लिए ये चयापचय को सुधारने वाली सबसे अच्छी एक्सरसाइज़ में से एक है. एक आम वयस्क रोज़ाना क़रीब 2,000 से 9,000 क़दम चलता है. रिसर्च बताती हैं कि दिन में 7,000 से 10,000 क़दम चलना रोज़ाना 30 मिनट एक्सरसाइज़ करने के बराबर होता है. याद रखें, आपको हफ़्ते में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज़ करने की ज़रूरत होती है. इसलिए अपने चलने के समय को इस तरह प्लान करें कि हफ़्ते में ज़रूरत भर की एक्सरसाइज़ पूरी हो सके.[3], [4]

तैराकी 

तैराकी शरीर के जोड़ों पर कोई तनाव या दबाव डाले बिना मसल्स को स्ट्रेच देने और रिलैक्स करने में मदद करती है. तैराकी हल्की-फुल्की कर रहे हैं या ज़ोरदार, कितनी देर कर रहे हैं, इसका समय और शुरुआत करते समय ब्लड ग्लूकोज़ लेवल क्या था, इन बातों को ध्यान में रखना ज़रूरी है. ये चीज़ें एक्टिविटी के बाद आपके ब्लड ग्लूकोज़ की जांच करने में काम आती हैं. तैराकी जेस्टशनल डायबिटीज़ से प्रभावित प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी फ़ायदेमंद और सुरक्षित साबित हुई है.[5],[6]

डांसिंग 

डांस करना सबसे मज़ेदार वर्कआउट में से एक होता है. ये शरीर के लचीलेपन में सुधार लाने में मदद करता है, ब्लड ग्लूकोज़ के लेवल को कम करता है और इससे वज़न भी घटता है. ज़ुम्बा या एरोबिक डांस जैसे डांस फॉर्म आपको सीक्वेंस और गिनतियां याद कराते हैं, जिससे ये आपकी दिमाग़ी ताक़त बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं.

सीढ़ियां चढ़ना 

ये सबसे सुविधाजनक एक्सरसाइज़ में से एक है, जिसके लिए आपको अलग से समय निकालने की ज़रूरत नहीं होती. रिसर्च बताती हैं कि अगर आप 3 मिनट भी सीढ़ियां चढ़ या उतर लें, तो इससे ब्लड शुगर लेवल कम करने में मदद मिल सकती है. ये एक्सरसाइज़ अगर खाना खाने के एक या दो घंटे बाद की जाए, तो ग्लूकोज़ लेवल पर इसके बेहतरीन नतीजे मिलते हैं.[7]

स्ट्रेंग्थ ट्रेनिंग

स्ट्रेंग्थ ट्रेनिंग में रेजिस्टेंस एक्सरसाइज़ शामिल हैं, जिनमें वज़न का इस्तमाल करना पड़ता है. एरोबिक एक्सरसाइज़ में जहां इक्विपमेंट की ज़रूरत नहीं होती, वहीँ रेजिस्टेंस एक्सरसाइज़ में वेट, बारबेल, डम्बेल, वेट मशीन और दूसरे इक्विपमेंट की ज़रूरत होती है. कुछ सिंपल रेजिस्टेंस एक्सरसाइज़ जैसे पुश-अप, लंजेस, स्क्वाट्स और प्लैंग्क में इक्विपमेंट की ज़रूरत नहीं होती है और इसे आसानी से घर पर किया जा सकता है.
स्ट्रेंग्थ ट्रेनिंग से ब्लड शुगर को नॉर्मल लेवल पर रखने में मदद मिलती है. इससे मसल्स मज़बूत होती हैं और हड्डियों की समस्याओं के जोखिम कम होते हैं. आमतौर पर युवा उम्र के लोग मसल्स बनाने के लिए रेजिस्टेंस एक्सरसाइज़ करना ही पसंद करते हैं. हालांकि ये एक्सरसाइज़ उन बड़ी उम्र के लोगों के लिए भी सुरक्षित और असरदार हैं, जिन्हें डायबिटीज़ है. यहां बताई गईं आसान सी रेजिस्टेंस एक्सरसाइज़ आज़माएं, जिनमें किसी भी इक्विपमेंट की ज़रूरत नहीं होती.[8]

स्क्वाट 
ये एक आसान सी एक्सरसाइज़ है, जिसे आप घर पर कर सकते हैं! आपको बस इतना करना है कि पहले दोनों पैरों के थोड़ी दूरी लाकर सीधे खड़े हो जाएं. फिर धीरे-धीरे अपनी पीठ को सीधा रखते हुए बैठने की पोज़ीशन में जाएं. स्क्वाट एक्सरसाइज़ जांघों, कूल्हों और नितंबों की मसल्स को मज़बूत करने में मदद करती है. आप चेयर स्क्वाट्स या वॉल स्क्वाट्स आज़माकर इसे कुछ अलग तरह से भी कर सकते हैं.[9]

प्लैंग्क्स
प्लैंग्क्स आपकी बाहों, कंधों और पीठ की मसल्स मज़बूत करते हैं. आपको बस इतना करना है कि पहले पुश-अप पोज़ीशन में पहुंचें यानी आपकी हथेलियां और पांव की उंगलियां फ़र्श पर हों और अपने शरीर का वज़न इनपर डालते हुए शरीर को ऊपर उठाएं. जितनी देर तक कर सकते हैं, उतनी देर तक इसी पोज़ीशन में बने रहें.

  1. अन्य एक्सरसाइज़ 

मन और शरीर के बीच संतुलन लाने वाली अन्य एक्सरसाइज़ जैसे योग या पाइलेट्स डायबिटीज़ में भी फ़ायदेमंद होती हैं. डायबिटीज़ से प्रभावित लोग दिमाग़ी तौर पर बहुत ज़्यादा तनाव झेलते हैं, जिससे ब्लड ग्लूकोज़ लेवल और ज़्यादा प्रभवित होता है. ऐसे में मन और शरीर पर असर डालने वाली एक्सरसाइज़ को अपने रुटीन में शामिल करने का आईडिया लाजवाब है.

योग 

योग एक प्राचीन थेरेपी है जो शरीर और मन दोनों को ठीक करती है. रोज़ाना योग अभ्यास करने से ब्लड शुगर का लेवल कम होता है. डायबिटीज़ में फ़ायदेमंद कुछ सबसे ज़्यादा किए जाने वाले योग आसन हैं, सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, पद्मासन, प्राणायाम, भुजंगासन, वज्रासन, धनुरासन और शवासन.[10]

पाइलेट्स 

पाइलेट्स भी योग की तरह एक मन और शरीर की एक्सरसाइज़ है. ज़्यादातर दूसरी एक्सरसाइज़ में जहां ख़ास तौर से शरीर पर ध्यान दिया जाता है, पाइलेट्स में मन और शरीर के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान दिया जाता है.

संदर्भ:

  1. Colberg SR, Sigal RJ, Fernhall B, et al; American College of Sports Medicine; American Diabetes Association. Exercise and type 2 diabetes: the American College of Sports Medicine and the American Diabetes Association: joint position statement. Diabetes Care. 2010; 33(12):e147-167.
  2. McGlory C, von Allmen MT, Stokes T, et al. Failed Recovery of Glycemic Control and Myofibrillar Protein Synthesis With 2 wk of Physical Inactivity in Overweight, Prediabetic Older Adults. J Gerontol A Biol Sci Med Sci. 2018; 73(8):1070-1077. doi: 10.1093/gerona/glx203. PMID: 29095970
  3. James O. Hill. Walking and Type 2 Diabetes. Diabetes Care 2005 Jun; 28(6): 1524-1525.
  4. Tudor-Locke C1, Craig CL, Aoyagi Y, et al. How many steps/day are enough? For older adults and special populations. Int J Behav Nutr Phys Act. 2011;8:80. doi: 10.1186/1479-5868-8-80. PMID: 21798044
  5. José Roberto da Silva, Jr, Paulo Sérgio Borges, Karine F Agra, et al. Effects of an aquatic physical exercise program on glycemic control and perinatal outcomes of gestational diabetes: study protocol for a randomized controlled trial. Trials. 2013; 14: 390. Published online 2013 Nov 19. doi: 10.1186/1745-6215-14-390.
  6. Sideraviciūte S, Gailiūniene A, Visagurskiene K, et al. The effect of long-term swimming program on glycemia control in 14-19-year aged healthy girls and girls with type 1 diabetes mellitus. Medicina (Kaunas). 2006; 42(6):513-518. PMID: 16816547
  7. Hiroto Honda, Makoto Igaki, Yuki Hatanaka, et al. Stair climbing/descending exercise for a short time decreases blood glucose levels after a meal in people with type 2 diabetes. BMJ Open Diabetes Res Care. 2016; 4(1): e000232.
  8. Zar Chi Thent.  Role of Exercise in the Management of Diabetes Mellitus: the Global Scenario. PLoS ONE 8(11): e80436.
  9. Bando H,   Kan M , Konoike K, et al. Squat Exercise Therapy-Effective for Diabetics by HiSquat. J Nov Physiother 7:353. doi: 10.4172/2165-7025.1000353.
  10. Malhotra V1, Singh S, Tandon OP, et al. The beneficial effect of yoga in diabetes. Nepal Med Coll J. 2005;7(2):145-147

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