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डायबिटीज़ में तंत्रिकाओं को नुक़सान पहुंचने की वजह से हाथों-पैरों में झुनझुनी, चुभन और सुन्न होने जैसी तकलीफ़ें होने लगती हैं. इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं. यह शरीर में ब्लड शुगर लेवल के बढ़ने की वजह से होने वाली डायबिटीज़ की सबसे आम परेशानियों में से एक है.

डायबिटिक न्यूरोपैथी क्या है?

डायबिटीज़ से जुड़ी तंत्रिका (शरीर में तंत्रिका ऐसे रेशे को कहते हैं, जिसके ज़रिए शरीर में एक जगह से दूसरी जगह पर संकेत पहुंचता है) की परेशानियों के लिए ही ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी’ नाम का इस्तेमाल किया जाता है. शरीर के प्रभावित हिस्से के मुताबिक़ डायबिटीक न्यूरोपैथी कई तरह से होती है.

  1. पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी
  1. सेंसरी न्यूरोपैथी

3. ऑटोमैटिक न्यूरोपैथी

4. फ़ोकल न्यूरोपैथी

इस आर्टिकल में हम पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी के बारे में विस्तार से बात करेंगे.

पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी

पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी हाथों-पैरों के आस-पास की तंत्रिकाओं को नुक़सान पहुंचाती है. इसकी वजह से प्रभावित व्यक्ति को बांहों और पैरों में झुनझुनी, दर्द और सुन्न होने जैसी तकलीफ़ों से गुज़रना पड़ता है.

इसके लक्षण पहले हाथों और पैरों को प्रभावित करते हैं और धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाते हैं. ऐसी सनसनाहट मोज़ा या दस्ताना पहनने के दौरान भी होती है. इसीलिए डॉक्टर इसे स्टॉकिंग-ग्लोव पैटर्न भी कहते हैं. कुछ लोग स्पर्श के प्रति भी काफ़ी संवेदनशील होते हैं.

अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो प्रभावित तंत्रिकाएं आगे जाकर (10 या 20 सालों में) ज़्यादा खराब हो सकती हैं. इसके अलावा व्यक्ति को ये लक्षण महसूस हो सकते हैं:

  •   कमज़ोरी और चक्कर आना
  •   वज़न घटना, क्योंकि मांसपेशियों का वज़न कम हो जाता है.
  •   तालमेल और संतुलन न बैठा पाना
  •   पाचन की तकलीफ़
  •   यौन क्रियाओं में परेशानी
  •   पैरों में छाले

ये लक्षण बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए जब तक ये बहुत गंभीर या पेंचीदा नहीं हो जाते, तब तक पहचान में नहीं आते.

भारत में डायबिटीज़ से प्रभावित 10.5% से 32.2% लोगों में पहले से ही पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी होती है. वहीं लगभग 50% लोगों को डायबिटीज़ के दौरान यह परेशानी हो जाती है.

पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी का ख़तरा किसे रहता है?

डायबिटीज़ से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी हो सकती है. हालांकि नीचे बताए गए इन हालातों में इसके बढ़ने का ख़तरा ज़्यादा रहता है. अगर आप-

  • 55 साल से ज़्यादा उम्र के हैं.
  • लंबे समय से डायबिटीज़ से प्रभावित हैं.
  • ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं हो पा रहा है.
  • हाई ब्लड प्रेशर है.
  • वज़न ज़्यादा है.

    पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी किन लोगों को होती है?

रिसर्चर्स पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी के होने की सटीक वजह का पता नहीं लगा पाए हैं. हालांकि इसमें कोई शक़ नहीं है कि यह हाई ब्लड शुगर लेवल की वजह से होती है. हाल ही में हुए रिसर्च से पता चलता है कि हाई ब्लड शुगर लेवल के अलावा मेटाबॉलिक डिसऑर्डर, रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) में बदलाव हाई ब्लड प्रेशर की वजह से भी यह तकलीफ़ हो सकती है. इसके अलावा कमर के आसपास ज़्यादा फ़ैट और हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल के चलते भी पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी हो सकती है.

ख़ून में शुगर की मात्रा बढ़ने से रक्त वाहिकाओं को नुक़सान पहुंचता है, जिससे तंत्रिका कोशिकाओं से शरीर के दूसरे अंगों में ख़ून की सप्लाई पर असर पड़ता है. इस वजह से तंत्रिका कोशिकाओं में ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती है, जिससे ऐसा नुक़सान पहुंचता है, जिसे ठीक नहीं किया जा सकता.

 पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी की देखभाल

अफ़सोस, कि डाइबिटिक न्यूरोपैथी का कोई इलाज नहीं है. डॉक्टर दर्द कम होने और एंटी डिप्रेसेंट्स जैसी दवाएं, इसके लक्षणों को कम करने के लिए देते हैं. कैप्सैकिन क्रीम और मरहम से भी राहत पाने में मदद होती है.

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ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करना ही नसों को नुक़सान से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है.

ये टिप्स तकलीफ़ पर क़ाबू पाने में मदद करते हैं.

  •  जितना मुमकिन हो, व्यायाम करें – व्यायाम सिर्फ़ दर्द से ही छुटकारा नहीं दिलाता बल्कि इससे मिज़ाज भी बेहतर होता है. टहलना, बागवानी, घर के काम करना और हल्की-फ़ुल्की गतिविधि करने जैसी चीज़ें एक्सरसाइज़ में ही आती  हैं.
  • देखभाल करें. हर शाम अपने पैरों को धीरे-धीरे साफ करें, सुखाएं और मॉश्चराइज़र लगाएं. पैरों पर छाले, कटने के निशान और घाव की नियमित तौर पर जांच करें. अगर पैरों पर कोई घाव मिले और ठीक होने में देर हो रही हो, तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं.

    पढ़ें और जानें: डायबिटीज़ की देखभाल में कितने कारगर हैं ये मोज़े
  • अगर आप डाइबिटिक न्यूरोपैथी से जूझ रहे हैं तो धूम्रपान आपके लिए ख़तरनाक हो सकता है क्योंकि यह पैरों की परेशानियों को बढ़ा देता है. इसके अलावा धूम्रपान से दर्द भी बढ़ जाता है.
  • शराब से परहेज करें.
  • एक जोड़ी अच्छे जूते खरीदें. आपके जूते आरामदायक होने चाहिए. ऊंची एड़ी वाले जूते न पहनें.

ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए सेहतमंद खानपान अपनाना भी ज़रूरी है:

पेरिफ़ेरल न्यूरोपैथी को रोकने के लिए डॉक्टर कुछ थेरेपी की भी सलाह देते हैं.

  1. ट्रांसक्यूटेनिअस इलेक्ट्रिक नर्व स्टिमुलेशन (टीईएनएस) इस प्रक्रिया के दौरान शरीर में इलेक्ट्रोड लगाकर इलेक्ट्रिक करेंट दिया जाता है.
  2. न्यूरोपैथिक दर्द से छुटकारा पाने में फ़िजियोथेरेपी से भी बहुत मदद मिल जाती है. इसके बारे में आप अपने डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं.

इसके अलावा, कुछ योगासन भी पैरों में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में मदद करते हैं. अगर आपको योग का अनुभव नहीं है, तो आप प्रमाणित योग प्रशिक्षक (योगा ट्रेनर) से सलाह ले सकते हैं. योग सिर्फ़ दर्द से ही राहत नहीं दिलाता है, बल्कि यह आपको एक्टिव रखने में भी मदद करता है. इससे तनाव भी कम होता है, जिससे आप अपनी सेहत के प्रति ज़्यादा जागरूक रहते हैं.

कंटेंट की समीक्षा अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं

संदर्भ:

  1. S.Trivedi, A. Pandit, A., G. Ganguly, G., & Das, S. K. (2017). Epidemiology of Peripheral Neuropathy: An Indian Perspective. Annals of Indian Academy of Neurology, 20(3), 173–184.
  2. M. Zychowska, E. Rojewska, B. Przewlocka, J. Mika. Mechanisms and pharmacology of diabetic neuropathy – experimental and clinical studies. Pharmacological Reports. (2013) 65, 1601-1610. ISSN 1734-1140.
  3. American Academy of Neurology. Understanding Peripheral Neurology.

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