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अगर डॉक्टर ने आपको अपनी सेहत को अच्छी तरह मैनेज करने के लिए इंसुलिन प्रिस्क्राइब की है, तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं है जिनके साथ ऐसा हुआ है. डायबिटीज़ से प्रभावित लगभग 50% लोगों को इंसुलिन प्रिस्क्राइब किया जाता है. अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो ब्लड शुगर लेवल को कम करने के लिए इंसुलिन सबसे असरदार दवा हो सकती है. लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि टाइप 2 डायबिटीज़ से प्रभावित 73% लोग इंसुलिन थेरेपी शुरू करने से हिचकिचाते हैं. इसकी वजह है – इंसुलिन थेरेपी से जुड़ा डर और इसके सिलसिले में फैलाई गई गलत अफ़वाहें.(1-4) यह एक अहम वजह है कि कई पेशंट को सही इलाज मिलने में देरी हो जाती है.

हाल के स्टडीज़ से ये बात सामने आती है कि इंसुलिन प्रिस्क्राइब करने से पहले कई लोगों का ब्लड ग्लूकोज़ लेवल सालों तक सही रेंज से ऊपर था.(1) शुगर कंट्रोल करने के मामले में इंसुलिन के कई फ़ायदों को ध्यान में रखते हुए, इंसुलिन के बारे में सही जानकारी होना बहुत ज़रूरी है. इससे बिना सैर-पैर की आशंकाओं और गलतफहमियों को भी दूर करने में मदद मिलेगी.

डर #1: अगर डॉक्टर ने इंसुलिन लेने की सलाह दी है, तो इसका मतलब है कि मैं डायबिटीज़ को कंट्रोल करने में नाकामयाब रहा हूं

टाइप 2 डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों को इलाज के लिए आमतौर पर सबसे पहले इंसुलिन नहीं प्रिस्क्राइब की जाती है. इसे इस्तेमाल करने की सलाह तब दी जाती है जब लाइफस्टाइल और दवाइयों में सही बदलाव करने के बाद भी ब्लड शुगर लेवल को सही रेंज में लाने में कामयाबी नहीं मिलती. इसे कई लोग खुद की हार के तौर पर देखते हैं. इस सोच की वजह से लोग इंसुलिन थेरेपी के प्रति उदासीन रवैया अपनाए रखते हैं. इंसुलिन को ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के तरीके के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि किसी हार की तरह.(1) आपको अपने अतीत पर नहीं, बल्कि अपने भविष्य को अहमियत देनी चाहिए.(2)

डर # 2: इंसुलिन थेरेपी असरदार नहीं होती है

डायबिटीज़ से प्रभावित 40% लोग, जिन्होंने इंसुलिन शुरू नहीं किया है, उनका मानना ​​है कि इंसुलिन उनके लिए फ़ायदेमंद साबित नहीं होगा.(1) जैसा कि पहले भी कहा गया है, ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए इंसुलिन एक बेहतरीन उपाय है. यह लंबे समय तक डायबिटीज़ से होने वाली समस्याओं के जोख़िम को कम करता है और  व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता पर कोई ख़ास बुरा असर नहीं डालता है. यही वजह है कि इस तरह के झूठे अफ़वाहों को दूर रखने के लिए इंसुलिन के बारे में खुद को जागरूक बनाएं और सही कदम उठाएं.

डर # 3: इंसुलिन लेना एक मुश्किल काम है और ये लचीला नहीं हैं

डायबिटीज़ से प्रभावित लगभग एक-चौथाई लोग हर दिन तय समय पर इंसुलिन लेने की बात को मुश्किल मानते हैं. लेकिन कई तरह के इंसुलिन उपलब्ध हैं और अगर आप अपने शेड्यूल में ज़्यादा लचीलापन चाहते हैं, तो दूसरे विकल्पों के बारे में जानने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें.

डर # 4: इंसुलिन इंजेक्शन दर्दनाक होते हैं

कुछ लोगों का मानना ​​है कि इंसुलिन इंजेक्शन दर्दनाक होते हैं या हो सकता है कुछ लोगों को सुइयों से डर लगता हो.(2) लेकिन इसके लिए भी एक आसान उपाय है. इंसुलिन पेन में छोटी सुई का इस्तेमाल किया जाता है. यह काफी हद तक होने वाली असुविधा को कम कर देती है और इंजेक्शन लगाने पर लगभग न के बराबर दर्द होता है. अपने डॉक्टर या नर्स को एक नमूना दिखाने के लिए कहें और फिर उनके सामने एक-दो बार इसकी प्रैक्टिस करें. ऐसा करने से आपकी चिंता कम होगी और आपके अंदर से दर्द का एहसास भी धीरे-धीरे कम होता जाएगा. इंसुलिन इंजेक्शन के लिए बिना सुई वाला विकल्प भी मौजूद है, जैसे इंसुलिन पंप और इंसुलिन इनहेलर.

डर # 5: लोग क्या कहेंगे!

कुछ लोगों को ख़ास तौर पर भारत में, इंसुलिन इंजेक्शन से जुड़ी गलत धारणाओं के बारे में सोचकर भी चिंता होती है. इस वजह से, हो सकता है कि डायबिटीज़ से प्रभावित कई लोग लंबे समय तक इंसुलिन लेने से ही इनकार कर दें या सार्वजनिक तौर पर इनका इस्तेमाल करने से हिचकिचाएं. लेकिन सुकूनदेह बात ये है कि अब देश में डायबिटीज़ की देखभाल के बारे में जागरूकता बढ़ रही है. लेकिन फिर भी रेस्टोरेंट या किसी के घर में होने पर बहाना बनाकर वाशरूम में जाना संभव है और फिर वहां इंसुलिन लिया जा सकता है.(2)

डर #6: इंसुलिन थेरेपी में हाइपोग्लाइसीमिया होने की संभावना ज़्यादा होती है

इंसुलिन थेरेपी में हाइपोग्लाइसीमिया होने की गुंजाइश होती है, लेकिन ऐसा ब्लड शुगर को कम करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली किसी भी दवा (जैसे ग्लिमपिराइड और मेटफॉर्मिन) के साथ हो सकता है. इंसुलिन के कई विकल्प मौजूद हैं. उदाहरण के लिए, लंबे समय तक असर करने वाले इंसुलिन के विकल्प हर दिन लगाए जाने वाले इंजेक्शन की संख्या को कम करते हैं, हाइपोग्लाइसीमिया की संभावना को कम करते हैं वगैरह.(3) इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस इंसुलिन का इस्तेमाल करते हैं, इंसुलिन थेरेपी, हाइपोग्लाइसीमिया की सही जानकारी और इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल करने से हाइपोग्लाइसीमिया की संभावना को कम किया जा सकता है.

डर # 7: इंसुलिन से वज़न बढ़ सकता है

ये सच है कि इंसुलिन लेने की वजह से वज़न बढ़ सकता है, लेकिन इंसुलिन लेने वाले हर इंसान का वज़न बढ़े, ये ज़रूरी नहीं है. सेहतमंद डाइट और फ़िज़िकल एक्सरसाइज़ को अपनाकर वज़न को कंट्रोल किया जा सकता है.(2) इसके अलावा अगर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन डोज़ प्रिस्क्राइब नहीं की गई है, तो ऐसी दवाएं जिनकी वजह से वज़न बढ़ने की गुंजाइश कम होती है, उन्हें इंसुलिन खुराक बढ़ाने के बजाय सहायक के रूप में आजमाया जा सकता है.

अपने आप से पूछें कि क्या ऐसी बातों की चिंता आपको सही इलाज कराने से रोक रही है? लेकिन इसमें परेशान होने जैसी कोई बात नहीं है, इंसुलिन थेरेपी को दूसरी दवा की तरह ही समझें. जो लोग इंसुलिन लेने के लिए हिचकिचाते हैं, उन्हें साइकोलॉजिकल इंसुलिन रेज़िस्टेंस (मनोवैज्ञानिक इंसुलिन प्रतिरोध) के नाम से जाना जाता है. ऐसे लोगों को इंसुलिन थेरेपी ज़्यादा दर्द वाली, समस्याओं से भरपूर और असंतोषजनक पैदा करने वाली लगती है. इसलिए, वे इंसुलिन ट्रीटमेंट लेने से कतराते हैं. लेकिन इंसुलिन ट्रीटमेंट की अनदेखी करने से हो सकता है कि डॉक्टर और हॉस्पिटल का बार-बार चक्कर लगाना पड़े और समस्याएं ज़्यादा बढ़ जाएं. इसके अलावा, डिप्रेशन यानी अवसाद और/या एंजाइटी के शिकार लोगों को मनोवैज्ञानिक इंसुलिन प्रतिरोध के गिरफ़्त में आने की संभावना ज़्यादा होती हैं. उन्हें ऐसे साइकोलॉजिस्ट से मिलने की ज़रूरत हो सकती है जिन्हें डायबिटीज़ की भी जानकारी हो.

खुद को जागरूक करें:

रिसर्च ने लगातार इस बात को हमारे सामने लाया है कि ब्लड शुगर को तब ज़्यादा बेहतर तरीके से कंट्रोल में रखा जा सकता है जब इससे प्रभावित व्यक्ति को इस बीमारी, इसकी दवाइयों और इन दवाइयों से शरीर पर पड़ने वाले सामान्य असर से जुड़े सभी पहलुओं की जानकरी हो.(1-4) एक बात याद रखें कि आजकल इंसुलिन का इस्तेमाल आपकी सोच से ज़्यादा सामान्य हो गया है: टाइप 2 डायबिटीज़ से प्रभावित 2 लोगों में से 1 को इस बीमारी के पता चलने के 6 सालों के अंदर इंसुलिन लेने की ज़रूरत होती है.(3) भारत में कुछ निजी अस्पतालों में अब डायबिटीज़ के बारे में जानकारी देने के लिए एज्यूकेटर की सुविधा उपलब्ध की गई है.(4) इनकी सेवाओं का इस्तेमाल करें और जितना हो सके, डायबिटीज़ से जुड़ी सभी जानकारी हासिल करें. वे लोग जिनके पास ज़्यादा जानकारी होती है या जो लोग डायबिटीज़ के बारे में ज़्यादा जागरूक होते हैं, वे डॉक्टर की सलाह को बेहतर ढंग से समझते हैं और इसी हिसाब से उनके सुझावों को फ़ॉलो करते हैं.

संदर्भ:

  1. RussellJones D, Pouwer F, Khunti K. Identification of barriers to insulin therapy and approaches to overcoming them. Diabetes, Obesity and Metabolism. 2018;20(3):488-96.
  2. Kunt T, Snoek FJ. Barriers to insulin initiation and intensification and how to overcome them. International Journal of Clinical Practice. 2009;63:6-10.
  3. Larkin ME, Capasso VA, Chen CL, et al. Measuring psychological insulin resistance. The Diabetes Educator. 2008;34(3):511-7.
  4. Jha S, Panda M, Kumar S, et al. Psychological insulin resistance in patients with type 2 diabetes. Journal of the Association of Physicians of India. 2015;63(7):33-9.

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