Juice vs Whole Fruits
Juice vs Whole Fruits
Reading Time: 3 minutes

कंटेंट की समीक्षा अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

डायबिटीज़ यानी मधुमेह से ग्रसित लोगों के लिए है फल का सेवन करना भोजन के बेहतरीन विकल्पों में से एक है, जो लो-कैलोरी और कोलेस्ट्रॉल रहित होने के साथ ही विटामिन और फ़ाइबर से भरपूर होते हैं.

लेकिन आप तब क्या करेंगे जब आपके पास इसे साफ़ करने, छीलने, बीज निकालने और काटने का वक़्त ना हो? ऐसे में हो सकता है कि आप फ़्रूट जूस पीने में रूचि लें. क्योंकि जूस बना बनाया सीधे हांथों में आता है, जिसे आप आसानी से पी सकते हैं.

पर ज़रा ठहरिये ! अगर आप डायबिटिक हैं, (और अगर नहीं भी हैं) तो आपके लिए बेहतर होगा कि आप स्टोर में मिलने वाले इन फ़्रूट जूस को ख़रीदने से पहले थोड़ा रुकें.

फ़्रूट जूस का नकारात्मक पहलू है- कैलोरीज़

साबुत फलों के मुक़ाबले ज़्यादातर जूस में ढेर सारे कार्बोहाइड्रेट्स और कैलोरीज़ पाए जाते हैं. कई बार इसे बनाने में फ्रुक्टोस जैसे स्वीटनर्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो आपके ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को बढ़ाने की अहम वजह होते हैं.(1) कई फ़्रूट जूस के पैकेट 100% प्राकृतिक जूस होने का दावा करते हुए बाहरी तौर पर किसी भी अतिरिक्त मिलावट से इंकार करते हैं, पर ख़रीदने से पहले, उसमें कौन सी चीजें शामिल हैं, शक्कर, कार्बोहाइड्रेट्स और कॉर्न सिरप मिलाए गए हैं या नहीं, आप इन बातों की जांच ज़रूर कर लें.

इसे भी जानें: क्या डायबिटिक को शक्कर से पूरी तरह दूर रहने की ज़रूरत है? 

फ़्रूट जूस में फ़ाइबर भी नदारद होते हैं

फलों की तुलना में फ़्रूट जूस में काफ़ी कम मात्रा में फ़ाइबर होते हैं, क्योंकि फलों का जूस बनाने के दौरान फ़ाइबर नष्ट हो जाते हैं. इतना ही नहीं, हो सकता है हाइली प्रोसेस किए गए फलों के जूस में बिलकुल भी फ़ाइबर न हो. डायबिटिक लोगों के लिए फ़ाइबर अच्छा होता है, क्योंकि यह शरीर में शुगर के अवशोषित होने की रफ़्तार को धीमा करता है. फ़ाइबर युक्त भोजन से ब्लड ग्लूकोज़ लेवल के बढ़ने में कमी आती है. ऐसे में जो चीज़ें फ़ाइबर युक्त न हों, उनका चुनाव करना, हो सकता है कि किसी भी हाल में ठीक न हो.

मधुमेह से ग्रसित लोगों के लिए फल अच्छे क्यों हैं?

फ़्रूट जूस के मुक़ाबले फलों में भरपूर मात्रा में फ़ाइबर होते हैं और यह जूस से ज़्यादा पेट भी भरते हैं. जिसका मतलब हुआ कि अगर आपको मधुमेह है, तो स्नैक्स के तौर पर फलों को चुनने से आपके शरीर को पौष्टिक चीज़ें मिलेगी और वज़न को भी संतुलित बनाए रखा जा सकेगा. इतना ही नहीं, फ़ाइबर आपके कोलेस्ट्रॉल लेवल और कार्डियोवेस्क्युलर (दिल से जुड़ी परेशानियां) की जटिलताओं को भी टालने में असरदार होता है.(2)

फ़्रूट जूस– चाहे स्वीटनर के साथ हों या क़ुदरती– हम बड़ी ही सहजता से पी लेते हैं, जिससे इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि बिना इसकी मात्रा पर ध्यान दिए, हम अनजाने में इसे काफ़ी ज़्यादा पी जाएं. पूरा फल खाना अलग बात है, क्योकि इसे खाने के लिए आपको इसे चबाना पड़ता है, जिससे आपको अपने पोर्शन साइज़ पर नियंत्रण रखने में आसानी हो जाती है.

इसे भी देखें: शुगर बढ़ने पर क्या करें?

38 से 63 की उम्र के बीच की 71,346 महिलाओं पर 18 वर्षों तक किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि फल खाने वाली महिलाओं में डायबिटीज़ बढ़ने का ख़तरा कम, जबकि, जूस पीने वाली महिलाओं में डायबिटीज़ बढ़ने का ख़तरा ज़्यादा था.(3)

2013 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के शोध पत्रों में यह बात कही गई कि सेब, अंगूर और ब्लूबेरी जैसे फलों को सबूत खाने से डायबिटीज़ का ख़तरा कम रहता है, जबकि फलों का जूस पीने से टाइप 2 डायबिटीज़ का ख़तरा ज़्यादा होता है.(4)

इन सारी बातों के मद्देनज़र, इसमें कोई शक़ नहीं कि डायबिटिक लोगों को फलों का जूस पीने के बजाय, क़ुदरती फलों को ही खाना चाहिए.

संदर्भ

  1. Diabetes.co.uk. What Fruit Juice Can People With Diabetes Drink? Available online at: https://www.diabetes.co.uk/food/juice-and-diabetes.html
  2. J.W. Anderson. Dietary Fiber and Diabetes. In: Spiller G.A., Kay R.M. (eds) Medical Aspects of Dietary Fiber. Topics in Gastroenterology. Springer. 1980: 193-221. DOIhttps://doi.org/10.1007/978-1-4615-9176-4_11
  3. L.A. Bazzano, T.Y. Li, K.J. Joshipura, F.B. Hu. Intake of Fruit, Vegetables, and Fruit Juices and Risk of Diabetes in Women. Diabetes Care. 2008 Jul; 31(7): 1311–1317. doi: 10.2337/dc08-0080
  4. I. Muraki, F.Imamura, J.E. Manson, F.B. Hu, W.C. Willett, R.M. vanDam et al. Fruit consumption and risk of type 2 diabetes: Results from three prospective longitudinal cohort studies. BMJ 2013; 347 doi: https://doi.org/10.1136/bmj.f5001

Loved this article? Don't forget to share it!

Disclaimer: The information provided in this article is for patient awareness only. This has been written by qualified experts and scientifically validated by them. Wellthy or it’s partners/subsidiaries shall not be responsible for the content provided by these experts. This article is not a replacement for a doctor’s advice. Please always check with your doctor before trying anything suggested on this article/website.