Glycemic index glycemic load carbs diabetes diet
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डायबिटीज़ का ख़याल रखने के लिए कई चीज़ों पर ध्यान देना पड़ता है, जिनमें से खानपान भी एक ज़रूरी पहलू है. क्या खाएं और क्या नहीं, इसे लेकर आपके दिमाग में कशमकश हो सकती है. आपके डॉक्टर आपको ऐसी चीज़ें खाने की सलाह देंगे जिनका ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ और ‘ग्लाइसेमिक लोड’ कम हो. पर आप सोच रहे होंगे कि भला ये किस चिड़िया का नाम है! आइए हम आपको यहां बताते हैं.

ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्या है?

अलग-अलग तरह के खाने में अलग-अलग तरह के कार्बोहाइड्रेट होते हैं. खाने के कुछ देर बाद आपका शरीर इनसे ग्लूकोज़ तैयार करता है. ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) वह माप है, जिससे पता लगाया जाता है कि किसी खाने की चीज़ में मौजूद कार्बोहाइड्रेट कितनी देर में ग्लूकोज़ बनता है और फिर उससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है.

100 ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले शुद्ध ग्लूकोज़ को स्टैण्डर्ड मानकर दूसरी खाने की चीज़ों की तुलना करके उन्हें 0-100 तक की रैंक दी जाती है. ऐसी खाने की चीज़ें जो जल्दी पच जाती हैं, उनसे ब्लड शुगर लेवल ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है. इसलिए ऐसी चीज़ों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज़्यादा (100 के करीब) होता है. ऐसी खाने की चीज़ें जिनमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे काम करते हैं, उन्हें शरीर देर में प्रोसेस करता है, उनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है.

कम यानी लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली खाने की चीज़ें सेहत के लिए ज़्यादा अच्छी होती हैं. इन्हें खाने से ब्लड शुगर लेवल बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है.

ग्लाइसेमिक लोड क्या है?

ग्लाइसेमिक इंडेक्स कार्बोहाइड्रेट के प्रकार के हिसाब से होता है, वहीं ग्लाइसेमिक लोड खाने के हिस्से में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की मात्रा के बारे में होता है. इससे अंदाज़ा लगाने में मदद मिलती है कि कोई खाने की चीज़ किसी ख़ास मात्रा पर लेने से ब्लड शुगर लेवल पर क्या असर पड़ता है.

किसी खाने की चीज़ का ग्लाइसेमिक लोड निकालने के लिए, उसके ग्लाइसेमिक इंडेक्स को उसकी मात्रा में मौजूद कार्बोहाइड्रेट से गुणा करते हैं.

दोनों में क्या फर्क है?

ग्लाइसेमिक इंडेक्स से खाने की चीज़ के कार्बोहाइड्रेट का प्रकार पता चलता है, कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा नहीं. इससे आप अपने खाने के कार्बोहाइड्रेट की गुणवत्ता को नाप सकते हैं, मात्रा को नहीं. वहीं ग्लाइसेमिक लोड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा की जानकारी होती है. इससे आपको पता चलता है कि आप जितना खा रहे हैं, उससे कितनी मात्रा में आपको कार्बोहाइड्रेट मिल रहा है.

क्या आप डायबिटीज़ फ़्रेंडली खाने और नाश्ते की तलाश में हैं? तो यहां पढ़ें.

ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लासेमिक लोड के मान को कैसे समझा जाता है?

ग्लाइसेमिक इंडेक्स के मान को इस तरह से समझा जाता है:

  •  GI ≥ 70 – ज़्यादा
  •  GI 56 to 69 – मध्यम
  •  GI ≤ 55 – कम

ग्लाइसेमिक लोड मान को इस तरह से समझा जाता है:

  • GL ≥  20 – ज़्यादा
  • GL 11 to 19 — मध्यम
  • GL ≤ 10 – कम

खाने की किसी चीज़ में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स और लो ग्लाइसेमिक लोड होना क्या है?

अगर किसी खाने की चीज़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई है, तो इसका मतलब है कि उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट तेज़ी से ग्लूकोज़ में बदलता है, जिसकी वजह से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है. लेकिन ग्लाइसेमिक इंडेक्स से आपको यह पता नहीं चलता, उस खाने की चीज़ की कितनी मात्रा खाने पर ब्लड शुगर तेज़ी से बढ़ता है.

खाने की कई ऐसी चीज़ें हैं जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई है लेकिन उनकी ज़्यादा मात्रा खाने से ही ब्लड शुगर लेवल तेज़ी से बढ़ता है. आमतौर पर एक बार जितनी मात्रा में उसे खाया जाता है, उससे ऐसा नहीं होता. उदाहरण के लिए तरबूज़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 72 होता है, लेकिन ग्लाइसेमिक लोड सिर्फ़ 4 होता है.[1] इसका मतलब है, अगर आप एक बार में पूरा तरबूज़ खाते हैं, तभी आपका ब्लड शुगर बढ़ेगा.

ग्लाइसेमिक इंडेक्स से पूरी जानकारी क्यों नहीं मिलती?

आपकी इंसुलिन प्रतिक्रिया और ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से दो चीज़ों पर असर पड़ता है: आपके खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट का प्रकार और मात्रा.

ग्लाइसेमिक इंडेक्स आपको आपके खाने की गुणवत्ता के बारे में बताता है, उसकी मात्रा के बारे में नहीं. वह यह नहीं बताता कि आप कितना खा रहे हैं. इसलिए इससे यह अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता कि आप जितनी मात्रा में खा रहे हैं (और उसमें जितना कार्बोहाइड्रेट है), उसका आपके ब्लड शुगर लेवल पर क्या असर पड़ेगा. आप कोई चीज़ 100 ग्राम खाएं या 1000 ग्राम, उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक जैसा रहेगा. इससे ग़लतफ़हमी हो सकती है.

उदाहरण के लिए, आप ग्लाइसेमिक इंडेक्स 100 की बजाए ग्लाइसेमिक इंडेक्स 50 वाली चीज़ खाना पसंद करेंगे. ऐसा इसलिए, क्योंकि आपको लगता है कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स 50 वाली चीज़ खाने से आपके ब्लड शुगर लेवल पर कम असर पड़ेगा. लेकिन अगर आप ग्लाइसेमिक इंडेक्स 50 वाली चीज़ की दोगुनी मात्रा खा लेंगे, तो आपका ब्लड शुगर लेवल उतना ही बढ़ेगा, जितना ग्लाइसेमिक इंडेक्स 100 वाली चीज़ खाने पर.

कैसे चुनें कि क्या खाएं?

जब भी चुनना हो कि क्या खाएं और क्या नहीं, तो खाने की चीज़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स देखें या ग्लाइसेमिक लोड? क्या इन दोनों में से किसी एक का पता लगाकर तय किया जा सकता है कि डायबिटीज़ से प्रभावित व्यक्ति के लिए कौन सी खाने की चीज़ बेहतर है?

ज़्यादा ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीज़ें खाने से आपका ब्लड शुगर लेवल बहुत बढ़ सकता है, जबकि लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीज़ें खाने से ब्लड शुगर लेवल कम ही बढ़ता है. अध्ययनों से पता चलता है कि हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले कार्बोहाइड्रेट की जगह लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले कार्बोहाइड्रेट खाने से शुगर कंट्रोल में रहता है.[2]

लेकिन, खाने की गुणवत्ता पर ध्यान देना भी ज़रूरी है. कार्बोहाइड्रेट पर नज़र रखने से आपके ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से कंट्रोल में रखा जा सकता है. यहीं आपकी मदद ग्लाइसेमिक लोड करता है. आपके खाने का आपके ब्लड शुगर लेवल पर क्या असर पड़ेगा, इसकी साफ तस्वीर आपको ग्लाइसेमिक लोड दिखाता है. ज़्यादा ग्लाइसेमिक लोड वाली खाने की चीज़ इंसुलिन बढ़ाकर आपका ब्लड ग्लूकोज़ बढ़ाती है.

वीडियो देखें: डायबिटीज़ में ज़्यादा या कम नहीं सही मात्रा में खाना ज़रूरी है.

ग्लाइसेमिक इंडेक्स से फ़ायदा तो बहुत होता है, लेकिन अपना खाना चुनते समय आपको सिर्फ़ इसी के भरोसे नहीं रहना चाहिए. खाने का चुनाव करते हुए आपको कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा पर भी ध्यान देना चाहिए. ग्लाइसेमिक इंडेक्स से आप खाने के विकल्प में से बेहतर चुनने में मदद पाते हैं, वहीं ग्लासइसेमिक इंडेक्स की मदद से आपको पता चलता है कि किस मात्रा में वह चीज़ खाएं.

ऐसी खाने की चीज़ें जिनमें ग्लाइसेमिक लोड और इंडेक्स दोनों कम हो, उन्हें खाने से फ़ायदा रहता है. लेकिन याद रखें, ऐसा कोई डायट प्लान नहीं है, जो सबके हिसाब से हो. हर इंसान के लिए खाने की मात्रा अलग-अलग हो सकती है. किसी खाने की वैरायटी, प्रोसेसिंग, उसे बनाने का तरीका, उसके साथ खाए जाने वाली दूसरी चीज़ें, किस वक्त आप उसे खा रहे हैं जैसी चीज़ें किसी खाने की चीज़ के ग्लाइसेमिक इंडेक्स और आपकी ब्लड शुगर प्रतिक्रिया पर असर डालती हैं. इसलिए अपने ग्लाइसेमिक लोड का हिसाब ख़ुद लगाएं और अपने हिसाब से तैयार किया हुआ डायट प्लान अपनाएं. अपने डायट प्लान में फल, सब्ज़ियां, साबुत अनाज जैसी चीज़ें शामिल करें. फ़ाइबर और नमक की मात्रा के अलावा फैट यानी वसा के प्रकार पर भी ध्यान दें.

क्या डायबिटीज़ में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स और लो ग्लाइसेमिक लोड वाली चीज़ें खाई जा सकता हैं?

लंबे वक्त तक ज़रूरी पोषण और फ़ाइबर वाली कुछ चीज़ों जैसे की फल को डायबिटीज़ में खाना सही नहीं समझा जाता था क्योंकि इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज़्यादा होता था. इस इंडेक्स का फल की मात्रा से कोई लेना-देना नहीं था. लेकिन ग्लाइसेमिक लोड की वजह से अब ऐसी चीज़ें ‘ख़राब’ नहीं रहीं, डायबिटीज़ में इन्हें खाना सुरक्षित माना जाने लगा. एक निश्चित मात्रा में इन्हें खाने से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट नहीं मिलता, जिससे कि ब्लड शुगर पर ज़्यादा असर नहीं पड़ता.

ऐसे कुछ उदाहरण इस तरह से हैं:[1]

ग्लाइसेमिक इंडेक्सग्लाइसेमिक लोड
पपीता6010
अनानास59 ± 87
तरबूज़724
कद्दू75 ± 93
चुकंदर64 ± 165
गाजर47 ± 163

जानें ऐसे कौन से फल हैं जिन्हें आप डायबिटीज़ में खा सकते हैं.

ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड वैल्यू बताने वाली अंतरराष्ट्रीय तालिका: 2002 में कई खाने की चीज़ों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड बताया गया है. 2008 में इसमें संशोधन भी किया गया.[3,4]

कंटेंट की समीक्षा:अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

संदर्भ:

  1. http://www.diabetes.org.br/publico/images/pdf/2016/nutr-2002-foster-powell-5-56.pdf
  2. Willett W, Manson J, Liu S. Glycemic index, glycemic load, and risk of type 2 diabetes. Am J Clin Nutr. 2002 Jul;76(1):274S-80S. Review. PubMed PMID: 12081851.
  3. Atkinson FS, Foster-Powell K, Brand-Miller JC. International Tables of Glycemic Index and Glycemic Load Values: 2008. Diabetes Care. 2008;31(12):2281-2283. doi:10.2337/dc08-1239.
  4. http://www.beauty-review.nl/wp-content/uploads/2014/07/Revised-International-Table-of-Glycemic-Index-GI-and-Glycemic-Load-GL-Values%E2%80%942002.pdf

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