heart care after menopause
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कई लोग मानते हैं कि महिलाओं के मुक़ाबले पुरुषों के सिर पर दिल की बीमारियों का ख़तरा कहीं ज़्यादा मंडराता है. यह बहुत बड़ा मिथक है! दिल की बीमारी पुरुषों और महिलाओं दोनों को अपनी चपेट में लेती है. हालांकि, महिलाओं के मुक़ाबले पुरुषों में दिल से जुड़ी बीमारी होने के मामले ज़्यादा सुनने को मिलते हैं. दरअसल, इसकी वजह महिलाओं में पाया जाने वाला एस्ट्रोजन हॉर्मोन है. यह प्राइमरी या प्राथमिक सेक्स हॉर्मोन महिलाओं को दिल की बीमारी से बचाने का काम करता है. यही हार्मोन उनकी माहवारी या पीरियड्स के लिए भी ज़िम्मेदार होता है.[1]

जब तक एक महिला बच्चे को जन्म दे सकती है, तब तक ओवरी (अंडाशय) एस्ट्रोजन का उत्पादन करती है. जब महिलाएं मेनोपॉज़ यानी पीरियड्स बंद होने की उम्र में पहुंचती हैं, तो एस्ट्रोजन का लेवल गिर जाता है. ऐसा कहा जाता है कि 60 साल की उम्र से पहले तक महिलाओं को पुरुषों के मुक़ाबले दिल की बीमारी होने का ख़तरा कम होता है. लेकिन इस उम्र को पार कर लेने के बाद, उनमें दिल से जुड़ी अलग-अलग बीमारियां होने का जोख़िम पुरुषों जितना ही होता है.[2,3]

एस्ट्रोजन क्या काम करता है?

एस्ट्रोजन को ख़ून पहुंचाने वाली नसों और दिल के लिए सुरक्षात्मक भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है. यह ख़ून पहुंचाने वाली नसों या ब्लड वेसेल्स को खींच कर चौड़ा रखता है. यह लिपिड मटैबलिज़म और ख़ून के थक्के बनने पर भी असर डालता है. ये सभी प्रक्रियाएं दिल के काम पर सीधे या घुमा फिराकर असर डाल सकती हैं. ख़ून के थक्के बनने या ब्लड वेसेल्स की दीवारों पर मोम जैसी चीज़ के जमने से शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ख़ून का बहाव कम हो सकता है. इसका असर छोटी ब्लड वेसेल्स पर ज़्यादा पड़ता है, जिससे माइक्रोवस्कुलर कोरोनरी आर्टरी डीज़ीज़ नाम की बीमारी हो सकती है. फ़िक्र की बात यह है कि इससे लक्षण नज़र आ भी सकते हैं और नहीं भी.

लगभग 50% महिलाएं सीने में दर्द जैसे लक्षण महसूस कर सकती हैं. लेकिन, 10% महिलाओं को किसी भी तरह का लक्षण महसूस नहीं होता है. नीदरलैंड की एक स्टडी में सामने आया है कि जिन महिलाओं को सीने में दर्द महसूस होता है, उनमें दिल की बड़ी बीमारियां होने का ख़तरा ज़्यादा होता है. स्टडी में कहा गया है कि दिल की बीमारियों से जुड़े किसी भी जोख़िम को कम करने के लिए महिलाओं को अपनी लाइफ़ स्टाइल को ठीक रखने की कोशिश करनी चाहिए.[3] 

इन बीमारियों से बचने के लिए आप क्या कर सकती हैं?

मेनोपॉज़ से कई जोख़िम जुड़े हुए हैं, दिल की बीमारी भी उस लिस्ट में से एक है. मेनोपॉज़ एक ऐसी चीज़ है जिसे आप टाल नहीं सकती हैं, लेकिन आप कुछ चीज़ें ज़रूर कर सकती हैं जो आपमें दिल की बीमारियों को बढ़ने से रोक सकता है. 

यहां आपके लिए कुछ काम के सुझाव दिए गए हैं:

  • अपने कोलेस्ट्रॉल के लेवल पर नज़र रखें: जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, एलडीएल (ख़राब कोलेस्ट्रॉल) बनना और उसका लेवल बढ़ना शुरू हो जाता है. वहीं दूसरी तरफ एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) का लेवल गिरना शुरू हो जाता है. फ़ाइबर वाली चीज़ों या साबुत अनाज को खाने में शामिल करना अच्छा रहता है जो कोलेस्ट्रॉल का सही लेवल बनाए रखने में मदद करता है.
  • मेनोपॉज़ के बाद भी हर दिन एक्सरसाइज़ करना जारी रखें: अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की सलाह है कि महिलाओं को दिल की बीमारियों के जोख़िम को कम करने के लिए हफ़्ते में कम से कम 150 मिनट तक एक्सरसाइज़ करनी चाहिए. अगर आपका वज़न औसत से ज़्यादा है, तो हफ़्ते में 300 मिनट तक एक्सरसाइज़ करने की कोशिश करें. इसका मतलब है, हफ़्ते में 5 दिन 1 घंटे की एक्सरसाइज़ करना. एक्सरसाइज़ का मतलब सिर्फ़ जिमिंग से नहीं है; इसमें डांस, साइकिल चलाना या स्वीमिंग जैसी दूसरी एक्टिविटी शामिल हो सकती हैं.
  • धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान बुरी आदतों में से एक है जो आपके हार्मोन के स्तर में गड़बड़ी पैदा कर सकती है, ख़ून के थक्कों को बढ़ा सकती है और ख़ून पहुंचाने वाली नसों के लचीलेपन को कम कर सकती है. इन सभी की वजह से दिल की बीमारियों के होने का ख़तरा काफ़ी हद तक बढ़ जाता है. इसलिए, इस आदत से छुटकारा पाना ही सबसे अच्छा है.
  • सही न्यूट्रीशन लें: एक कहावत है, आपका शरीर एक मंदिर है; उसके साथ सही बर्ताव करें. दिल की बीमारियों का जोख़िम कम करने के लिए, यह ज़रूरी है कि आप इस बात पर ध्यान दें कि आप क्या खाते-पीते हैं. अपने रोज़ के खाने-पीने की चीज़ों में ज़्यादा से ज़्यादा फल, सब्ज़ियां, मछली और नट्स या मेवे शामिल करना न भूलें. चीनी, लाल मांस और ज़्यादा फ़ैट वाली चीज़ें कम ही खाएं. फुल क्रीम वाले दूध की बजाय स्किम्ड मिल्क (जिसमें फ़ैट नहीं होता) इस्तेमाल करें.1

मेनोपॉज़ के दौरान जिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, उसकी वजह से यह मुश्किल लग सकता है. लेकिन इन टिप्स को अपनाने से आप आसानी से उम्र के इस दौर को पार कर सकती हैं. अपने वाइटल साइन (शरीर का तापमान, पल्स रेट, सांस लेने और छोड़ने की दर और ब्लड प्रेशर) को नियंत्रण में रखने की कोशिश करें. दूसरी ज़िम्मेदारियों की तरह ही अपने शरीर पर भी ध्यान दें. अगर यह दौर बहुत मुश्किल लग रहा हो तो अपने डॉक्टर से बात करें या हेल्प ग्रुप की मदद लें. जब आप इसे कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हों तो कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं लगती है!

संदर्भ:

  1. Menopause and heart disease [Internet]. [updated 2015 Jul 31; cited 2019 Jul 23]. Available from: https://www.heart.org/en/health-topics/consumer-healthcare/what-is-cardiovascular-disease/menopause-and-heart-disease.
  2. Ischemic Heart Disease [Internet]. [cited 2019 Jul 23]. Available from: https://www.nhlbi.nih.gov/health-topics/ischemic-heart-disease.
  3. Elias-Smale SE, Günal A, Maas AH. Gynecardiology: Distinct patterns of ischemic heart disease in middle-aged women. Maturitas. 2015 Jul;81(3):348-52. doi: 10.1016/j.maturitas.2015.04.012.
  4. Chiu MH, Heydari B, Batulan Z, Maarouf N, Subramanya V, Schenck-Gustafsson K, O’Brien ER. Coronary artery disease in post-menopausal women: are there appropriate means of assessment? Clin Sci (Lond). 2018 Sep 5;132(17):1937-1952. doi: 10.1042/CS20180067.

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