heart health tips
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आपने एक नया फ़ोन खरीदा है और इस बात से आप काफी उत्साहित हैं. यह फ़ोन बेहतरीन है और बहुत अच्छी तरह चल रहा है. जब आप काम करते हैं, तो यह अचानक से हैंग नहीं होता और बार-बार डिस्चार्ज होकर आपको मायूस या झुंझलाहट का शिकार नहीं बनाता. यहां बेहतरीन बात ये है कि आप एक नया फ़ोन खरीदना अफ़ोर्ड कर सकते थे, लेकिन आप ऐसा अपने दिल के साथ नहीं कर सकते! जिस तरह गैर-ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाने और लापरवाही से फ़ोन का इस्तेमाल करने पर फ़ोन के ख़राब होने की गुंजाईश बढती है, बिलकुल उसी तरह बेतरतीब ज़िंदगी गुज़ारने और नुकसानदेह लाइफ़स्टाइल पैटर्न अपनाने से आपका दिल कमज़ोर होता है और उसके काम करने की क्षमता भी घटती है.

एक कमज़ोर दिल प्रभावी ढ़ंग से खून पम्प नहीं कर सकता. और ऐसा तब भी होता है जब व्यक्ति को कंजेस्टिव हार्ट फ़ेलियर से प्रभावित होने की बात पता चलती है. इसका नतीजा क्या होता है ? इससे धीरे-धीरे ज़िंदगी जीने के तौर-तरीके पर फ़र्क पड़ता है और जीवन की गुणवत्ता में कमी आती है.

क्या ऐसा कोई तरीका है जिससे आप अपने दिल को लंबे समय तक सेहतमंद बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं?

ऐसी एक लंबी लिस्ट है जिसकी वजह से व्यक्ति के कंजेस्टिव हार्ट फ़ेलियर के गिरफ़्त में आने का जोख़िम बढ़ जाता है, लेकिन इनमें से कुछ वजहों पर काम करके और उनमें बदलाव लाकर आप अपने दिल को सेहतमंद बनाए रख सकते हैं.[1]

डायबिटीज़: मधुमेह यानी डायबिटीज़ को बीमारियों का पंडोरा बॉक्स यानी भानुमती का पिटारा भी माना जाता है क्योंकि एक बार डायबिटीज़ हो जाने पर कई और बीमारियों को आपके दरवाजे पर दस्तक देने का मौका मिल जाता है. जो लोग डायबिटीज़ से प्रभावित होते हैं, उनमें आमतौर पर लिपिड या कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ा होता है, जिससे उनके ब्लड वेसल्स यानी रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल का जमाव होता है. इससे उनके दिल के लिए खून पम्प करना एक मुश्किल काम बन जाता है.[2] नतीजतन, दिल अपना काम असरदार तरीके से करने की क्षमता खोने लगता है. जनवरी 2019 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के हिसाब से जो लोग डायबिटीज़ से प्रभावित होते हैं, उनमें हार्ट फ़ेलियर का खतरा दोगुना होता है.[3]

हो सकता है आप ये सवाल पूछना चाहें कि, “मैं इसे कैसे रोक सकता हूं?” खैर, डायबिटीज़ को रोका जा सकता है. अगर आपको लगता है कि आपको डायबिटीज़ होने का खतरा हो सकता है, तो डॉक्टर की मदद लें.[4] इससे भानुमती के पिटारे को बंद रखने में मदद मिलेगी.

मोटापा: सीधे शब्दों में कहें या घुमा फिराकर, शरीर का ज़्यादा वज़न होने से दिल का काम बढ़ जाता है. नवंबर 2018 में प्रकाशित एक समीक्षा के हिसाब से, जिन लोगों का वज़न औसत से ज़्यादा था, उनमें सेहतमंद लोगों के मुक़ाबले 10 साल पहले हार्ट फ़ेलियर होने के लक्षण दिखाई दिए! BMI में हर 1 kg/m2 का बढ़ना, व्यक्ति के हार्ट फ़ेलियर का जोख़िम 5% तक बढ़ा सकती है![5] इसके अलावा और भी कई वजह हैं, जिससे आप वज़न घटाने के लिए कमर कस सकते हैं!

बहुत ज़्यादा नमक खाना: ऐसा कौन होगा जिसे आलू के चटपटे कुरकुरे चिप्स पसंद नहीं होंगे? लेकिन ऐसी चीज़ें खाते समय हमें एहसास भी नहीं होता कि हमने कब पूरा का पूरा पैकेट खत्म कर दिया! लेकिन यहां अहम बात ये है कि इन चिप्स के साथ हम जो नमक खाते हैं, वो हमारी सेहत के लिए बहुत ख़तरनाक होता है. नमक में सोडियम होता है. शरीर में अतिरिक्त सोडियम होने का मतलब है कि शरीर में ज़्यादा पानी का ठहराव यानी वॉटर रिटेंशन, जो आपके दिल, फेफड़ों के आसपास जमा होगा और इससे पैरों में सूजन होने की समस्या भी हो सकती है.[6]

धूम्रपान: “धूम्रपान जानलेवा होता है”, ये ऐसी लाइन है जो हम बाज़ार में मिलने वाले हर सिगरेट के पैकेट पर या विज्ञापन में पढ़ते हैं. स्मोकिंग या धूम्रपान न केवल आपके फेफड़ों को प्रभावित करता है, बल्कि आपके दिल के काम करने की क्षमता पर भी असर डाल सकता है.[1] इसलिए हार्ट फ़ेलियर के ख़तरे से बचने के लिए धुम्रपान करना छोड़ दें.

फ़िज़िकल एक्टिविटी न करना: हम में से ज़्यादातर लोग डेस्क जॉब करते हैं, जिसमें घंटों तक कंप्यूटर के सामने एक ही जगह बैठे रहना पड़ता है. ज़्यादा सैलरी वाली ये नौकरियां अपने साथ डेडलाइन में काम करने का प्रेशर और हार्ट फ़ेलियर का जोख़िम साथ लेकर आती हैं.[1]  जैसे-जैसे शारीरिक गतिविधि क म होती है, कमर का साइज़ बढ़ने लगता है और फिर मोटापा अपने गिरफ़्त में लेना शुरू कर देता है और फिर इसके साथ वो सारी समस्याएं आती हैं जो मोटापे से जुड़ी होती हैं. लेकिन परेशान न हों, इससे बचना मुमकिन है. लिहाज़ा, हर घंटे कम से कम 5-10 मिनट के लिए अपनी सीट से उठें, टहलें और अपने दिल को ज़्यादा समय तक के लिए सेहतमंद बनाए रखें.

अब आप समझ गए होंगे कि आपके सोशल मीडिया पर लोगों के साथ-साथ डॉक्टर भी एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाने पर ज़ोर क्यों देते हैं. ऐसा देखा गया है कि जिस उम्र में भारतीय लोगों में हार्ट फ़ेलियर होता है, वह पश्चिमी आबादी की तुलना में 10 साल कम है.[7] इसलिए, समय आ गया है कि हम इस बारे में सोचें और सही कदम उठाएं. आप यकीनन अपनी उम्र, लिंग, फैमिली हिस्ट्री या जेनेटिक्स तो नहीं बदल सकते हैं, लेकिन आप अपनी लाइफ़स्टाइल में कुछ आसान से बदलाव कर सकते हैं और सेहतमंद दिल के लिए अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं!

संदर्भ:

  1. Congestive heart failure- are you at risk? [Internet]. [cited 2019 Jul 18]. Available from: https://www.crh.org/service-centers/heart-and-vascular-center/congestive-heart-failure-risks.
  2. Causes of heart failure [Internet]. 2019 [updated 2017 May 31; cited 2019 Jul 18]. Available from: https://www.heart.org/en/health-topics/heart-failure/causes-and-risks-for-heart-failure/causes-of-heart-failure.
  3. Kenny HC, Abel ED. Heart failure in type 2 diabetes mellitus. Circ Res. 2019 Jan 04;124(1):121-141. doi:10.1161/CIRCRESAHA.118.311371.
  4. Preventing type 2 diabetes [Internet]. [updated 2016 Nov; cited 2019 Jul 18]. Available from: https://www.niddk.nih.gov/health-information/diabetes/overview/preventing-type-2-diabetes.
  5. Csige I, Ujvárosy D, Szabó Z, Lőrincz I, Paragh G, Harangi M, Somodi S. The impact of obesity on the cardiovascular system. J Diabetes Res. 2018;2018:3407306. doi:10.1155/2018/3407306
  6. Heart failure diet: Low sodium [Internet]. [updated 2019 May 01; cited 2019 Jul 18]. Available from: https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/17072-heart-failure-diet-low-sodium.
  7. Guha S, Harikrishnan S, Ray S, Sethi R, Ramakrishnan S, Banerjee S, et al. CSI position statement on management of heart failure in India. Indian Heart J. 2018 Jul;70(Suppl 1):S1-S72. doi:10.1016/j.ihj.2018.05.003.

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