herbal diabetes medications
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कंटेंट की समीक्षा : अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरुक कर रहीं हैं.

डायबिटीज़ यानी मधुमेह से ग्रसित लगभग 1/6 से 1/3 लोग हर्बल दवाओं का सेवन करते हैं. जिनमें से आधे लोग इन्हें डॉक्टर्स द्वारा दी गई दवाओं के साथ ही लेते हैं, वो भी ज़्यादातर बग़ैर फ़ार्मासिस्ट या डॉक्टर्स की सलाह लिए.[1,2]

हालांकि, ज़रूरी नहीं कि प्राकृतिक चीज़ें हमेशा सुरक्षित ही हों, जो लोग ख़ुद ही हर्बल दवाएं इस्तेमाल करते हैं, ख़ासकर डॉक्टर्स द्वारा दी गई दवाओं के साथ, मुमकिन है कि वे कभी भी इसके गंभीर साइड इफ़ेक्ट की चपेट में आजाएं.

डायबिटीज़ में जीवन भर देखभाल और इलाज करने की ज़रूरत होती है, इस दौरान डायबिटीज़ ग्रसित व्यक्ति को कई उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकते हैं, यहाँ तक कि पूरी तरह सावधानी बरतने वाले लोगों के साथ भी ऐसा हो सकता है. ऐसे हालात से उनमें डायबिटीज़ को लेकर मायूसी बढ़ सकती और तनाव जन्म ले सकता है, और वे राहत के लिए दूसरे विकल्पों की तलाश करने लगते हैं.

आमतौर पर हम यह सोचते हैं कि हर्बल दवाएं सुरक्षित और बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के होती हैं. पिछले कुछ सालों में हर्बल दवाओं की मांग और लोकप्रियता में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है. मीडिया के ज़रिये भी इसके इस्तेमाल को कभी सीधे तौर पर, तो कभी घुमा फिराकर प्रोमोट किया जाता रहा है.[1] हर्बल दवाओं को ज़्यादा से ज़्यादा विज्ञापन के ज़रिये लोगों तक पहुंचाया जा रहा है, क्योंकि इसे ख़रीदने के लिए किसी भी तरह के प्रिस्क्रिप्शन की ज़रूरत नहीं होती, और इन दवाओं से जुड़ी कंपनियां इसी बात का फ़ायदा उठाती हैं.

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क्या आमतौर पर हर्बल सप्लीमेंट्स ख़राब होते हैं?

डायबिटीज़ में इस्तेमाल होने वाले हर्बल सप्लीमेंट्स में ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को कम करने के गुण होते हैं, जबकि यही असर एलोपैथिक और एंटी-डायबिटिक दवाओं से भी पड़ता है. हर्बल दवाओं को असरदार बनाने के लिए उनमें लहसुन,दालचीनी, जिनसेंग, एलोवेरा,गोभी का रस, अनार के फूल, शहतूत के पत्तों, ब्लूबेरी के एक्टिव कॉम्पोनेन्ट शामिल किए जाते हैं.[1,2]; और इन सभी के असर से ब्लड शुगर लेवल कम होता है. पर हर्बल होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं कि उनका साइड इफ़ेक्ट न हो.

ब्लड शुगर के लो होने पर उठाएं ये क़दम

इनके साइड इफ़ेक्ट्स क्या हैं?

हर्बल दवाएं हर बार मानकीकृत (standardized) नहीं होती, जिसकी वजह से व्यावहारिक तौर पर उसकी ख़ुराक की सही मात्रा तय कर पाना मुमकिन नहीं होता. साथ ही इन दवाओं में नुक़सान पहुँचाने वाली चीज़ें भी शामिल हो सकती हैं. लगभग 50% लोग डॉक्टर की दी गई दवाओं के साथ ही हर्बल दवाओं का सेवन करते हैं, वह भी अपने डॉक्टर को बिना ख़बर किये.[3] ऐसे में जब हर्बल दवाएं बिना डॉक्टर की जानकारी के,या हर्बल दवाओं की अनिश्चित ख़ुराक, किन्हीं दूसरी दवाओं (जैसे कि मेटाफ़ॉर्मिन) के साथ ली जाए, तो ये ब्लड ग्लूकोज़ कंसंट्रेशन को इतनी तेज़ी से घटा देती हैं कि यह अपनी न्यूनतम सीमा से भी कम हो जाता है. मिसाल के तौर पर, जब आप करेले को मेटफ़ॉर्मिन या ग्लिबिनक्लामाइड की तय की गई ख़ुराक़ के साथ लेते हैं, तो ब्लड शुगर लेवल बहुत जल्दी कम होने लगता है.[4] जो कि ख़तरनाक है, और यह दूसरी तकलीफ़ें और परेशानियां बढ़ा देता है.[1,3] जैसे- 

  • हल्का या तेज़ सरदर्द
  • बेचैन महसूस करना
  • चक्कर आना
  • बहका हुआ महसूस करना
  • बेवजह पसीना आना
  • भूख लगना
  • कान बजना

कई मामलों में व्यक्ति बेसुध होकर गिर सकता है, और हाइपोग्लाइसेमिक कोमा की स्थिति में चला जाता है. डायबिटिक व्यक्तियों पर किए एक सर्वे के मुताबिक़, हर्बल सप्लीमेंट्स इस्तेमाल करने वालों में से 70% लोगों ने लो ब्लड शुगर के लक्षण महसूस किये हैं! ख़ुराक की ज़्यादा मात्रा लेने पर कुछ दवाओं का अलग असर भी पड़ सकता है जिससे: बेचैनी, घबराहट और जिनसेंग की वज़ह से अनिद्रा,पेट में जलन, लहसुन की वज़ह से खुजली हो सकती है.[5]

कई हर्ब्स के मेडिसिलन कंपाउंड्स (औषधीय यौगिक) लीवर एंज़ाइम्स को प्रभावित करते हैं. नतीजतन एलोपैथिक डायबिटिक या नॉन डायबिटिक दवाएं जल्दी पच सकती हैं या फिर उनके पचने के समय में इज़ाफ़ा हो सकता है, जिससे दवाओं की विषाक्तता बढ़ सकती है, या उनका असर कम हो सकता है. आयुर्वेदिक हर्ब कालमेघ ओरल डायबिटीज़ ड्रग ग्लिमपीराइड या इसी तरह की और एंटी डायबिटीज़ ड्रग्स को शरीर से बाहर निकालने की गति को धीमा कर सकता है .[4]

क्या डायबिटीज़ को नियंत्रित करने में हल्दी मददगार है?

क्या मुझे हर्बल सप्लीमेंट्स नहीं लेने चाहिए ?

हर्बल दवाएं अपने आप में नुक़सानदायक नहीं होती, इनके कारगर होने के सबूत भी मिलते हैं, कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि एलोपेथिक मेडिकेशन जब हर्बल सप्लीमेंट्स के साथ ली जाए तो सही काम करती हैं. पर इस तरह की दवाएं डॉक्टर से कंसल्ट करके ही लेनी चाहिए. साथ ही हर्बल दवाओं की क्वालिटी और उनके सुरक्षा मानकों की जांच कर पाना चुनौती भरा होता है.[5] डायबिटिक के साथ ही सामान्य लोगों को भी ख़ुद से हर्बल दवाओं का इस्तेमाल करने से होने वाले ख़तरों की जानकारी होनी चाहिए. अगर आप हर्बल दवाएं लेना चाहते हैं, तो लीजिए, पर, पहले अपने डॉक्टर से इसके बारे में सलाह ज़रूर लें. अगर मुमकिन हो तो हर्बल दवाओं के स्पेशलिस्ट से संपर्क करें, जो ज़रूरत के मुताबिक़ आपकी दवाओं की ख़ुराक तय कर सकता है. आमतौर पर ख़ुद से दवाओं (एलोपैथिक या कोई और) का इस्तेमाल करना ठीक नहीं होता.

संदर्भ:

  1. Damnjanovic I, Kitic D, Stefanovic N, et al. Herbal self-medication use in patients with diabetes mellitus type 2. Turk J Med Sci. 2015;45(4):964-71. Available at: http://journals.tubitak.gov.tr/medical/issues/sag-15-45-4/sag-45-4-36-1410-60.pdf
  2. Aydin Y, ÖNDER E. Herbal self-medication use in Type 2 diabetes mellitus. Turkish journal of medical sciences. 2016;46(4):1275-6. Available at: http://journals.tubitak.gov.tr/medical/issues/sag-16-46-4/sag-46-4-50-1507-97.pdf
  3. Singh J, Singh R, Gautam CS. Self-medication with herbal remedies amongst patients of type 2 diabetes mellitus: A preliminary study. Indian J Endocrinol Metab. 2012;16(4):662. Available at: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3401782/
  4. Gupta RC, Chang D, Nammi S, Bensoussan A, Bilinski K, Roufogalis BD. Interactions between antidiabetic drugs and herbs: an overview of mechanisms of action and clinical implications. Diabetol Metab Syndr. 2017;9(1):59.
  5. Ekor M. The growing use of herbal medicines: issues relating to adverse reactions and challenges in monitoring safety. Frontiers in pharmacology. 2014;4:177. Available at:https://www.frontiersin.org/articles/10.3389/fphar.2013.00177/full

 

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