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कंटेंट की समीक्षा डायबिटीज़ केयर एक्सपर्ट ऋतुजा मोने ने की है.

होली क़रीब है. गली-मुहल्लों में होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो चुकी है. घरों में तरह-तरह की मिठाइयां बनने लगी हैं. कब कहां कैसे रंग खेलना है, इसकी प्लानिंग दोस्त-यार अभी से करने लगे हैं. आपस में मिल-जुलकर, खेलने खाने के इस त्योहार का लुत्फ़ बाकी सब तो बेफ़िक्र उठाते हैं. पर डायबिटीज़ जैसी परेशानियों से जूझ रहे लोग अक्सर अपना मन मार कर किनारा करते फ़िरते हैं. क्योंकि उन्हें अपने ब्लड शुगर लेवल के बढ़ने का डर सताने लगता है.

पर हम कह रहे हैं डायबिटीज़ है तो क्या हुआ आप भी होली के जश्न में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें.

होली का त्योहार लगभग 2 से 5 दिनों का होता है, जिसे अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है. पर सभी क्षेत्रों में होलिका दहन, मेवा-मिष्ठान और रंग खेलने की प्रथा तो शामिल होती ही है. तो चलिए हम बताते हैं, किस तरह होली का त्योहार आपकी डायबिटीज़ के लिए भी फ़ायदेमंद है.

होलिका दहन

होली का उत्सव सर्द मौसम के अंत और गर्मी के शुरुआती दिनों में मनाया जाता है. मौसम में हो रहे बदलाव के चलते कीटाणुओं की मात्रा न सिर्फ़ परिसर में बल्कि हमारे शरीर में भी बढ़ जाती है. जलती हुई होलिका के आस-पास का तापमान लगभग 50-60 डिग्री सेल्सियस होता है. ऐसे में डायबिटिक सहित बाकी लोग भी जलती होलिका के चक्कर लगाएं. इससे आपके शरीर पर मौजूद कीटाणुओं का सफाया हो जाएगा.(1)

ठंडाई 

होली के मौके पर ठंडई पीने के अपने मज़े हैं. आप भी थोड़ी पी सकते हैं (ध्यान रहे- ठंडई में ज़्यादा मीठा न हो), इससे तनाव और थकान से राहत मिलती है. जो डायबिटीज़ के लिहाज़ से अच्छा है!

गुझिया

गुझिया बनाने के लिए कई तरह के बीजों, सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जाता है. इन चीज़ों में फ़ाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, मिनरल, विटामिन, प्रोटीन और ओमेगा-3 फ़ैटी एसिड पाया जाता है.

दूध से बने मावा (खोया) में प्रोटीन, कैल्शियम और कई मिनरल होते हैं. हालांकि पूरी तरह दूध से बने होने की वजह से इसमें कैलोरी ही नहीं बल्कि कोलेस्ट्रॉल और सैचुरेटेड फ़ैट भी होता है. इसलिए मावा का इस्तेमाल थोड़ा कम करें. रवा का इस्तेमाल करें क्योंकि रवा (सूजी) में डाइटरी फ़ाइबर, प्रोटीन और कैल्शियम जैसे मिनरल पाए जाते हैं. गुझिया पसंद करने वालों से हम यही कहेंगे कि आप गुझिया को ज़्यादा मावा और शक्कर की बजाय खजूर जैसे दूसरे मीठे विकल्पों का इस्तेमाल करके बनाएं. इसे तलने के बजाय बेक करें. जिससे गुझिया खाने से आपकी सेहत पर आंच न आए.

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रंगों का मज़ा

रंग खेलने के शौक़ीन हैं, तो शौक़ से खेलें. प्राकृतिक रंगों को लगाएं भी और लगवाएं भी. बस ध्यान रहे बाहर रंग खेलने जाएं, तो वक़्त-वक़्त पर पानी पीते रहें, ब्लड शुगर की जांच करें और दवाएं लेते रहें.

वीडियो देखें: हाई ब्लड शुगर लेवल पर कैसे क़ाबू करें.

खेल है ख़ुशी

होली का पर्व अपने साथ मौज-मस्ती लाता हैं और ख़ुशी अपने आप में एक कारगर दवा होती है. सारे तनाव भूलकर जब आप आपस में मिल-जुलकर हंसते-खिलखिलाते हैं, तब आपकी डायबिटीज़ पर भी इसका अच्छा असर होता है.

क्या है ज़्यादा बेहतर, आर्टिफ़िशयल स्वीटनर या प्राकृतिक मिठास

ध्यान रहे, ज़्यादा से ज़्यादा खुश और एक्टिव रहने से सेहत पर अच्छा असर पड़ता है. इसलिए होली जैसे त्योहार के जश्न में जमकर हिस्सा लें और सेहत में सुधार लाएं. 

संदर्भ:

  1. https://festivals.awesomeji.com/holi/holi-customs.html

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