home remedies for diabetes control
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भारतीयों के खाने में रोज़ाना कई तरह के मसालों, जड़ी बूटियों का इस्तेमाल होता है. ये हमारे भोजन  का सबसे अहम हिस्सा है. हालिया स्टडी और शोध में कुछ मसालों के इस्तेमाल को डायबिटीज़ पर बेहद असरदार पाया गया. तो जानते हैं, वे कौन से मसाले हैं और उनका बेहतर ढंग से इस्तेमाल कैसे किया जाए.

हल्दी

क्या है ख़ासियत:

हल्दी में करक्यूमिनॉइड्स नाम का यौगिक पाया जाता है. ज़्यादा वज़न वाले डायबिटिक व्यक्ति पर इसका परीक्षण किया गया, जिसमें मालूम हुआ कि करक्यूमिनॉइड्स ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को कम करने में मदद करता है.(1)  करक्यूमिन के बारे में यह भी माना जाता है कि यह डायबिटिक लोगों को होनेवाली डायबिटीज़ से जुड़ी परेशानियों और जटिलताओं से बचने में मदद करता है.(2)

इस्तेमाल कैसे करें:

परिक्षण में यह कहा गया कि 300 एमजी प्यूरीफ़ाइड करक्यूमिनॉइड्स (हल्दी में पाया जाने वाला ख़ास पीला पिगमेंट) से फ़ायदेमंद असर हुआ.

बाज़ारों में मिलने वाले करक्यूमिनॉइड्स के एक्स्ट्रैक्ट लें, या सूखी हल्दी के डंठल का पाउडर बना लें, और रोज़ाना एक ग्लास गुनगुने दूध में आधा चम्मच डालकर पिएं. अगर आपको ताज़ी हल्दी का डंठल मिल सके, तो इसे धोकर छील लें. इसके एक टुकड़े के ¼ इंच को चॉप कर लें, और करी के घोल या सूप में डालें.

ध्यान रखने वाली बातें:

कुछ लोगों को हल्दी की वज़ह से मतली आ सकती है, पेट ख़राब या डायरिया हो सकता है. अगर आपको गॉलब्लैडर (पित्त), किडनी स्टोन (पथरी) या अनीमिया की शिकायत है, तो आप इसका इस्तेमाल ना करें.

तुलसी


क्या है ख़ासियत:

2012 में किए गए एक अध्ययन में डायबिटिक व्यक्तियों पर तुलसी के असर को देखने के लिए 90 दिनों तक उन्हें तुलसी की पत्ती खिलाई गई. जिसमें पाया गया कि जिस एक समूह को एंटी डायबिटिक दवा ग्लिबेंक्लामाइड  के साथ तुलसी दी गई और दूसरे समूह को सिर्फ़ ग्लिबेंक्लामाइड दवा का सेवन करवाया गया. परिणाम में पाया गया कि दूसरे समूह के मुक़ाबले, पहले समूह के लोगों का खाने के पहले, खाने के बाद का ब्लड शुगर और HbA1c का लेवल कम हो गया.(3)

इस्तेमाल कैसे करें:

रोज़ाना तुलसी के 3-4 ताज़े पत्ते चबाएं या पीसकर थोड़े पानी के साथ एक चम्मच जूस पिएं. आप आधा ग्लास गरम पानी में कुछ मिनट तक तुलसी के 4 पत्ते उबालकर इसकी चाय भी बनाकर पी सकते हैं.  

ध्यान रखने वाली बातें:

अपने घर पर उगाए गए तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल ना करें. दवा के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली तुलसी दूसरे क़िस्म की होती है. तुलसी ब्लड क्लॉटिंग को धीमा कर सकती है, इसलिए अगर किसीको ब्लीडिंग डिसऑर्डर है, तो वे इसका इस्तेमाल न करें.

डायबिटीज़ पर नियंत्रण के लिए पढ़ें: मेथी,दालचीनी, करेला,जामुन जैसे घरेलू नुस्खों के बारे में.

अदरक

क्या है ख़ासियत:

कई अध्ययनों में इस बात का पता चला है कि टाइप 2  डायबिटीज़ से ग्रसित व्यक्तियों द्वारा 8 -12 हफ़्तों तक अदरक का सेवन करने से  खाने के पहले के ब्लड ग्लूकोज़, HbA1c लेवल, इन्सुलिन प्रतिरोध और सूजन में कमी दर्ज की गई.(4, 5, 6)

कैसे इस्तेमाल करें:

स्टडीज़ में 1.5 से 3 ग्राम तक के अदरक पाउडर के इस्तेमल को फ़ायदेमंद पाया गया. बाज़ारों में सूखे अदरक का पाउडर उपलब्ध है. आप चाहें तो सूखे अदरक के डंठल का पाउडर घर पर भी  बना सकते हैं. इसका इस्तेमाल आप चाय, सूप, सब्ज़ियों और चटनियों में कर सकते हैं. अगर आपको ताज़ी अदरक पसंद है, तो इसे धोएं, चॉप करें उसके बाद इस्तेमाल करें. अदरक के डंठल या इसके  पाउडर को गरम पानी में कुछ मिनट उबालकर इसकी चाय बनाकर पिएं.

इस बात का ख़याल रखें:

इस बात का ख़्याल रखें कि आप दिन में 4 ग्राम से ज़्यादा अदरक न खाएं, ताकि आपको एसिडिटी, पेट में ख़राबी और डायरिया की शिकायत न होे. अदरक ब्लड प्रेशर को कम और यह ख़ून को पतला बना सकता है, इसलिए जिन्हें एंटीहाइपरटेंसीव्स (हाई ब्लड प्रेशर की दवा ले रहे हों) या ब्लीडिंग डिसऑर्डर की प्रॉब्लम हो वे ध्यान से इसका इस्तेमाल करें.

वीडियो देखें: ब्लड शुगर बढ़ने पर क्या करना चाहिए?

ब्लैक सीड (कालाज़ीरा/कलोंजी)

क्या है ख़ासियत:

टाइप 2 डायबिटीज़ के व्यक्तियों पर कलोंजी के कई परीक्षण किए गए. लगभग आधे परीक्षणों में पाया गया कि इसके इस्तेमाल से खाने के पहले के ब्लड ग्लूकोज़ लेवल और HbA1c स्तर में बड़े पैमाने पर कमी पाई गई.(7) अन्य परीक्षणों में यह मालूम हुआ कि टाइप 2 डायबेटिक्स द्वारा एंटी-डायबिटिक दवाओं के साथ कलोंजी का इस्तेमाल करने पर खाने के पहले के ब्लड ग्लूकोज़ लेवल और इन्सुलिन प्रतिरोध को कम करने में मदद मिलती है.(8) एक अन्य स्टडी में यह ज्ञात हुआ कि टाइप 2 के जिन डायबिटिक लोगों को 2 ग्राम कलोंजी रोज़ाना दी गई,  उनके कोलेस्‍ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और बुरे कोलेस्‍ट्रॉल के स्तर में बड़े पैमाने पर गिरावट दर्ज की गई. साथ ही अच्छे कोलेस्‍ट्रॉल में बढ़त हुई . जिससे यह मालूम हुआ कि कलोंजी डायबिटीज़ से ग्रसित लोगों में हार्ट संबंधी परेशानियों से बचाव कर सकती है.(9)

इस्तेमाल कैसे करें:

कलोंजी काे तेल और बीज दोनों ही बाज़ार में उपलब्ध है. तेल ज़्यादा असरदार होगा और कम मात्रा में इसका इस्तेमाल करना भी पर्याप्त होगा. आप इसका एक चम्मच तेल, कॉफ़ी, चाय या दही में मिलाकर पी सकते हैं. सुखाए गए बीज को सब्ज़ी या सलाद में भूनकर इस्तेमाल करें. या इसका पाउडर बनाकर एक चुटकी रसेदार (ग्रेवी) खाने में डाल दें.

ध्यान रखने वाली बातें:

कलोंजी से ब्लड क्लॉटिंग धीमा हो सकता है, इसलिए अगर आपको ब्लीडिंग डिसऑर्डर है, तो इससे बचें. इससे ब्लड प्रेशर कम और ज़्यादा नींद आ सकती हैै. याद रखें इसकी महक बहुत तेज़ होती है, इसलिए इससे स्वाद भी बदल सकता है.

हमने आपको इस आर्टिकल में जो भी बताया, वह पूरी तरह किए गए शोध पर आधारित है. अगर आप इन चीज़ों के इस्तेमाल से आये फ़र्क के अनुभव हमारे साथ साझा करेंगे, तो हमें बहुत अच्छा लगेगा.

संदर्भ:

L.X. Na, H.Z. Pan, X.L. Zhou, D.J. Sun, M.Meng, X.X. Li et al. Curcuminoids exert glucose-lowering effect in type 2 diabetes by decreasing serum free fatty acids: a double-blind, placebo-controlled trial. Mol Nutr Food Res. 2013 Sep;57(9):1569-77. Doi: 10.1002/mnfr.201200131. Epub 2012 A8ug 29.

  1. D. Zhang, M. Fu, S-H Gao, J-L Liu. Curcumin and Diabetes: A Systematic Review Evid Based Complement Alternat Med. 2013, Nov; 2013: 636053. Doi:  10.1155/2013/636053
  2. G. Somasundaram, K. Manimekalai, K.J. Salwe, J. Pandiamunian. Evaluation Of The Antidiabetic Effect Of Ocimum Sanctum In Type 2 Diabetic Patients. International Journal of Life Science and Pharma Research. Jul-Sept 2012; 2(3); P 75-81 Available online at http://www.ijlpr.com/admin/php/uploads/95_pdf.pdf
  3. T. Arabou, N. Aryaeian, M. Valizadeh, F. Sharifi, A. Hosseini, M. Djalali. The effect of ginger consumption on glycemic status, lipid profile and some inflammatory markers in patients with type 2 diabetes mellitus. Int J Food Sci Nutr. 2014 Jun; 65(4): 515-20. Doi: 10.3109/09637486.2014.880671. Epub 2014 Feb 4.
  4. N. Khandouzi, F. Shidfar, A. Rajab, T. Rahideh, P. Hosseini, M.M. Taheri. The effects of ginger on fasting blood sugar, hemoglobin a1c, apolipoprotein B, apolipoprotein a-I and malondialdehyde in type 2 diabetic patients. Iran J Pharm Res. 2015 Winter; 14(1):131-40. Available online at https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/25561919
  5. F. Shidfar, A. Rajab, T. Rahideh, N. Khandouzi, S. Hosseini, S. Shidfar. The effect of ginger (Zingiber officinale) on glycemic markers in patients with type 2 diabetes. J Complement Integr Med. 2015 Jun; 12(2):165-70. Doi: 10.1515/jcim-2014-0021.
  6. A. Mohtashami, M.H. Entezari. Effects of Nigella sativa supplementation on blood parameters and anthropometric indices in adults: A systematic review on clinical trials. J Res Med Sci. 2016 Jan 28; 21:3. eCollection 2016. Available online at https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/27904549
  7. H. Kaatabi, A.O. Bamosa, A. Badar, A. Al-Elq, A. Hozaifa, F. Lebda et al. Nigella sativa improves glycemic control and ameliorates oxidative stress in patients with type 2 diabetes mellitus: placebo controlled participant blinded clinical trial.  PLoS One. 2015 Feb 23;10(2): e0113486. doi: 10.1371/journal.pone.0113486. eCollection 2015.
  8. H. Kaatabi, A.O. Bamosa, F. Lebda, A. Al-Elq, A. Al-Sultan. Favorable impact of Nigella sativa seeds on lipid profile in type 2 diabetic patients. J Family Community Med. 2012 Sep;19(3):155-61. doi: 10.4103/2230-8229.102311.

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