how to tell children about your diabetes
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डायबिटीज़ यानी मधुमेह को देखभाल के ज़रिये नियंत्रित किया जा सकता है. लेकिन तब क्या करेंगे, जब बच्चे आपकी लाइफ़स्टाइल में आए बदलावों पर ग़ौर कर आपसे सवाल करने लग जाएं? हो सकता है कि वो आपके अलग व्यवहार, खाने की कुछ चीज़ों से बचने की आदतों, ग्लूकोमीटर या इन्सुलिन के इस्तेमाल को लेकर भ्रमित हो जाएं. इसलिए हम आपको कुछ ऐसे तरीक़े बता रहे हैं जिनकी मदद से आप बच्चों को, उन्हें डराए, भ्रमित और परेशान किये बिना उनसे बात कर सकते हैं.

डायबिटीज़ होने और उसके साथ जीने के दौरान आपके बच्चे, आपको कुछ ऐसी चीज़ें करते हुए देखते हैं, जो आमतौर पर सामान्य लोगों से अलग होती हैं.  

यह बातें नैचुरली आपके बच्चे के मन में जिज्ञासा पैदा करती हैं, जिसके बाद वो आपसे इससे जुड़े सवाल भी कर सकते हैं. ऐसे में माँ-बाप के तौर पर आपके लिए यह समझाना काफ़ी मुश्किल हो सकता है कि कैसे उनके सवालों के जवाब भी दिए जाएं और वो भी उन्हें डराए बिना.

इन सुझावों के ज़रिये, आप समझदारी के साथ अपनी डायबिटीज़ की स्थिति को उनकी उम्र के लिहाज़ से समझा सकते हैं.

1. उन्हें आप सामने से सवाल करने दें:

यह मुमकिन नहीं है कि आपके बच्चे आपको समय से पहले ही सूचित करें, कि वो आपके साथ बैठकर कुछ ज़रूरी बात करना चाहते हैं. डायबिटीज़ से जुड़ा विषय बच्चों से हो रही आपकी बातचीत में अचानक आ सकता है. जब आप इसकी काफ़ी कम उम्मीद कर रहे होते हैं, और इसमें कुछ बुरा भी नहीं है.

कन्सलटिंग होम्योपैथिक साइकेट्रिस्ट, काउंसलर और रिग्रेशन थेरेपिस्ट, डॉ दीनल वोरा, जो चाइल्ड मेंटल हेल्थ की विशेषज्ञ भी है, कहती हैं, “आप ख़ुद से इस विषय पर बात की शुरुआत न करें, वरना उन्हें ये लगेगा कि आपने उन्हें जितना बताया है, मामला उससे ज़्यादा गंभीर है. साथ ही सवालों के तैयार रहें, इसे बड़ा मुद्दा न बनाएं”

2. शान्ति से काम लें:

हां. ये बात आपको थोड़ा दहला सकती है कि किसी दिन आपका बच्चा आपसे पूछ ले कि “क्या आप मरने वाले हैं?” या इसी तरह के कोई और मुश्किल सवाल. ऐसे में इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि बच्चों की उम्र क्या है, उनके सवालों को हंसी में टालना और उनकी फ़िक्र को नज़रंदाज़ करना उन्हें किसी तरह की तसल्ली नहीं देगा. इसलिए ऐसा करने के बजाय, आप उनके सवालों का शांति से जबाब दें. साथ ही उन्हें अपने दिल की बातों को कहने का मौका दें और जानें कि उन्हें कौन सी बातें परेशान कर रही हैं.

3. ख़ास बातों पर ही केन्द्रित रहें: 

एक बार आपके बच्चे आपसे खुलकर बात करने लगें, तो उनसे जानें कि उनके मन में जो भी चल रहा है, वह कैसे आया, और आप ध्यान दें कि उन्होंने मिली जानकारियों को किस तरह से लिया है. डॉ वोरा अपनी बात दोहराते हुए कहती हैं कि आप उनकी गंभीर चिंताओं को ख़ास तरीक़े संबोधित कर सकते हैं, और अगर वो आपकी बातों से संतुष्ट नज़र आएं, तो बाक़ी चीज़ों जानें दें.

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4. अपनी बातों को सहज और हल्का रखें:

हो सकता है कि जब आप मधुमेह यानी डायबिटीज़ के बारे में बताना शुरू करें, तो बच्चे को बताते- बताते रौ में बहने लगें और विस्तार से बताने लग जाएं, लेकिन  बच्चों को इस मुद्दे से जुड़ी बहुत ज़्यादा जानकारी देने से बचें. इसे सहज रखें और सिर्फ़ उन्हीं तथ्यों को बताएं, जिसे वो संभाल सकें. कुछ बातों को बताने के बाद आप धीरे से उनसे स्कूल के होमवर्क, दोस्तों से जुड़ी दूसरी बातें करनी शुरू कर दें.

5. झूठ बोलने या बात टालने से बचें:

अगर आप डायबिटीज़ से जुड़ी अपनी परेशानी के बारे में बताने में सहज नहीं महसूस करते, तो झूठ का सहारा लेना या बात बदलना आपके बच्चे को ख़तरे का एहसास दिलाएगा. उन्हें लगने लगेगा कि आप उनसे कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, और तब वो अपने मन के सवाल का जवाब अपनी कल्पना या इससे भी बुरे तरीक़े, जैसे अपने साथियों के ज़रिये मिली ग़लत जानकारियों से ढूंढने लगेंगे.

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6. औरों को भी शामिल करें:

बातचीत के दौरान अपने जीवनसाथी या ग्रैंडपैरेंट्स को शामिल करने से वे डायबिटीज़ से जुड़े आनुवंशिकता यानी हेरेडिटी के पक्ष को भी समझा सकेंगे. इसलिए अगर आपको मुश्किल लगे, तो बच्चों को समझाने की पूरी ज़िम्मेदारी अकेले ना लें, बल्कि अपनों के साथ साझा कर लें.

सबसे अच्छा तरीक़ा ये भी हो सकता है कि आप अपने बच्चों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय गुज़ारने का मौक़ा ढूंढें, जिससे वो आश्वस्त हों और ज़्यादा परेशान न हो.

किसे और क्यों पता होनी चाहिए आपके डायबिटिक होने की बात?

बच्चों की भावनात्मक समझ बहुत ही अच्छी होती है. वे बड़ी ही आसानी से चिंता या हताशा की स्थिति को समझ जाते हैं. अगर आप भी डायबिटीज़ की वजह से इनमें से किसी भी एहसास या स्थिति से परेशान हो रहे हैं, तो ये मदद लेना का वाजिब समय है. हम आपकी मदद के लिए एक्सपर्ट्स और सलाहकार के साथ हाज़िर हैं. जिससे आप ना सिर्फ़ अपने मधुमेह से जुड़ी परेशानियों को क़ाबू में कर सकेंगे, बल्कि डायबिटीज़ को रिवर्स भी कर सकते हैं.

कंटेंट की समीक्षा अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

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Disclaimer: The information provided in this article is for patient awareness only. This has been written by qualified experts and scientifically validated by them. Wellthy or it’s partners/subsidiaries shall not be responsible for the content provided by these experts. This article is not a replacement for a doctor’s advice. Please always check with your doctor before trying anything suggested on this article/website.