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ज़िंक एक ज़रूरी ट्रेस पोषक तत्व (ट्रेस एलिमेंट) है. अच्छी सेहत के लिए शरीर को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ज़िंक की ज़रूरत पड़ती रहती है. अगर आपके शरीर में इसकी मात्रा बहुत ज़्यादा या बहुत कम है, तो यह कई तरह के असंतुलन पैदा कर सकता है, जैसे ब्लड प्रेशर के सामान्य स्तर को काबू में न रख पाना.

ज़िंक और हाई ब्लड प्रेशर

अगर गुर्दे की बात की जाए, तो  यह एक ऐसी प्रक्रिया या मेकनिज़म है जिसमें गुर्दे पेशाब के ज़रिए सोडियम को शरीर से बाहर निकाल देते हैं. यह ब्लड प्रेशर पर क़ाबू रखने में इसकी भूमिका अहम होती है. ऐसी कई चीज़ें हैं, जो इस प्रक्रिया पर असर डाल सकती हैं जिसमें गुर्दे शरीर से सोडियम को बाहर निकालने या रोकने के काम करते हैं. हाल की कुछ जांचों से पता चलता है कि ज़िंक की कमी, गुर्दे में सोडियम ट्रांसपोर्ट चैनल के प्रबंधन पर असर डाल सकती है जिसके नतीजतन हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन हो सकता है. कई स्टडीज़ से मालूम होता है कि ज़िंक की कमी और टाइप 2 डाइबिटीज़ जैसी लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के बीच संबंध है. यह भी साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि ज़िंक की कमी और डाइबिटीज़ के मरीज़ों में हाई ब्लड प्रेशर होने के जोखिम के बीच भी संबंध है.

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ज़िंक के बारे में सुझाव

शरीर में ज़िंक का ज़्यादा या कम होना, दोनों ही बातें आपके ब्लड प्रेशर पर बुरा असर डाल सकती हैं. ऐसे में, अपने शरीर में ज़िंक के स्तर के संतुलन को बनाए रखने के लिए अपने खाने-पीने आदतों में बदलाव करना और ज़िंक वाली चीज़ों की सही खुराक लेना ज़रूरी है.

कई तरह के ज़िंक सप्लिमेंट्स मौजूद हैं. हालांकि बड़ों को हर दिन एलिमेंट फ़ॉर्म या क़ुदरती रूप में 15-30 मिलीग्राम तक ज़िंक लेने का सुझाव दिया जाता है. एक दिन में 40 मिलीग्राम से ज़्यादा ज़िंक नहीं लेना चाहिए. हर व्यक्ति में ज़िंक की ज़रूरी मात्रा उसकी उम्र के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. गर्भवती होने या कोई दूसरी बीमारी होने जैसी बातें भी ज़िंक की ज़रूरत पर असर डाल सकती हैं. हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को ज़िंक सप्लिमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

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हाई ब्लड प्रेशर पर क़ुदरती ढंग से लगाम कसने के लिए आप अपने खाने में ज़िंक से भरपूर चीज़ों को शामिल कर सकते हैं. जैसे कि कद्दू के बीज, दही, भुना हुआ काजू, सीपदार मछली या शेलफ़िश, दाल और चना, और डार्क चॉकलेट. इन चीज़ों को आप अपने रोज़मर्रा के खानपान में शामिल कर सकते हैं.

संदर्भ:

  1. Clintoria R. Williams, Monisha Mistry, Aswathy M. Cheriyan, Jasmine M. Williams, Meagan K. Naraine, Carla L. Ellis, Rickta Mallick, Abinash C. Mistry, Jennifer L. Gooch, Benjamin Ko, Hui Cai, Robert S. Hoover. American Journal of Physiology – Renal Physiology 16 Jan 2019 DOI: 10.1152 / ajprenal.00487.2018
  2. Gupta, M., Mahajan, V.K., Mehta, K.S. and Chauhan, P.S., 2014. Zinc therapy in dermatology: a review. Dermatology research and practice2014.
  3. Roohani, N., Hurrell, R., Kelishadi, R. and Schulin, R., 2013. Zinc and its importance for human health: An integrative review. Journal of research in medical sciences: the official journal of Isfahan University of Medical Sciences18(2), p.144.
  4. https://ods.od.nih.gov/factsheets/Zinc-HealthProfessional/ Accessed: 19th Aug 2019

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