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आमतौर पर तनाव के माहौल या बहुत ज़्यादा शारीरिक मेहनत करने के दौरान आपके ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव होता है. लेकिन आपका ब्लड प्रेशर अगर आराम करने या बिना किसी तनाव के भी बढ़ा रहता है, तो मुमकिन है कि आप हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के शिकार हैं. लंबे समय से धमनियों पर बने ज़्यादा दबाव को हाइपरटेंशन के नाम से जाना जाता है. यह विश्व में सबसे ज़्यादा होने वाली बीमारियों में से एक है.  

हाइपरटेंशन के होने की वजहों को ध्यान में रखते हुए इसे प्राइमरी (प्राथमिक) और सेकंडरी इन दो भागों में बांटा गया है.

प्राइमरी हाइपरटेंशन  

ज़्यादातर मामलो में,हाइपरटेंशन की वजह मालूम हो पाती या काफ़ी मुश्किल हो जाता है. आमतौर पर, इसे प्राइमरी हाइपरटेंशन के तौर पर जाना जाता है. ये रहीं कुछ वजहें:

 1. पारिवारिक इतिहास और जीन: स्टडीज़ के मुताबिक़ जीन से आपके ब्लड प्रेशर लेवल पर 30-50% तक असर होता है. अगर आपके माता-पिता, दादा-दादी या भाई बहन को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है, तो आपको भी इसके होने का ख़तरा है.

2. उम्र और लिंग: आर्टरीज़ ब्लड प्रेशर का ख़तरा पुरुषों में पहले से होता है. एस्ट्रोज़न से  सुरक्षा मिलने वाले असर की वजह से मां बनने की उम्र में महिलाओं को हाइपरटेंशन का ख़तरा कम होता है. मीनोपॉज़ वाली महिलाओं में हाइपरटेंशन का ख़तरा पुरुषों के ही सामान होता है. उम्र का बढ़ना भी हाइपरटेंशन की एक वजह होती है. उम्र के साथ आर्टरीज़ सख्त हो जाती है, जिससे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर का ख़तरा बढ़ जाता है.

3. तनाव: स्टडीज़ में दिमाग़ी तनाव और हाइपरटेंशन के बीच गहरा रिश्ता पाया गया. लंबे समय तक या पुराने मानसिक तनाव से भी कुछ मामलों में हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है.

4. मोटापा: चूंकि, मोटापा शरीर की बनावट को प्रभावित करता है, इसलिए इससे अंगों में भी बदलाव या बुरा असर होता है. स्टडीज़ के मुताबिक़ मोटापे से प्राइमरी हाई ब्लड प्रेशर के ख़तरे में 65-78% तक इज़ाफा होता है.

5. फिज़िकल एक्टिविटी की कमी: यह ज़रूरी है कि सेहतमंद रहने के लिए वयस्क लोग रोज़ाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज़ करें. हाइपरटेंशन सहित कई शारीरिक परेशानियों के लिए काफ़ी हद तक सुस्त लाइफ़स्टाइल ज़िम्मेदार होती है.

6. हॉर्मोन में उतार-चढ़ाव: हॉर्मोन का संतुलन बिगड़ने से हाइपटेंशन की परेशानी हो सकती है. इसीलिए मीनोपॉज़ के बाद या प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर का ख़तरा रहता है. ज़्यादा एक्टिव या कम एक्टिव थायराइड, एल्डोस्टीरोन या कुशिंग सिंड्रोम लेवल का बढ़ना भी इसके लिए ज़िम्मेदार हो सकते है.

सेकंडरी हाइपरटेंशन

दूसरी बीमारियों और उनकी वजहों से होने वाले हाई ब्लड प्रेशर को सेकंडरी हाइपरटेंशन कहा जाता है, जिसमें सुधार किया जा सकता है. क़रीब 5-10% वयस्क सेकंडरी हाइपरटेंशन के शिकार होते हैं. ये रहीं इसके होने की कुछ वजहें:

1. लंबे समय तक चलने वाली बीमारियां: किडनी की बीमारी, फाइब्रोमस्क्यूलर डिसप्लेसिया, रेनल आर्टरी स्टेनोसिस, बड़ी धमनी (आर्टरी) में सिकुड़न, थायराइड की परेशानी और स्लीप एपनिया जैसी कुछ बीमारियां सेकंडरी हाइपरटेंशन के लिए ज़िम्मेदार होती हैं.

2. प्रेगनेंसी: प्रेगनेंसी के दौरान हाइपरटेंशन का होना काफ़ी आम है. इसके लिए हॉर्मोन में होने उतार-चढ़ाव को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है, क्योंकि यह प्रेगनेंसी के दौरान ही होती है. इसे सेकंडरी हाइपरटेंशन की श्रेणी में गिना जाता है.

3. दवाएं: कुछ गर्भ निरोधक दवाओं , NSAIDs, स्टेरॉयड, जैसे शराब और एंटीडिप्रेसेंट जैसी हर्बल नुस्खों आदि से भी हाई ब्लड प्रेशर के आसार बढ़ा जाते हैं. कोकीन, हेरोइन या एम्फ़ैटेमिन जैसी मज़े के लिए ली जाने वाली दवाओं से ब्लड प्रेशर में अचानक उतार-चढ़ाव होता है. इन वजहों से कम उम्र में ही गंभीर हाइपरटेंशन भी हो सकता है.

4. लाइफ़स्टाइल: आपकी लाइफ़स्टाइल और वातावरण के चलते कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें से हाइपरटेंशन एक है. अपर्याप्त फल और सब्ज़ी युक्त नमक से भरा खाना; सुस्त लाइफ़स्टाइल; स्मोकिंग; शराब पीना और फिज़िकल एक्टिविटी की कमी से सेकंडरी हाइपरटेंशन का ख़तरा रहता है. लाइफ़स्टाइल के इन पहलुओं में बदलाव करके हाइपरटेंशन पर क़ाबू किया जा सकता है.

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