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हाइपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज न होने पर ये हार्ट अटैक या स्ट्रोक की वजह बन सकती है. हाई ब्लड प्रेशर के कारण इरेक्शन की समस्या सहित इससे जुड़ी हुई दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं. हमने नई दिल्ली में मौजूद सरोज सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर चंद्रशेखर से बात की और पूछा कि क्या हाइपरटेंशन और इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन के बीच कोई संबंध है. यहां उनके इनपुट पेश हैं:

पुरुषों के लिए, हाइपरटेंशन और यौन से जुड़ी समस्याओं के बीच गहरा संबंध होता है.  हाइपरटेंशन के बढ़ने की संभावना उम्र के साथ बढ़ती है. यह असमान्य लिपिड लेवल वाले और धुम्रपान करने वाले लोगों में भी ज़्यादा होता है. जब हाइपरटेंशन वाले लोगों में डायबिटीज़, मेटाबोलीक सिंड्रोम, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया या कोरोनरी वेसल (कोरोनरी वाहिका) में बड़े बदलाव एक साथ होने लगते हैं, तो इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन की समस्या भी बार-बार नज़र आती है.

हाई ब्लड प्रेशर की वजह से इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन कैसे होता है?

समय के साथ हाई ब्लड प्रेशर से ब्लड वेसल की लाइनिंग को नुकसान पहुंचता है और इससे धमनियां सख्त और पतली हो जाती हैं जिससे खून का बहाव कम हो जाता है. इससे पूरे शरीर में खून के बहाव में कमी आती है और इसलिए लिंग की ओर कम खून बहता है. जिसकी वजह से सही समय पर इरेक्शन होना और इसे बनाए रखना मुश्किल हो जाता है.

एक बार भी इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन की समस्या होने से पुरुष परेशान हो जाते हैं और उनके यौन इच्छा में कमी आती है. हाइपरटेंशन से स्खलन की समस्या भी हो सकती है और आम तौर पर इससे यौन की तरफ़ रुझान कम होने लगता है. हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों में टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम होता है, जो कि यौन उत्तेजना बढ़ाने वाला सबसे अहम हॉर्मोन है.

इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन का संबंध कुछ एंटीहाइपरटेन्सिव दवाओं को लेने से भी जुड़ा है, ख़ास तौर पर जो दवाएं बीटा-ब्लॉकर्स और ड्युरेटिक्स ग्रुप से जुड़े हैं. ज़िंक एक ऐसा अहम मिनरल है जो शरीर में टेस्टोस्टेरोन के लेवल को बनाए रखने के लिए ज़रूरी होता है. ड्युरेटिक्स ज़िंक के लेवल को कम करते हैं इसलिए इनके इस्तेमाल से सेक्स की तरफ़ रुझान कम हो सकता है. इससे लिंग की ओर खून का बहाव भी कम हो सकता है और जिससे लिंग के इरेक्ट होने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. वहीं दूसरी ओर बीटा-ब्लॉकर्स नर्व इम्पल्स (तंत्रिका आवेग) को प्रभावित कर सकते हैं जिससे इरेक्शन पर असर पड़ता है.

इस समस्या से निपटने का सबसे बेहतरीन तरीका है अपने डॉक्टर से मिले और उनसे इस समस्या के बारे में बात करें. आपके डॉक्टर हालात को और खराब होने से पहले सही इलाज के ज़रिए आपकी मदद कर सकते हैं.

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