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हम सभी हाइपरटेंशनया हाई ब्लड प्रेशर‘ इन शब्दों का नाम सुनते रहते हैं, वैसे तो यह बड़े पैमाने पर ज़ाहिर मेडिकल कंडीशन है, लेकिन फिर भी लोगों में इससे जुड़ी कई गलतफ़हमियां हैं, जिन्हें जानकर आपको हैरत हो सकती है.

हाइपरटेंशन से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी के ख़राब होने का ख़तरा बढ़ जाता है. इसलिए यह ज़रूरी है कि इससे जुड़ी गलतफ़हमियों को दूर किया जाए. जानकारी होने से ख़ुद की और अपने क़रीबीयों की ज़िंदगी बचाई जा सकती है..

हाइपरटेंशन क्या है?

ब्लड प्रेशर एक पैमाना है, जिससे आपके ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) के वॉल पर बहने वाले ख़ून के प्रवाह को मापा जाता है. अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है, तो इसका मतलब है कि आपका ख़ून आपकी धमनियों के वॉल पर ज़्यादा दबाव डाल रहा है. वह स्थिति जिसमें आपका ब्लड प्रेशर लेवल लगातार बढ़ा हुआ रहता है, उसे हाइपरटेंशन कहते हैं.

ये रहीं हाइपरटेंशन से जुड़ी 9 ग़लतफ़हमियां

गलतफ़हमी 1: हाई ब्लड प्रेशर के होने पर, आपको पता चल जाएगा क्योंकि आपको इसके लक्षणों का अनुभव होगा.

लोगों के बीच हाइपरटेंशन से जुड़ी यह एक गलत धारणा है. क्योंकि डॉक्टर हाइपरटेंशन को शांत, नहीं नज़र आने वाले हत्यारे के तौर पर संबोधित करते हैं. ज़्यादातर मामलों में, हाइपरटेंशन कई सालों में धीरे-धीरे होता है और इसके कोई भी लक्षण नज़र नहीं आते हैं या शरीर से कोई चेतावनी नहीं मिलती. इसलिए शुरुआत में ही इसे पहचान लेना ज़रूरी होता है और यही वजह है कि आपको अपने डॉक्टर से बार-बार बाक़ायदा ब्लड प्रेशर की जांच करावानी चाहिए.

गलतफ़हमी 2: हाइपरटेंशन को रोका नहीं जा सकता

अफ़सोस की बात है कि, हाइपरटेंशन का कोई जड़-तोड़ इलाज नहीं है. लेकिन अगर आपको इसका ख़तरा है, तो सेहतमंद लाइफ़स्टाइल के ज़रिए आप इसे बेहतर ढंग से मैनेज कर सकते हैं और यहां तक कि इसे रोक भी सकते हैं. इस संबंध में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने कुछ सुझाव दिए हैं, जिनमें ये शामिल हैं[1]:

  • ऐसे संतुलित डायट को अपनाना, जिसमें कम नमक और कम कोलेस्ट्रॉल वाली खाने की चीज़ें शामिल हों
  • रोज़ाना फ़िज़िकल एक्सरसाइज़ करना
  • धूम्रपान से परहेज करना
  • कम से कम या मुमकिन हो तो बिलकुल भी शराब न पीना 

गलतफ़हमी 3: अगर आपके परिवार में हाइपरटेंशन की बीमारी हमेशा से रही हो और आपको ये विरासत में मिली है, तो आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते.

हो सकता है आप विरासत में मिलने वाले हाइपरटेंशन से न बचें लेकिन आप एक सेहतमंद लाइफ़स्टाइल अपनाकर इसे यक़ीनन मैनेज कर सकते हैं. अपने ब्लड प्रेशर को सही रेंज में बनाए रखने के लिए ऊपर बताई गई बातों को अपने रोज़ाना की ज़िंदगी में शामिल करें.

गलतफ़हमी 4: अगर आप अपने खाने में ज़्यादा नमक नहीं डालते हैं, तो आपको इसका ख़तरा नहीं होगा

कई बार आपके नमक का सेवन खाने में इस्तेमाल होने वाले नमक से नहीं बढ़ता बल्कि उन प्रोसेस किए गए या डिब्बा बंद खाने की चीज़ों से बढ़ता है, जिसे बनाते समय उसमें नमक डाला गया हो. सामान ख़रीदते समय यह जानने के लिए कि उसमें नमक है या नहीं, खाने के पैकेट पर लिखे गए सोडियमया ‘Na’ जैसे शब्दों की तलाश करें.

गलतफ़हमी 5: अगर आप धुम्रपान नहीं करते और आपका वज़न ज़्यादा नहीं है, तो आपको हाई ब्लड प्रेशर नहीं होगा

धुम्रपान करना और ज़्यादा वज़न होना हाइपरटेंशन के लिए ख़तरे की वजह हैं. अगर आप धुम्रपान नहीं करते और आपका वज़न सेहतमंद रेंज में है, तो हो सकता है कि आप मान लें कि आपको हाई ब्लड प्रेशर का कोई ख़तरा नहीं है. लेकिन यह सच नहीं है. दूसरी वजहें जैसे जेनेटिक कारणों और बिना एक्टिविटी वाली लाइफ़स्टाइल आदि के चलते हाइपरटेंशन के लिए ज़िम्मेदार हो सकती हैं.

गलतफ़हमी 6: अगर आपकी उम्र कम है, तो आपको हाइपरटेंशन के बारे में फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है.

कई लोग ऐसा सोचते हैं कि हाइपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में आपको सिर्फ़ 40 साल के बाद ही चिंता करने की ज़रूरत पड़ेगी. हालांकि, ये सच है कि उम्र के साथ इसका ख़तरा बढ़ता है, लेकिन हाइपरटेंशन किसी भी उम्र, यहां तक कि बच्चों को भी हो सकता है.[2]

गलतफ़हमी 7: आपका ब्लड प्रेशर सिर्फ़ डॉक्टर ही जांच सकते हैं

आप न केवल अपने घर में ब्लड प्रेशर की जांच कर सकते हैं, बल्कि यह ज़रूरी है कि आप लगातार जांच करें, ख़ासकर तब, जब आप हाइपरटेंशन के शिकार हों, किसी अच्छे डिवाइस से अपने ब्लड प्रेशर लेवल की लगातार जांच करते रहने से आप अपने पैटर्न और बदलाव के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं और आपको पता चलता है कि आपकी लाइफ़स्टाइल, आदतों और दवाइयों का इस पर क्या असर हो रहा है.

गलतफ़हमी 8: दवाओं की मदद से ब्लड प्रेशर के कम हो जाने पर आप इसका सेवन बंद कर सकते हैं या इसकी ख़ुराक को एडजस्ट कर सकते हैं

डॉक्टर की सलाह के बिना ख़ुद ही अपनी दवाओं से जुड़े फ़ैसले लेना ठीक नहीं. अपनी दवाओं को बदलने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से बात करें. अगर आपका हाइपरटेंशन गंभीर है, तो आपके डॉक्टर आपको लंबे समय के लिए दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं.

गलतफ़हमी 9: अगर आपको केवल ‘वाईट कोट’ हाइपरटेंशन का अनुभव होता है, तो इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं

कुछ मामलों में हो सकता है कि आप अपने डॉक्टर से मिलने के समय ख़ासतौर पर तनाव में आ जाएं, जिसकी वजह से आपका हाई ब्लड प्रेशर लेवल पढ़ जाए, जबकि आमतौर पर आपका ब्लड प्रेशर लेवल सामान्य ही रहता हो. इसे वाईट कोट हाइपरटेंशन कहते हैं. यह फ़िक्र की बात है, क्योंकि वाईट कोट हाइपरटेंशन से प्रभावित लोगों में आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर होने का ख़तरा काफ़ी ज़्यादा होता है.[2]

 

संदर्भ:

  1. American Heart Association. Changes You Can Make to Manage High Blood Pressure. Available at: https://www.heart.org/en/health-topics/high-blood-pressure/changes-you-can-make-to-manage-high-blood-pressure [Accessed 18 April 2019].
  2. Rush University Medical Center. Myths About High Blood Pressure. Available at: https://www.rush.edu/health-wellness/discover-health/high-blood-pressure-myths [Accessed 19 April 2019].

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