indians diabetes risk factors
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सच कहें तो हिंदुस्तान में डायबिटीज़ के हालात अच्छे नहीं हैं. हममें से ज़्यादातर अगर ख़ुद इससे प्रभावित न भी हों, तो भी किसी ना किसी व्यक्ति को जानते ही होंगे जिसे डायबिटीज़ हो.

अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज़ फ़ेडरेशन की साल 2017 में भारत को लेकर जारी रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में 7.4 करोड़ लोगों को डायबिटीज़ की शिकायत है.[1] देश के क़रीब 10.4 फ़ीसदी व्यस्क इससे प्रभावित हैं. अनुमान के मुताबिक़ साल 2035 तक भारत में लगभग 10.9 करोड़ आबादी डायबिटीज़ का सामना कर रही होगी.[2]

सवाल ये है कि भारतीय इतने व्यापक स्तर पर क्यों डायबिटीज़ का शिकार हो रहे हैं? इसके पीछे आपके वातावरण, जीवनशैली और जेनेटिक (आनुवांशिक) से लेकर आपकी संजातीय यानी एथनिक पृष्ठभूमि से जुड़ी वजहें हो सकती हैं.[3]

1. जेनेटिक या एथनिक फ़ैक्टर

भारतीयों में जो जीन्स पाए जाते हैं वो डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ाते हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक़ डायबिटीज़ में हमारी जातीय पृष्ठभूमि (एथनिसिटी) की भी भूमिका है.

ये एक ऐसा पहलू है जो हम सभी को परेशान कर सकता है, क्योंकि हम अपने जीन्स की बनावट नहीं बदल सकते. कई शोध साबित कर चुके हैं कि दुनिया भर में रहने वाले भारतीयों के बीच डायबिटीज़ का प्रतिशत ज़्यादा है.[4,5]  

2. इन्सुलिन को लेकर प्रतिरोध बढ़ना

ये एक और ऐसा पहलू है जिसपर हमारा वश नहीं. भारतीयों में इन्सुलिन के प्रतिरोध की क्षमता ज़्यादा होती है. दूसरे लफ्ज़ों में, हमारे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन नामक हार्मोन के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं देती. वहीं यूरोपीय आबादी से तुलना करें तो कार्बोहाइड्रेट खाने के बाद भारतीय मूल के लोगों का ब्लड इंसुलिन लेवल भी तेज़ी से बढ़ता है.[6]

पैदा होने के वक्त कम वज़न भी भारतीयों के बीच इन्सुलिन के प्रति प्रतिरोध बढ़ाता है. बच्चे पैदा तो कम वज़न के साथ होते हैं, लेकिन किशोर होते-होते मोटे होते जाते हैं.ऐसा माना जाता है कि इससे टाइप-2 किस्म की डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ता है.[7] 

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3. जीवनशैली में बदलाव

लेकिन जीन्स और इन्सुलिन के प्रति प्रतिरोध क्षमता ही दोषी नहीं हैं. डायबिटीज़ के पीछे ऐसी वजहें भी हैं जिन्हें हम चाहें तो बदल सकते हैं.

सामाजिक-आर्थिक तरक्की और शहरीकरण ने हमारे आहार को सुधारा है और हम ज़्यादा जी रहे हैं. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी तेज़ी से बदली है. इसी के साथ बदली हैं हमारी खाने  की आदतें.

परंपरागत तौर पर हमारे भोजन में चावल, आटे और बाजरे की मात्रा ज़्यादा होती थी और पर्याप्त फ़ाइबर शामिल होता था. अब हमारी रसोई तक यही चीज़ें रिफ़ाइन्ड होकर पहुंचती हैं. हम फ़ैट, शुगर और कैलोरी से भरी चीज़ें खाते हैं. लेकिन शारीरिक मेहनत घटी है. मानसिक तनाव और मोटापा भी बढ़ा है. यही चीज़ें इन्सुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता घटाती हैं और डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ाती हैं.[8]

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4. मोटापा

बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) से शरीर में वसा यानी फैट का पता चलता है. ज़्यादा बीएमआई का मतलब शुगर के बढ़ने की ज़्यादा आशंका.

बीएमआई के किसी भी स्तर पर भारतीयों में अपेक्षाकृत ज़्यादा बॉडी मास मिलता है, ख़ासकर पेट के इर्द-गिर्द. बॉडी मास ज़्यादा होने और इन्सुलिन के प्रति ज़्यादा प्रतिरोध होने के चलते भारतीयों में डायबिटीज़ होने का ज़्यादा जोखिम होता है. [9]

5. शारीरिक सुस्ती

शारीरिक मेहनत का अभाव भी डायबिटीज़ को बढ़ाने की एक वजह हो सकती है. सुस्त जीवनशैली वाले लोगों में डायबिटीज़ ज़्यादा पाई जाती है.

ग्रामीणों को जीने के लिए शहरियों के मुक़ाबले ज़्यादा शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है. लेकिन गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ रहा है. यानी मोटापे और शुगर के मामले भी बढ़ रहे हैं.

6. खानपान में बदलाव

ज़्यादा फ़ैट और शुगर वाला खाना इम्पेयर्ड ग्लूकोज़ टॉलरेंस (आईजीटी) के साथ डायबिटीज़ को भी बढ़ावा देता है. आमदनी बढ़ने के साथ हम ज़्यादा फैट, शुगर और कैलोरी युक्त खाना खाने लगे हैं.

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फ़ोटो साभार: Shutterstock
संदर्भ:

  1. The IDF Diabetes Atlas, 8-th Edition – http://diabetesatlas.org/across-the-globe.html
  2. World Health Organisation – http://www.searo.who.int/india/mediacentre/events/world_health_day/brief_note_on_diabetes_in_india-6april.pdf?ua=1
  3. Mohan V. Why are Indians more prone to diabetes? J Assoc Physicians India. 2004 Jun;52:468-74. Review. PubMed PMID: 15645957
  4. Abate N, Chandalia M. Ethnicity, type 2 diabetes & migrant Asian Indians. Indian J Med Res. 2007 Mar;125(3):251-8. PubMed PMID: 17496354.
  5. Viswanathan M, Mohan V, Snehalatha C, Ramachandran A. High prevalence of type 2 (non-insulin-dependent) diabetes among the offspring of conjugal type 2 diabetic parents in India. Diabetologia. 1985 Dec;28(12):907-10. PubMed PMID: 4092859.
  6. Mohan V, Sharp PS, Cloke HR, Burrin JM, Schumer B, Kohner EM. Serum immunoreactive insulin responses to a glucose load in Asian Indian and European type 2 (non-insulin-dependent) diabetic patients and control subjects. Diabetologia. 1986 Apr;29(4):235-7. PubMed PMID: 3519338.
  7. Bhargava SK, Sachdev HS, Fall CH, Osmond C, Lakshmy R, Barker DJ, Biswas SK, Ramji S, Prabhakaran D, Reddy KS. Relation of serial changes in childhood body-mass index to impaired glucose tolerance in young adulthood. N Engl J Med. 2004 Feb 26;350(9):865-75. PubMed PMID: 14985484; PubMed Central PMCID: PMC3408694.
  8. Cheema A, Adeloye D, Sidhu S, Sridhar D, Chan KY. Urbanization and prevalence  of type 2 diabetes in Southern Asia: A systematic analysis. J Glob Health. 2014 Jun;4(1):010404. doi: 10.7189/jogh.04.010404. PubMed PMID: 24976963; PubMed Central PMCID: PMC4073245.
  9. Chandalia M, Abate N, Garg A, Stray-Gundersen J, Grundy SM. Relationship between generalized and upper body obesity to insulin resistance in Asian Indian men. J Clin Endocrinol Metab. 1999 Jul;84(7):2329-35. PubMed PMID: 10404798.

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