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डायबिटीज़ के सही ढंग से प्रबंधन का तरीक़ा ये है कि इसके इलाज की सही जानकारी हासिल की जा सके.फिर चाहे आपको हाल ही में ख़ुद के डायबिटीज़ (मधुमेह) से ग्रसित होने का पता चला हो या फिर आप पिछले कुछ सालों से इसका सामना कर रहे हों. जहां ज़्यादातर लोगों को डायबिटीज़ के दौरान इंसुलिन की भूमिका की जानकारी होती है, लेकिन ये जानकारी काफ़ी बुनियादी होती है और ज़्यादा आगे नहीं जा पाती.

तो इंसुलिन से जुड़ी वो महत्वपूर्ण बातें कौन सी हैं, जिसका कि हर उस शख्स को पता होना चाहिए जो कि डायबिटिक है यानी जिसे मधुमेह की शिकायत है? आइये जानने की कोशिश करें.

इंसुलिन क्या है?

पाचन तन्त्र आपके खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स को ग्लूकोज़ में बदल देता है. इंसुलिन, एक ऐसा हॉर्मोन है जो आपके पैंक्रियाज़ (अग्न्याशय) नाम के अंग से उत्पन्न होता है.ये ग्लूकोज़ को अवशोषित/सोखता और कार्बोहाइड्रेट्स और फ़ैट मेटाबॉलिज़्म (चयापचय) को नियंत्रित करता है.

टाइप 1 डायबिटीज़ में शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जबकि टाइप 2 डायबिटीज़ में शरीर या तो सही मात्रा में इंसुलिन बनाना बंद कर देता है या फिर सही ढंग से इस्तेमाल करना कम कर देता है. इसलिए इंसुलिन मेडिकेशन के ज़्यादातर मामलों में उपचार का एक अनिवार्य हिस्सा है.

बाहरी तौर से इंसुलिन लेने की किसे है ज़रूरत?

आपका शरीर जब पर्याप्त रूप से इंसुलिन का उत्पादन करने में विफल रहता है, तो इस कमी को भरने के लिए औषधीय रूप का इस्तेमाल किया जाता है. ज़्यादातर मामलों में डॉक्टर इंसुलिन थेरेपी की सलाह देंगे…अगर

  • आप टाइप 1 डायबिटीज़ से ग्रसित हैं.
  • अगर आप अनियंत्रित टाइप 2 डायबिटीज़ से पीड़ित हैं.[1]
  • आपका खानपान, व्यायाम और ओरल मेडिकेशन शुगर को नियंत्रित करने में विफल रहे.
  • आप टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रसित हैं और आप मां बनने वालीं हों.[2]
  • आप टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रसित हैं और किसी तरह का ओपरेशन करने जा रहे हैं.[3]

टाइप 2 डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों को इंसुलिन लेने की ज़रूरत क्यों है?

आमतौर पर टाइप 2 डायबिटीज़ के प्रबंधन के लिए कई सालों तक ओरल मेडिकेशन, स्वस्थ खाने और व्यायाम पर ज़ोर दिया जाता है और इलाज सिंगल ओरल ड्रग का इस्तेमाल करते हुए ब्लड शुगर लेवल्स (रक्त शर्करा के स्तर) को नियंत्रित करने के साथ शुरू होता है.

अगर डायबिटीज़ को फिर भी नियंत्रित करने में परेशानी पेश आती है या फिर दवाएं समय के साथ उम्मीदों के मुताबिक़ अपना असर नहीं दिखा पातीं तो अगला क़दम ओरल दवाओं का कॉमबिनेशन बनाना होता है, जो बेहतर ढंग से काम कर सकता है.

टाइप 2 डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों को इंसुलिन थेरेपी की तब ज़रूरत पड़ती है जब ओरल मेडिकेशन के साथ ही सही आहार और व्यायाम व्यक्ति के ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) को नियंत्रित करने के लिए काफ़ी नहीं होते.[4]

लेकिन इंसुलिन को अब सिर्फ़ आख़िरी क़दम (उपाय) के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता. असल में, हाल के उपचार के दिशानिर्देशों में इस बात की सिफ़ारिश की गयी है कि टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रसित लोग, जितनी जल्दी इंसुलिन लेना शुरू करें, उतना बेहतर होगा.

अगर आप हाल ही में टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रसित बताए गए हैं तो आपका डॉक्टर आपको निम्नलिखत कारणों से इंसुलिन थेरेपी की सलाह दे सकता है.[2]

  • हाई शुगर के लक्षण, जैसे अत्यधिक प्यास लगना (पॉलीडिप्सिया), बार-बार पेशाब आना (पॉलीयूरिया)
  • और/या ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का (HbA1c) > 10% होना
  • और/या फिर ब्लड ग्लूकोज़ लेवल का काफ़ी ज़्यादा हो जाना  (> 300 mg/d)

वेंग जे, एटअल द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि टाइप 2 से ग्रसित नए मरीज़ों पर शुरुआती तौर पर ही गहन इंसुलिन थेरेपी का इस्तेमाल करने से न सिर्फ़ पैंक्रियाज़ (अग्न्याशय) को फिर से काम करने में मदद मिलती है, बल्कि लम्बे समय से जारी डायबिटीज़ में भी कमी देखी जा सकती है.[5]

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इंसुलिन थेरेपी कैसे मदद करती है?

पैंक्रियाज़ से निकलने वाला इंसुलिन आपके ब्लड शुगर को नॉर्मल रेंज में बनाए रखता है. आपका शरीर ख़ुद-ब-ख़ुद शुगर लेवल के प्रति अपनी प्रतिक्रिया देता है और ये पूरे दिन कम मात्रा में बैसल इंसुलिन जारी करता रहता है, जिससे खाने के दौरान और रात में ब्लड शुगर को मैंटेन किया सके. जब आप कुछ खाते हैं तो ये आपके खाने को सोखकर निकली चीनी के बदले बोलस इंसुलिन का उत्पादन करती है.

इंजेक्शन या इंसुलिन पंप के ज़रिए लिया गया इंसुलिन शरीर पर प्राकृतिक इंसुलिन के समान ही अपना असर दिखाता है. ये नॉर्मल इंसुलिन के स्तर का अनुमान लगाकर हाई ब्लड शुगर (उच्च रक्त शर्करा) को कम करने में मदद करता है. इसके लिए, आपकी इंसुलिन थेरेपी में निम्न चाज़ों का शामिल होना ज़रूरी है.

  • बेसल इसुलिन का बैकग्राउंड रिप्लेसमेंट
  • बोलस इंसुलिन का क्विक बर्स्ट रिप्लेसमेंट

रिसर्च से पता चलता है कि गहन इंसुलिन थेरेपी (intensive insulin therapy) डायबिटीज़ से होने वाली जटिलताओं. जिसका असर आंखों (रेटिनोपैथी), गुर्दे (नेफ्रोपैथी) और नसों (न्यूरोपैथी) पर पड़ता है, उसे रोकने या विलम्बित करने में कारगर साबित होती है [6] 

क्या इंसुलिन के भी कई प्रकार होते हैं?

इंसुलिन पांच तरह का होता है, इनमें अंतर उसके असरदार रहने और तेज़ी से प्रतिक्रिया करने के आधार पर होता है.[7]

रैपिड एक्टिग इंसुलिन ●  15 मिनट में असर दिखाने लगता है

●   इसका असर 3 से 5 घंटों तक रहता है.

शॉर्ट एक्टिंग इंसुलिन ●   30 से 60 मिनट के बीच अपना असर दिखाने लगता है.

●    इसका असर 5 से 8 घटों तक रहता है

इंटरमीडिएट एक्टिंग इंसुलिन●     1 से 3 के बीच अपना असर दिखाने लगता है.
●     इसका असर 12 से 16 घटों तक रहता है.
लॉन्ग एक्टिंग इंसुलिन ●     1 घंटे के बीच अपना असर दिखाने लगता है.

●      इसका असर  20 से 26 घटों तक रहता है.

प्रीमिकस्ड  इंसुलिन●     ये दो तरह के इंसुलिन का प्रक्रार होता है.

 
आपकी उम्र, वज़न, शुगर कंट्रोल, जीवनशैली, इंजेक्शन लेने की आपकी फ्रीक्वेंसी और इंसुलिन के प्रति आपकी प्रतिक्रिया जैसे कारकों के आधार पर ही डॉक्टर आपको सबसे बेहतर इंसुलिन की सिफ़ारिश करेगा.

इंसुलिन को इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

इंसुलिन लेने का सबसे आम तरीक़ा सिरिंज का इस्तेमाल है. आप अपनी त्वचा की फ़ैट लेयर पर इंसुलिन का इंजेक्शन कर सकते हैं. आप इंसुलिन पेन और पंप भी इस्तेमाल में ला सकते हैं

कार्ट्रिज और सुई के ज़रिए इंसुलिन पेन्स हॉर्मोन भेजते हैं. अपनी ज़रूरतों के मुताबिक़ आप खुराक की फ्रिक्वेंसी को तय कर सकते हैं.

वहीं दूसरी तरफ़ इंसुलिन पंप सावधानी के साथ आपके जेब, कमरबंद, बेल्ट या आपके इनरवियर से जुड़ा हुआ होता है, जो लगातार एक ट्यूब की मदद से एक ख़ास दर के साथ इंसुलिन प्रदान करता है.

क्या इंसुलिन का इंजेक्शन लेने से दर्द होता है?

इंजेक्शन से दर्द नहीं होता, आजकल इंसुलिन के इंजेक्शन की सुई काफ़ी छोटी/सूक्ष्म होती है, जो कि दर्द के एहसास को काफ़ी हद तक कम कर देती है..

लेकिन इंसुलिन के इंजेक्शंस के प्रति आपके डर का कारण मनोवैज्ञानिक हो सकता है, जिसे साइकोलोजिकल इन्सुलिन रेसिसटेंट्स (मनोवैज्ञानिक इंसुलिन प्रतिरोधक) की अवस्था कहा जाता है.[8]

ऐसे मामलों में आप इंसुलिन लेने में अनिच्छा जताने लगते हैं, क्योंकि आपको इंजेक्शन से दर्द होने, लो ब्लड शुगर, और वज़न बढ़ने का डर सता रहा होता है.

साइकोलोजिकल इन्सुलिन रेसिसटेंट्स की वजह से कुछ लोग इंसुलिन थेरेपी को भी अपनी स्थिति के बिगड़ने की वजह के तौर पर देख सकते हैं, और इसे बदनाम कर सकते हैं, क्योंकि आप इसे स्थायी, रुकावट वाला और पालन करने में सख्त महसूस कर सकते हैं.

क्या इंसुलिन को बिना इंजेक्शन के लिया जा सकता है?

इंजेक्शंस जहां सबसे आम तरीक़ा है, लकिन आप इंसुलिन इन्हेलर का इस्तेमाल कर इंसुलिन पाउडर को मुंह के ज़रिए फेफड़ों तक पहुंचा सकते हैं. वैज्ञानिक गोली के रूप में भी इंसुलिन विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह अभी भी क्लिनिकल ट्रायल के स्टेज पर है.

आपको इंसुलिन कितनी दफ़ा लेना चाहिए?

आपका चिकित्सक आपकी आवश्यकताओं के आधार पर ये तय करेगा कि आपको कितनी बार इंसुलिन लेने की ज़रूरत है. आमतौर पर अपनी बैकग्राउंड इंसुलिन को नियंत्रण में रखने के लिए, आपको रोज़ाना पूरे दिन में एक या दो बार एक बेसल इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होगी। आप इंसुलिन पंप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आपके शरीर की ज़रूरत के मुताबिक़ लगातार इंसुलिन पहुंचाता रहेगा.

बोलस इंसुलिन का इस्तेमाल आपको अपने भोजन के हिसाब से करना चाहिए, ताकि आपके भोजन में शुगर को कवर किया सके और इसे खाने से पहले लिया जाना चाहिए.

अगर आप टाइप 1 डायबिटीज़ से ग्रसित हैं तो आपको हर दिन बोलस इंसुलिन के कई इंजेक्शंस की ज़रूरत पड़ सकती है, साथ ही बेसल इंसुलिन का डोस या फिर आपकी त्वचा पर इंसुलिन के आवरण की आवश्यकता हो सकती है.

अगर आप टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रसित हैं तो आपको इंसुलिन की ख़ुराक दिन में एक बार या फिर कई बार लेने की ज़रूरत हो सकती है. साथ ही आपके शुगर कंट्रोल स्टेट्स को देखते हुए आपको बेसल इंसुलिन रिप्लेसमेंट या बोलस इंसुलिन रिप्लेसमेंट या फिर दोनों की ज़रूरत हो सकती है.

आमतौर पर इंसुलिन थैरेपी आपकी मौजूदा ओरल मेडिकेशन में बेसल इंसुलिन की ख़ुराक को जोड़कर शुरू की जाती है.

इंसुलिन को सही ढंग से स्टोर करने का क्या तरीक़ा है?

  • एक्पाइरी डेट तक इंसुलिन की बोतलों को रेफ्रिजरेटर में रखें.
  • इंजेक्शन से पहले इंसुलिन की बोतल को रूम टेम्परेचर तक पहुंचने दें.
  • खुली बोतलों को एक महीने तक रूम टेम्परेचर पर स्टोर कर के रखें और फिर उसे फेंक दें.
  • अपनी इंसुलिन को अत्यधिक तापमान में रखने से बचें, सूरज की रोशनी से भी दूर रखें और फ़्रीज़ न करें.
  • इंसुलिन के रंग, गंध और उसकी क्लैरिटी का ध्यान रखें, इंसुलिन में किसी भी तरह के बदलाव दिखने पर उसका इस्तेमाल न करें.
  • एक्सपायरी डेट के गुज़र जाने के बाद इनुसुलिन का इस्तेमाल न करें.

काम की बात: बढ़े ब्लड शुगर को ऐसे करें कंट्रोल 

क्या इंसुलिन लेने के कोई साइड इफ़ेक्ट हैं?

इंसुलिन इंजेक्शन के दुष्प्रभाव असामान्य हैं. इंजेक्शन वाली जगह पर आप रेडनेस, सूजन और खुजली या थोड़ा दर्द महसूस कर सकते हैं. लेकिन कुछ ही दिनों में इसका असर ख़त्म हो जाता है. दुर्लभ मौक़ों पर आप गंभीर एलर्जी महसूस कर सकते हैं. इंसुलिन के अधिक लेने या उसके कम इस्तेमाल का भी असर देखा जा सकता है. इंसुलिन के ज़्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने पर लो ब्लड शुगर लेवल की स्थिति पैदा हो सकती है (हाइपोग्लाइसीमिया). वहीं, इंसुलिन की कम मात्रा आपके ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) के स्तर को बढ़ा सकती है. (हाइपरग्लाइसीमिया).

इंसुलिन थेरेपी पर रहने के दौरान आपका वज़न बढ़ सकता है[9]. इसके अलावा अगर लम्बे समय से आपका शुगर कंट्रोल ठीक स्थिति में नहीं है, तो आपकी आँखों पर भी अस्थाई तौर पर असर हो सकता है (डायबिटिक रेटिनोग्राफी).[10]

क्या सावधानियां बरतें?

इंसुलिन का इस्तेमाल करने के दौरान कुछ ज़रूरी बातों का ख़याल रखना चाहिए

  • सही इंजेक्शन तकनीक का इस्तेमाल करें और इंसुलिन की उचित खुराक का प्रबंधन.
  • डिस्पोज़ेबल सुइयों और सिरींजिस का इस्तेमाल करें, और किसी तरह के संक्रमण और जोखिम से बचने के लिए दोबारा इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को उबाल लें.
  • हर एक डोस के लिए त्वचा के किसी नए हिस्से का चयन करें.
  • तेज़ी से कम हो रहे लो ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) लेवल्स के संकेतों पर नज़र रखें (हाइपोग्लाइसीमिया).[11]
  • अपने इंसुलिन, कार्बोहाइड्रेट के इस्तेमाल और व्यायाम पर बैलेंस बनाए रखें. कार्बोहाइड्रेट का सेवन करते रहें. आपको अपनी इंसुलिन की ख़ुराक अपने आहार और शारीरिक गतिविधि के हिसाब से संशोधित और बदलती रहनी करनी पड़ सकती है.
  • शराब का सेवन हाइपोग्लाइसीमिया के खतरे को बढ़ा सकता है.
  • पुराने फेफड़ों का रोग जैसे अस्थमा होने की स्थिति में ‘इन्हेल्ड इंसुलिन की सिफ़ारिश नहीं की जा सकती.[12]
  • अगर आप धूम्रपान करते हैं या आपने हाल ही में धूम्रपान छोड़ा है, तो आपको सांस के ज़रिए इंसुलिन नहीं लेना चाहिए.

कंटेंट की समीक्षा अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

तथ्यों की जांच आदित्य नर, बी.फ़ार्मा, एमएससी, पब्लिक हेल्थ एंड हेल्थ इकोनॉमिक्स.

तस्वीर: Shutterstock

संदर्भ:

  1. Vinik A. Advancing therapy in type 2 diabetes mellitus with early, comprehensive progression from oral agents to insulin therapy. Clin Ther. 2007 Jun;29(6 Pt 1):1236-53. Review. PubMed PMID: 18036387.
  2. American Diabetes Association (ADA) 2017 Guidelines http://care.diabetesjournals.org/content/diacare/suppl/2016/12/15/40.Supplement_1.DC1/DC_40_S1_final.pdf
  3. Husband DJ, Thai AC, Alberti KG. Management of diabetes during surgery with glucose-insulin-potassium infusion. Diabet Med. 1986 Jan;3(1):69-74. PubMed PMID: 2951140.
  4. Yki-Järvinen H, Esko N, Eero H, Marja-Riitta T. Clinical benefits and mechanisms of a sustained response to intermittent insulin therapy in type 2 diabetic patients with secondary drug failure. Am J Med. 1988 Feb;84(2):185-92. PubMed PMID: 3044067.
  5. Weng J, Li Y, Xu W, Shi L, Zhang Q, Zhu D, Hu Y, Zhou Z, Yan X, Tian H, Ran X, Luo Z, Xian J, Yan L, Li F, Zeng L, Chen Y, Yang L, Yan S, Liu J, Li M, Fu Z, Cheng H. Effect of intensive insulin therapy on beta-cell function and glycaemic control in patients with newly diagnosed type 2 diabetes: a multicentre randomised parallel-group trial. Lancet. 2008 May 24;371(9626):1753-60. doi: 10.1016/S0140-6736(08)60762-X. PubMed PMID: 18502299.
  6. Diabetes Control and Complications Trial Research Group, Nathan DM, Genuth S, Lachin J, Cleary P, Crofford O, Davis M, Rand L, Siebert C. The effect of intensive treatment of diabetes on the development and progression of long-term complications in insulin-dependent diabetes mellitus. N Engl J Med. 1993 Sep 30;329(14):977-86. PubMed PMID: 8366922.
  7. 7.http://www.diabetes.org/living-with-diabetes/treatment-and-care/medication/insulin/insulin-basics.html
  8. Swinnen SG, Hoekstra JB, DeVries JH. Insulin Therapy for Type 2 Diabetes. Diabetes Care. 2009;32(Suppl 2):S253-S259. doi:10.2337/dc09-S318.
  9. Russell-Jones D, Khan R. Insulin-associated weight gain in diabetes–causes, effects and coping strategies. Diabetes Obes Metab. 2007 Nov;9(6):799-812. Review. PubMed PMID: 17924864.
  10. Davis MD. Worsening of diabetic retinopathy after improvement of glycemic control. Arch Ophthalmol. 1998 Jul;116(7):931-2. PubMed PMID: 9682709.
  11. Arky RA, Veverbrants E, Abramson EA. Irreversible Hypoglycemia A Complication of Alcohol and Insulin. JAMA. 1968;206(3):575–578. doi:10.1001/jama.1968.03150030031006
  12. Ghosh S, Collier A. Inhaled insulins. Postgraduate Medical Journal. 2007;83(977):178-181. doi:10.1136/pgmj.2006.053868.

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