karela bitter gourd for diabetes
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करेला एक ऐसी सब्ज़ी है जिसके स्वाद के चलते ज़्यादातर लोग इससे दूरी बनाए रखना चाहते हैं. लेकिन सिर्फ़ स्वाद पर मत जाइए. ये सब्ज़ी कड़वी भले ही हो, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा में डायबिटीज़ (मधुमेह) समेत कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए इसका इस्तेमाल होता आया है, और आज हम आपको बताते हैं कि आप भी इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं.  

डायबिटीज़ को नियंत्रित करने के लिए कैसे करें करेले का इस्तेमाल
एक आम तरीक़ा ये है कि करेले को काटकर आप इसका जूस बना लें और प्रतिदिन 50 – 100 ml का सेवन करें.

करेले का जूस कैसे बनाएं:

  1. करेले को अच्छी तरह धोएं, बीच से काटें और इसके बीजों के अलावा सफ़ेद हिस्से को फेंक दें.
  2. बीच से काटने के बाद इसके छोटे टुकड़े कर दें, और सादे पानी में आधे घंटे के लिए भिगो दें.
  3. कड़वापन कम करने के लिए एक चम्मच नमक डालें या आधा नींबू निचोड़ दें.
  4. पानी को फेंकने के बाद, करेले का जूस बनाने के लिए इसे मिक्सर में डालें और ज़रूरत के मुताबिक़ थोड़ा पानी डाल दें.
  5. कुछ लोग जूस को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें काली मिर्च का पाउडर या अदरक डालना पसंद करते हैं.

बाज़ार में कई ब्रैंड्स के करेले के रस उपलब्ध हैं और उसके साथ ही इसकी खुराक लेने के निर्देश भी जोड़े गये हैं. क्योंकि करेले का रस रक्त शर्करा के स्तर (ब्लड ग्लूकोज़ लेवल) में अप्रत्याशित गिरावट ला देता है, इसलिए इसका सेवन अपने डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही करना बेहतर है.

काम की बात: क्या डायबिटीज़ में मीठा खाना चाहिए?



जूस के बदले क्या करेले की सब्ज़ी खाई जा सकती है?
शेफ़ संजीव कपूर, अपनी वेबसाइट पर एक कटोरी नर्म और स्टीम किये करेले खाने की सलाह देते हैं. करेले का कड़वापन कम करने के लिए उसे तेल और अन्य मसालों या गुड़ के साथ पकाने से आप सब्ज़ी के पौष्टिक तत्वों निकाल देते हैं.

करेले का सेवन करते हुए इन बातों को ध्यान में रखिए

करेला यूं तो सभी लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से बचना चाहिए. क्योंकि इसके बीज और इसका रस जानवरों में गर्भपात के कारण के तौर पर जाना जाता है.

ग्लूकोज़ 6 फॉस्फ़ेट डिहाइड्रोजनेज़ एंज़ाइम (G6PD) की कमी के शिकार लोगों में करेले का उपभोग करने पर ‘फेविज़्म’ (लाल रक्त कोशिकाएं टूटती हैं और काम करना बंद कर देती है. इससे हिमोलीटिक एनीमिया पैदा कर सकते हैं) की स्थिति पैदा हो सकती हैं. ऐसे में उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए.(1) और अधिक मात्रा में जूस पीने से आपको दस्त हो सकते हैं
.(2)

इसे भी पढ़ें: डायबिटीज़ में आलू कैसे खा सकते हैं?

लेकिन करेले का ही सेवन क्यों?
करेले में कई फ़ाइटोकेमिकल्स होते हैं जिनमें से तीन  (चारनटिन, वायसीन, पॉलीपेप्टाइड-पी) डायबिटीज़ से लड़ने के लिए  फ़ायदेमंद माने जाते हैं.

इसके अलावा, इसमें लैक्टिन नाम का एक और कमपाउंड भी शामिल है जो भूख को कम करता है. जो कि डायबिटीज़ के दौरान देखने को मिलती है.(3)

रिसर्च क्या कहती है?

रिसर्च बताती है कि करेले का सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज़ में ब्लड ग्लूकोज़ का स्तर एक अलग प्रक्रिया के तहत कम होता है. यह मांसपेशियों द्वारा ग्लूकोज़ के उपयोग को उत्तेजित करता है; यह शरीर में ग्लूकोज के उत्पादन में शामिल एंज़ाइम को दबा देता है, और यह भूख को कम करने में भी मदद करता है.

हालांकि, ध्यान देने वाली एक महत्वपूर्ण बात ये है कि इनमें से ज़्यादातर अध्ययन क्लिनिकल (मानवों पर किए गए परीक्षण) के बजाय बायोकमिकल हैं और पशुओं पर किये गये हैं. मानवों पर किये गये अध्ययनों में खराब डिजाइन, आबादी के छोटे नमूने जैसी कई दूसरी गड़बड़ियां पाए जाने के चलते, यह अनिश्चित है कि करेले को डायबिटीज़ के लिए प्रभावी होने संबंधी अध्ययनों के परिणामों  को अंतिम साक्ष्य के तौर पर लिया जा सकता है या नहीं. (1), (3), (4)

तो क्या आपको करेला खाना चाहिए या नहीं?

बेंगलुरु स्थित के.आरपुरम के संजीविनी आयुर क्लिनिक में आयुर्वेदिक फिज़ीशीयान डॉ ए. कलारंजनी (बीएएमएस) हमें बताती हैं, ‘डायबिटीज़ के इलाज में करेले फ़ायदा पहुंचाते हैं. हालांकि, आयुर्वेद के अनुसार, ये अकेले काम नहीं कर सकता. व्यक्ति की शारीरिक संरचना और उसकी प्रकृति को देखने के बाद ही इसे अन्य उपचारों के साथ जोड़ना ज़रूरी है.”

2011 में हुए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि 4 सप्ताह के दौरान हर दिन 2000 मिलीग्राम करेला खाने से टाइप 2 डायबिटीज़ में ग्लूकोज का लेवल कम करने सफलता हासिल हुई है.

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए करेले को डायबिटीज़ के उपचार के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सकता है. हालांकि, इसका इस्तेमाल हर्बल मेडिसिन में विशेषज्ञ की सलाह के साथ करना सबसे सही होगा.

लेकिन सिर्फ़ करेला ही रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर को नियंत्रित करने के लिए एकमात्र घरेलू उपाय नहीं है, ये रहे कुछ और रिसर्च आधारित घरेलू नुस्ख़े जिनके इस्तेमाल से आप मधुमेह को कंट्रोल में रख सकते हैं.

कंटेंट की समीक्षा अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

तथ्यों की जांच : आदित्य नर, बी.फ़ार्मा, एमएससी, पब्लिक हेल्थ एंड हेल्थ इकोनॉमिक्स.

तस्वीर : Shutterstock

संदर्भ:

  1. WebMD: Bitter Melon. Available at:  https://www.webmd.com/vitamins-supplements/ingredientmono-795-bitter%20melon.aspx?activeingredientid=795&
  2. Barhum. Bitter melon and diabetes: How does it affect blood sugar levels? June 2017 Available at https://www.medicalnewstoday.com/articles/317724.php
  3. Joseph, D. Jini. Antidiabetic effects of Momordica charantia(bitter melon) and its medicinal potency. Asian Pac J Trop Dis. 2013 Apr; 3(2): 93–102. doi:  10.1016/S2222-1808(13)60052-3
  4. Fuangchan, P. Sonthisombat, T. Seubnukam, R. Chanouan, P. Chotchaisuwat, V. Sirigulsatien et al. Hypoglycemic effect of bitter melon compared with metformin in newly diagnosed type 2 diabetes patients.  J Ethnopharmacol.  2011 Mar 24;134(2):422-8. doi: 10.1016/j.jep.2010.12.045. Epub 2011 Jan 4

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