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डायबिटीज़ में केटोएसिडोसिस को आमतौर पर डायबिटिक केटोएसिडोसिस (DKA) के तौर पर जाना जाता है. यह कंडीशन शरीर में सर्कुलेट होने वाले इंसुलिन का लेवल कम होने की वजह से पैदा होती है.1 इस कंडीशन में नुक़सानदेह पदार्थ कीटोंस शरीर में जमा होने लगते हैं. यह ज़िंदगी के लिए ख़तरनाक हो सकता है और इसमें फ़ौरन इलाज की ज़रूरत होती है.1  

केटोएसिडोसिस, टाइप-1 डायबिटीज़ का पहला संकेत हो सकता है या जो लोग पहले ही टाइप-1 डायबिटीज़ से प्रभावित हैं, उन्हें आगे चलकर यह परेशानी हो सकती है.2 हालांकि यह ज़्यादातर टाइप-1 डायबिटीज़ वाले लोगों में ही होता है, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज़ वाले लोग भी केटोएसिडोसिस से प्रभावित हो सकते हैं. इस लेख में डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों में केटोएसिडोसिस होने के ख़तरे पर फ़ोकस किया गया है. इसके साथ ही इसमें इस समस्या के कारण, लक्षण और मुमकिन इलाज पर भी चर्चा की गई है.

केटोएसीडोसिस में क्या होता है? 

शरीर में कोशिकाओं को ईंधन के तौर पर ग्लूकोज़ की ज़रूरत होती है. इंसुलिन का लेवल कम होने पर ग्लूकोज कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता. नतीजा यह होता है कि लीवर शरीर में फैट को कीटोंस में बदलना शुरू कर देता है.2 ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब दो समय के भोजन के बीच ज़्यादा देर हो जाती है. जब शरीर ज़्यादा तेज़ी से केटोन्स बनाने लगता है, तो यह ख़ून को एसिडिक बनाते हुए ख़ून और पेशाब में जमा होने लगता है. इस कंडीशन को केटोएसीडोसिस के तौर पर जाना जाता है. केटोएसीडोसिस की मुख्य वजहें हैं:2

  • ब्लड ग्लूकोज़ लेवल का कंट्रोल में न रहना 
  • टाइप-1 डायबिटीज़ में बीमारी, चोट, सर्जरी या इंसुलिन की डोज़ लेना भूल जाना 
  • टाइप-2 डायबिटीज़ में दवा लेना भूल जाना 

डायबेटिक केटोएसिडोसिस से जुड़े संकेत और लक्षण क्या हैं?

डीकेए वाले लोगों में नीचे दिए गए लक्षण देखे जाते हैं :2,3,4

  • मतली और उल्टी होना
  • थकान होना
  • सरदर्द होना
  • ज़्यादा प्यास लगना
  • स्किन और मुंह का सूखना
  • शरीर में पानी की कमी होना
  • बार-बार पेशाब आना
  • पेट में दर्द होना
  • सांस में बदबू
  • गहरी और तेज़ी से सांस लेना
  • कुछ समझ में ना आना (ध्यान की कमी या भ्रम होना)

क्या बच्चों को केटोएसिडोसिस होने की संभावना होती है?

डायबिटीज़ में केटोएसिडोसिस की मूल पैथोफ़िज़ियोलॉजी बड़ों और बच्चों, दोनों में एक जैसी है. हालांकि इनके लक्षण कभी-कभी अलग भी हो सकते हैं, जो नीचे बताए गए है:5

  • छोटे बच्चों और शिशुओं में अक्सर केटोएसिडोसिस की पहचान करने में ग़लती हो जाती है. इससे उनका ग़लत इलाज होता है और इस वजह से उनकी कंडीशन और ज़्यादा ख़राब हो सकती है. 
  • समस्या देर से पहचान में आना बच्चों में DKA का बड़ा कारण होता है, जबकि इंसुलिन ना लेने से किशोरों में DKA दोबारा उभर सकता है.
  • DKA से प्रभावित बच्चों में सेरेब्रल एडिमा की संभावना ज़्यादा होती है, जो इन बच्चों में मौत का सबसे आम कारण है.
  • बच्चों को शरीर में पानी की कमी से बचाए रखने के लिए फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स देते रहने पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत होती है.

इसलिए, मधुमेह से प्रभावित या इसके जोख़िम वाले बच्चों पर बहुत ज़्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए. हर माता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चे को ऐसी लाइफ़स्टाइल चुनने की सीख दें, जो ज़िंदगी भर उन्हें हेल्थी रखे. इस तरह वे डायबिटीज़ जैसी पुरानी बीमारियों से बचे रहने में उनकी मदद कर सकते हैं. 

क्या डायबेटिक केटोएसिडोसिस को रोक पाना मुमकिन है?

आप नीचे बताए गए तरीक़ों से DKA को रोक सकते हैं:4

  • दवाएं नियमित तौर पर लें.
  • अपने ब्लड ग्लूकोज़ लेवल की नियमित जांच करें, ख़ासकर बीमारी के दौरान.
  • डाइट संतुलित रखें और नियमित भोजन लें.
  • ख़ूब पानी पिएं.
  • रेगुलर एक्सरसाइज़ करें.

    इसे भी पढ़ें: ये हैं डायबिटीज़ की दवाएं जिनका ऐसे होता है असर 

     

    अगर रेगुलर इलाज के बावजूद आपका ब्लड ग्लूकोज़ लेवल लगातार बढ़ा रहता है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें, ख़ासकर अगर साथ में ऊपर बताया गया DKA का कोई लक्षण भी नज़र आ रहा हो. 

डायबेटिक केटोएसिडोसिस की पहचान और इलाज कैसे किया जाता है?

अगर आपके डॉक्टर को शक है कि आपको DKA है, तो वह आपके ख़ून और पेशाब में केटोन्स का पता लगाने के लिए एक टेस्ट कराने की सलाह देंगे. इसके अलावा डॉक्टर ब्लड ग्लूकोज़, आर्टेरिअल ब्लड गैस, ब्लड प्रेशर, किडनी फंक्शन, ख़ून में सोडियम और पोटेशियम के लेवल और अज़्मालारिटी ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं.2

DKA के इलाज का पहला मक़सद ब्लड ग्लूकोज़ के लेवल को नॉर्मल बनाए रखना होता है. इसके अलावा इस इलाज में फ्लूइड रिप्लेसमेंट और भूख में सुधार लाना भी शामिल है.2 लिहाज़ा, इसके इलाज में आमतौर पर अस्पताल में भर्ती किया जाना और एक नस के ज़रिए इंसुलिन, फ्लूइड और पोषक तत्व दिया जाना शामिल है.1

DKA के इलाज के लिए आमतौर पर अस्पताल में भर्ती होना इसलिए ज़रूरी होता है, ताकि जान के लिए ख़तरा बनने वाली किसी भी पर नज़र रखी जा सके.1 अगर DKA का इलाज ना किया जाए, तो किडनी काम करना बंद कर सकती है, सेरेब्रल एडिमा (दिमाग़ में फ्लूइड बनना) या कार्डियक अरेस्ट जैसी मुश्किलें हो सकती हैं. इससे मरीज़ कोमा में जा सकता है और यहां तक ​​कि उसकी मौत भी हो सकती है.2,3

डायबिटिक केटोएसिडोसिस डायबिटीज़ वाले लोगों में एक ख़तरनाक समस्या है और इसमें तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है. अगर तुरंत देखभाल ना की जाए, तो मामला बहुत ज़्यादा गंभीर हो सकता है. अगर आपको मधुमेह है, तो आपको DKA के जोखिम के बारे में पता होना ही चाहिए.1 

केटोएसीडोसिस को ख़ुद से दूर रखने के लिए अपने ब्लड ग्लूकोज़ को कंट्रोल में रखें!

संदर्भ:

  1. NHS. Diabetic ketoacidosis [Internet]. [updated 2017 Apr 24; cited 2019 Dec 13]. Available from: https://www.nhs.uk/conditions/diabetic-ketoacidosis/.
  2. Medline Plus. Diabetic ketoacidosis [Internet]. [updated 2018 Jan 16; cited 2019 Dec 16]. Available from: https://medlineplus.gov/ency/article/000320.htm.
  3. American Diabetes Association. DKA (ketoacidosis and ketones) [Internet]. [cited 2019 Dec 16]. Available from: https://www.diabetes.org/diabetes/complications/dka-ketoacidosis-ketones.
  4. Cleveland Clinic. Diabetes: preventing complications [Internet]. [updated 2017 Mar 29; cited 2019 Dec 16]. Available from: https://my.clevelandclinic.org/health/articles/10675-diabetes-preventing-complications.
  5. Wolfdorf J, Glaser N, Sperling MA. Diabetic ketoacidosis in infants, children, and adolescents. Diabetes care. 2006;29(5):1150-1159.

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