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मॉनसून, ये नाम ज़ेहन में आते ही ख़ुशगवार पल तरो ताज़ा हो जाते हैं – जैसे, गरमा गरम पकौड़ों के साथ अदरक वाली चाय, रिमझिम बरसात की बूंदें और चारों ओर हरियाली. यही वजह है कि मॉनसून ज़्यादातर लोगों का पसंदीदा मौसम है.

लेकिन बाक़ी चीज़ों की तरह ही मॉनसून के साथ भी कुछ परेशानियां और ख़ामियां जुड़ी हैं. ये तन्दुरुस्ती की राह में रोड़ा डालता है और इस दौरान बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है.

ख़ासकर, डायबिटिक लोगों को मॉनसून के दौरान अपना ख़ास ख़्याल रखना पड़ता है. क्योंकि इस मौसम में वायरल और दूसरी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है. जिसके चलते पैरों, दवाओं की देखभाल करना, दवाख़ाने के पास जाना भी एक सिरदर्दी है.

मॉनसून में आपका मिज़ाज भी थोड़ा बदल जाता है और आपको चटपटा, गर्म और फ्राइड खाने की इच्छा ज़्यादा होती है. जिसमें वड़ा पाव, कचौड़ी, समोसा, पकौड़ा, मेदु वड़ा, ब्रेड रोल  जैसे पकवान शामिल है.

ऐसे में मॉनसून के दौरान घर में बने खाने को ही तवज्जोह देना चाहिए. क्योंकि ये ताज़ा और इसमें इस्तेमाल की गई चीज़ें सही होती हैं.

लेकिन सिर्फ़ घर के खाने पर टिके रहें, तो मॉनसून की ख़ुशी कम नहीं होगी? बारिश के मौसम में आप घर से बाहर हों, तो कुछ चटपटा खाना आख़िर किसे अपनी ओर नहीं खींचता?

ऐसे में थोड़ी से समझदारी के साथ ज़ायकेदार खाने का लुत्फ़ उठाया जा सकता है.

1. भुट्टा

बारिश और भुट्टा मानो एक-दूसरे के लिए ही बने हैं. पहली बारिश के साथ शहर के हर कोने में सड़क के किनारे भुट्टा बेचनेवाले स्टॉल दिखने लगते हैं. डायबिटिक लोगों को भुट्टे खाने के दौरान  सिर्फ़ इतना ध्यान रखना ज़रूरी है कि मझोले आकार का आधा से ज़्यादा भुट्टा न खाएं, क्योंकि इसका जीआई लेवल ज़्यादा होता है.

2. चना चाट

काले चने का चाट फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होता है, ये दोनों शुगर लेवल को बख़ूबी संतुलित करते हैं. शाम की भूख मिटाने के लिए इस ज़ायकेदार नाश्ते का इस्तेमाल एक बार किया जा सकता है. इतना ध्यान रखें कि चना चाट में पड़नेवाले प्याज़ और टमाटर आपके सामने ही काटे जाएं, वर्ना आप बीमार हो सकते हैं. दरअसल, मॉनसून में बैक्टीरिया के पनपने की आशंका कच्चे खाने में सबसे ज़्यादा होती है.

3. सूप

बीमारी की आशंका के चलते इस मौसम में सलाद से परहेज़ करना सही है. इसकी भरपाई सब्ज़ियों का सूप पीकर की सकती है, जो एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर होते हैं. बारिश हो रही हो तो एक कटोरा गरमा गरम सूप से लज़ीज़ कुछ नहीं हो सकता. घर में प्रेशर कुकर में कोई भी तीन सब्ज़ियां डालकर आप सूप तैयार कर सकते हैं.

ध्यान रखें कि रेडीमेड सूप में डाला गया सोडियम और प्रिज़र्वेटिव्स सेहतमंद नहीं होते और सूप की अहमियत कम कर देते हैं.

4. सांभर के साथ इडली/दोसा/उत्तपम

दिन में किसी भी वक़्त इस ज़ायकेदार खाने का लुत्फ़ उठाया जा सकता है. दाल-चावल के सटीक अनुपात के साथ इस सेहतमंत खाने का स्वाद मज़ेदार है. लेकिन हाँ, नारियल की चटनी से परहेज़ बरतना चाहिए, क्योंकि इसमें इस्तेमाल किये गए पानी की सफ़ाई के बारे में जानकारी नहीं होती.

कितना खाना चाहिए उसका ख़याल रखें: दक्षिण भारत का ये लज़ीज़ पकवान फ़र्मेंटेशन से तैयार होता है, लिहाज़ा इसका जीआई लेवल हाई है. डायबिटिक लोग गर्म सांभर के साथ एक बड़ी या दो मध्यम आकार की इडली, या आधा उत्तपम या एक दोसा खा सकते हैं.

5. ग्रिल्ड सैंडविच और रैप्स/फ़्रैंकीज़

ये दोनों आपकी सब्ज़ियों की ज़रूरत पूरा करने का एक स्मार्ट और लज़ीज़ ज़रिया है. क्योंकि मॉनसून में गर्म खाने की आपकी चाहत बढ़ जाती है, ऐसे में शाम के खाने के तौर पर ग्रिल्ड सैंडविच और रैप्स एक बेहतरीन विकल्प हैं. चीज़ या पनीर का एक टुकड़ा स्वाद और प्रोटीन दोनों में इज़ाफ़ा करते हैं. रैप्स खा रहे हों तो इसमें कच्चे प्याज़ से परहेज़ करें, क्योंकि इससे बीमारी (फ़ूड पॉइज़निंग) का ख़तरा बढ़ता है. साबुत गेहूँ से बने रैप और सैंडविच ही चुनें क्योंकि इनमें फ़ाइबर भरपूर होता है. एक बार में आधा ग्रिल्ड सैंडविच और एक मध्यम आकार के रैप को ही खाएं.

6. पनीर/चिकन टिक्का

भूख जगाने के लिए ये रोस्टेड विकल्प, फ़ाइबर और प्रोटीन की ज़रूरतों को पूरा करते हैं. कम तेल में पकाया गया टिक्का, ज़ायका और पोषण दोनों के लिहाज़ से फ़ायदेमंद है. लेकिन टिक्का के साथ परोसे जाने वाले सलाद और मिंट की चटनी से दूर रहें. ग्रिल्ड सब्ज़ियों के साथ 3-4 मध्यम आकार के पनीर/चिकन टिक्का का लुत्फ़ उठाया जा सकता है.

7. दाल खिचड़ी

ये वो खाना नहीं है, जो आप बाहर जाकर खाना पसंद करेंगे, लेकिन मॉनसून के दिनों में खिचड़ी अमूमन हर किसी की पसंद होती है. प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खिचड़ी जल्द तैयार होनेवाला ज़ायकेदार खाना होता है; अगर आलस के चलते खाना पकाने का मूड न हो, तो उस हालात में ये सटीक खाना है. खिचड़ी में कुछ सब्ज़ियाँ, और थोड़ा घी मिलाने से इसका स्वाद बढ़ जाता है. मध्यम आकार की एक कटोरी  दाल खिचड़ी आपके लिए काफ़ी है.

तो ये बात थी सेहतमंद विकल्पों की.

लेकिन मॉनसून का लुत्फ़ पूरी तरह तब तक नहीं उठाया जा सकता, जब तक कुछ तला हुआ खाना न मिले. इस मौसम में भजिया या समोसे से दूरी रखना मुश्किल है. वो भी इनसे मिलने वाली कैलोरी या बीमारी के ख़तरे की आशंका पता होने के बावजूद.

यह जानते हुए कि खाने से जुड़ी उस तीव्र इच्छा से लड़ना कितना मुश्किल है, ये रहीं कुछ टिप्स कि कैसे सड़क किनारे लगे फ़ूड स्टॉल पर मिलने वाले खाने का आप कैसे लुत्फ़ उठा सकते हैं.

  • कचौड़ी और पकौड़ा अगर आपके सामने तला गया हो तभी खाएं. इससे बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी होने आशंका कम और कुछ चटपटा और गर्म खाने की आपकी चाहत भी पूरी होगी. हो सके तो इसे आप घर पर ही बनाना सीख लें.
  • खाने की मात्रा यानी पोर्शन साइज़ पर ध्यान ज़रूर दें. एक बार में मध्यम आकार का एक समोसा या चार-पांच भजिया ही खाएं. इसके बाद प्रोटीन की बहुतायत वाला खाना ज़रूर खाएं. मसलन, एक गिलास दूध, भुना हुआ चना या उबले हुए स्प्राउट्स. इससे ख़ून में ग्लूकोज़ की मात्रा नहीं बढ़ेगी. पोर्शन साइज़ क्या होता है इससे यहाँ जानें.
  • ये भी ध्यान रखें कि ऐसा चटपटा खाना हफ़्ते में एक या दो बार से ज़्यादा न खाया जाए. बेहतर होगा अगर हफ़्ते भर संयमित खाने के इनाम के रूप में चटपटे खाने का लुत्फ़ उठाया जाए.

बारिश या मॉनसून का मिज़ाज सुबह/शाम की सैर या कसरत न करने का एक बहाना बन सकता है. चहलक़दमी करना या जिम जाना इस मौसम में भले ही मुमकिन न हो, इनके बदले स्किपिंग करना, खड़े-खड़े जॉगिंग करना, नाचना, योग या घर में डीवीडी की मदद से कसरत करना सही विकल्प हो सकते हैं. ध्यान रहे कि इस तरह की कसरतों करते वक़्त आप पूरी सावधानी बरत रहे हों.

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मॉनसून में सुरक्षा:

बारिश के दिनों में हवा में आर्द्रता की ज़्यादा मौजूदगी आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और मेटाबॉलिज़्म की दर को कम कर देती है. इसके अलावा, बीएमआर कम होने से खाना पचाने की ताक़त भी कम हो जाती है. साथ ही कब्ज़ियत, सूजन और दस्त जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है. सड़कों पर ठहरा हुआ पानी मच्छरों और कीड़ों के पनपने में मददगार होता है. लिहाज़ा, गंदे पानी से होने वाली बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है.

मॉनसून के नुक़सान से बचने और सुरक्षित रहने के उपाय:

  • ताज़ा या खाने के ठीक पहले गर्म किया हुआ खाना ही खाएं.
  • सिर्फ़ ग्रिल्ड, भाप से पके, बेक किये हुए, या भुने हुए खाने पर ज़ोर दें.
  • कम खाएं, बार-बार खाएं. बेहतर होगा कि हर 2-3 घंटे के दौरान कुछ खाते रहें.
  • फलों के अलावा सब्ज़ियों को पकाने से पहले अच्छी तरह धो लें.
  • चाट, सड़क के किनारे बिकने वाले कटे हुए फल और कटी सब्ज़ियों को खाने से बचें.

जूतों का बार-बार पानी में भीगना या देर तक गीले मोज़े पहने रहना मॉनसून के दिनों की एक और परेशानी है. इनसे बीमार पड़ने का ख़तरा बढ़ता है.

पैरों की देखभाल के लिए करें ये उपाय:

  • घर लौटने के बाद साबुन और स्क्रबर से पैरों को अच्छी तरह धोएं. उंगलियों के बीच की जगह तौलिये से पोंछना न भूलें. सूखे हुए पैरों पर मॉइस्चराइज़र लगाएं, लेकिन उंगलियों के बीच में लोशन न लगाएं.
  • जूतों के बजाय फ़्लिप-फ़्लॉप, चप्पल या फ़्लोटर पहनें. अगर जूते पहनना ज़रूरी हैं, तो उन्हें नियमित रूप से बदलते रहें. लम्बे वक़्त तक एक ही जोड़ा जूता पहनने से बैक्टीरिया के पनपने की आशंका बढ़ जाती है.   
  • पैरों में कुछ भी पहनने से पहले बैक्टीरिया और फ़ंगस  दूर करनेवाला, एंटी फ़ंगल पाउडर ज़रूर लगाएं.
  • पैरों के नाख़ून नियमित रूप से काटते रहें. इस भी जानें, भारतीयों को डायबिटीज़ होने की संभावना ज़्यादा क्यों है?

इन थोड़ी सी सावधानियों को  बरतकर आप मॉनसून का भरपूर लुत्फ़ उठा सकते हैं. आपका मॉनसून ख़ुशनुमा और सेहतमंद हो! चीयर्स!

कंटेंट की समीक्षा अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

 

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