Reading Time: 4 minutes

कंटेंट की समीक्षा :अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरुक कर रहीं हैं.

शरीर के सभी अंगों की तरह डायबिटीज़ से आपका मुंह भी प्रभावित हो सकता है. लेकिन समय पर सही एहतियात और बचाव के ज़रिये आप आसानी से अपने मुंह और दांतों की सेहत का ख़याल रख सकते हैं.

डायबिटीज़ से हो सकते हैं आपके मसूड़े प्रभावित

डायबिटीज़ से मसूड़ों के बीमार होने के आसार बढ़ जाते हैं. हो सकता है आप इसके चलते दर्द भी महसूस करें, इतना ही नहीं अक्सर आपके मसूड़ों में मवाद के साथ सूजन भी आ सकती है. नाज़ुक मामलों में नियमित इलाज के बावजूद  हो सकता है कि असर ना हो और ब्लड शुगर लेवल के नियंत्रित न होने से राहत पाने में ज़्यादा वक़्त लगे. मसूड़ों की गंभीर बीमारी (पेरियोडोंटाइटिस) के मामले में हो सकता है कि आपके दांतों को सपोर्ट करने वाली हड्डियां ख़राब हो जाएं, जिससे आपके दांतों के बर्बाद होने ख़तरा जिन्हें मधुमेह नहीं है उनके मुक़ाबले ज़्यादा रहता है.

ऐसा होने की वजह?

हाई ब्लड शुगर लेवल की वजह से नुक़सान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया पनपते हैं. जिससे प्लाक (बैक्टीरिया के मुंह में जमा होने से दांतों के बीच एक तरह की लेयर का बनना) बन जाता है,जो कि आपके मसूड़ों में इंफ़ेक्शन पैदा करता है. इतना ही नहीं, इम्युनिटी कम होने के साथ ही तंत्रिका (नर्व) को भी नुक़सान और सूजन से जुड़ी तकलीफ़ें हो सकती हैं, हालात काफ़ी ख़राब हो सकते हैं.

डायबिटीज़ के कुछ मामलों में नज़र ख़राब हो सकती है. अगर डायबिटीज़ की वजह से नर्व को नुक़सान पहुंचा है, तो इससे मांसपेशियों में कमज़ोरी और हाथों के सुन पड़ने की शिकायत हो सकती है. ऐसे मामलों में मुंह की सही से देखभाल कर पाना और उसे साफ़ सुथरा रख पाना मुश्किल हो जाता है, जिससे मसूड़ों की बीमारी हो सकती है.

अगर आप लगातार धूम्रपान करते हैं, तो समझिए आप ख़ुद अपने लिए खाई खोद रहे हैं, क्योंकि स्मोकिंग से आपके मसूड़ों को और भी ज़्यादा नुक़सान पहुंचता है.

यह एक तरह का दो तरफ़ा संबंध है

जहाँ डायबिटीज़ आपको पेरियोडोंटाइटिस के प्रति संवेदनशील बनाता है, वहीं, मसूड़ों की बीमारियां आपके डायबिटीज़ नियंत्रण में रुकावट, उससे जुड़े ख़तरों और जटिलताओं में इज़ाफ़ा कर सकती हैं.

मसूड़ों की बीमारी के संजीदा होने से आपके पूरे शरीर में जलन के साथ सूजन हो सकती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है और आपके लिए डायबिटीज़ पर क़ाबू पाना और भी मुश्किल हो सकता है.

डायबिटीज़ के साथ गंभीर पेरियोडोंटाइटिस होने पर आपकी किडनी फ़ेल होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है. डायबिटीज़ की वजह से गंभीर मसूड़ों की बीमारी के साथ किडनी या दिल से जुड़ी तकलीफ़ों का होना घातक हो सकता है.


इसे भी देखें: डायबिटीज़ में कैसे पाएं अच्छी नींद?

इसके दूसरे असर भी हैं

डायबिटीज़ होने पर दूसरी वजहों से भी आपके मुंह की सेहत बिगड़ सकती है.

1. मुंह का सूखना

डायबिटीज़ होने पर मुँह सूखना या ज़ेरोस्टोमिया का होना आम बात है, जिसके तहत आपके मुंह में पर्याप्त मात्रा में थूक नहीं बनता जिससे कि मुंह में नमी बनी रहे. हाई ब्लड शुगर मुंह का अंदरूनी हिस्सा सुखा देता है, और अगर आपका नर्व सिस्टम या नसें भी ख़राब है, तो हो सकता है कि आपकी लार ग्रंथि ज़रूरत भर का लार ना बना सके. डायबिटीज़ के इलाज में ली जाने वाली कुछ दवाइयां भी थूक/लार बनने में कमी की वजह हो सकती हैं.

मुंह के सूखे होने से आपके मुंह में दर्द उभर सकता है, नतीजतन आपको चबाने, खाने या निगलने में तकलीफ़ हो सकती है. इससे आपके दांतों में सड़न और उनके गिरने का भी ख़तरा बढ़ जाता है.

2. दांतों में सड़न (कैविटी)

ब्लड शुगर लेवल के हाई होने पर हानिकारक बैक्टीरिया पैदा होते हैं, जिसकी वजह से प्लाक हो जाता है. अगर आप डायबिटिक होने के साथ ही हाई कैलोरी कार्बोहाइड्रेट्स वाला आहार खा रहे हैं, तो आपके दांतों के इस तरह के खाने के संपर्क में आने के आसार बढ़ जाते हैं, जो उनमें सड़न पैदा करते हैं. इन वजहों से कैविटी  यानी दांत में छेद होने की भी संभावना बढ़ जाती है.

3. स्वाद का पता न चलना

डायबिटिक न्यूरोपैथी (डायबिटीज़ की वजह तंत्रिका या नर्व को नुक़सान होना) आपके स्वाद परखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है. स्वाद परखने की क्षमता ख़त्म होने से प्रॉपर डाइट (उचित आहार) को बनाए रखने में परेशानी हो सकती है.

4. फ़ंगल इंफ़ेक्शन  

लार में हाई ब्लड शुगर लेवल होने, इम्युनिटी की क्षमता घटने और लार के प्रवाह में कमी होने से कैंडिडा नाम के फ़ंगस को मुंह में बढ़ने में मदद मिलती है. जो ओरल कैंडिडिआसिस (मुंह में छाले) की वजह बनता है. इससे मुंह में दर्दनाक सफ़ेद या लाल धब्बे आ जाते हैं, जो बाद में अल्सर बन सकते हैं.

5. घाव भरने में ज़्यादा वक़्त लगना

अगर आप सही ढंग से डायबिटीज़ पर क़ाबू नहीं पा रहे हैं, तो इससे आपकी रोग प्रतिरोधक शक्ति घट सकती है और घाव भरने में ज़्यादा समय लग सकता है. ऐसे हालात में, अगर आप किसी तरह की सर्जरी करवाते हैं, तो आपमें संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है. साथ ही, आपका घाव भरने में भी काफ़ी समय लग सकता है और सर्जरी के बाद ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना भी मुश्किल हो सकता है.

शुगर पर बेहतर कंट्रोल ही बचाव है

असल परेशानी डायबिटीज़ नहीं, हाई ब्लड ग्लूकोज़ है. इसलिए ब्लड ग्लूकोज़ लेवल पर क़ाबू पाकर मसूड़ों की बीमारी से बचा जा सकता है.

  • मुंह को साफ़-सुथरा रखें.यह प्लाक के बनने और मसूड़ों की बीमारियों से बचाएगा. तंत्रिका के ख़राब होने की स्थिति में इलेक्ट्रिक टूथब्रश का इस्तेमाल भी उपयोगी साबित हो सकता है, क्योंकि नर्व डेमेज होने की स्थिति में, मुंह की सफ़ाई को बरकरार रखने की आपकी क्षमता घट सकती है   
  • धूम्रपान से बचें, हर 6 महीने में डेंटिस्ट से मिलें.
  • समय-समय पर दांतों की जांच करवाते रहने से डायबिटीज़ की वजह से दांतों और मसूड़ों में होने वाली किसी भी तकलीफ़ का सही वक़्त पर पता लगाया जा सकता है और इलाज किया जा सकता है.

और हाँ, शुरुआत में ही मसूड़ों का इलाज करवाने से आपको अपने ब्लड शुगर लेवल को  कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है.

Loved this article? Don't forget to share it!

Disclaimer: The information provided in this article is for patient awareness only. This has been written by qualified experts and scientifically validated by them. Wellthy or it’s partners/subsidiaries shall not be responsible for the content provided by these experts. This article is not a replacement for a doctor’s advice. Please always check with your doctor before trying anything suggested on this article/website.