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हम सभी को भोजन पसंद है, लेकिन हम सिर्फ़ ज़िन्दा रहने के लिए भोजन नहीं करते, बल्कि स्वाद के लिए भी करते हैं. हालांकि स्वाद के चक्कर में ज़रूरत से ज़्यादा भोजन सेहत के लिए फ़ायदेमंद नहीं होता है. इससे न सिर्फ़ भोजन के पचने में परेशानी होती है, बल्कि दिमाग़ भी अस्थिर हो जाता है और शरीर में पैदा होने वाले हॉर्मोन्स भी असंतुलित हो जाते हैं, ख़ासकर सेरोटोनिन, लेप्टिन, घ्रेलिन जैसे पाचन क्रिया और संतुष्टि को प्रभावित करने वाले हारमोन्स. (1)

पोर्शन साइज़: पोर्शन साइज़ खाने का वो भाग और मात्रा है जिसे आप खाने के लिए चुनते हैं, जो अधिक या कम हो सकता है. पोर्शन कंट्रोल यानी खाने की मात्रा का ठीक से प्रबंधन करना है.

ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने से इन्सुलिन स्राव का स्तर बदल जाता है, और शरीर में ख़ून का प्रवाह प्रभावित होता है (इसी वजह से ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने के बाद हम उनींदा महसूस करने लगते हैं).

मधुमेह में खुराक प्रबंधन या पोर्शन कंट्रोल क्यों आवश्यक है?

डायबिटीज़ (मधुमेह) की स्थिति में शरीर की खुराक पचाने की क्षमता के साथ-साथ इन्सुलिन के स्राव और उसकी कार्यक्षमता में भी बदलाव आता है. इन दोनों से और ख़ासकर भोजन करने के बाद ख़ून में ब्लड शुगर(शक्कर) की मात्रा बढ़ जाती है. लिहाज़ा ख़ून में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित  करने के लिए स्वास्थ्यवर्धक और संतुलित आहार ज़रूरी है. इस ज़रूरत को पूरा करने का सबसे बेहतरीन उपाय है, भोजन का प्रबंधन करना यानी पोर्शन साइज़.

हमारे रोज़मर्रा के आहार में ख़ून को सबसे ज़्यादा प्रभावित करने की क्षमता कार्बोहाइड्रेड में होती है. लिहाज़ा डायबटीज़ के प्रबंधन के दौरान कार्बोहाइड्रेट की मात्रा और गुणवत्ता का प्रबंधन ज़रूरी है. जब हम कार्बोहाइड्रेट की गुणवत्ता की बात करते हैं, तो इसका मतलब ग्लाइसेमिक इन्डेक्स से होता है. ये इन्डेक्स ख़ून में शक्कर की मात्रा के स्राव की दर बतलाता है. (2)

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आहार प्रबंधन के फ़ायदे

भोजन का प्रबंधन सिर्फ़ कम मात्रा में खाना खाना ही नहीं, बल्कि सही मात्रा में खुराक लेना है. ये मात्रा अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग हो सकती है. इसका मक़सद खाना खाने के बाद संतुष्टि और ख़ुशी महसूस करना है, न कि ज़रूरत से ज़्यादा खाकर सुस्त हो जाना. जब हम भोजन प्रबंधन करते हैं, तो खाने की मात्रा कम होना तय है, लेकिन भोजन नियमित अंतराल पर भी होना चाहिए. इससे भोजन का पचना सामान्य तरीक़े  से होता है, और खुराक सेहतमंद साबित होती है.

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भोजन प्रबंधन कैसे करें?

द फ़ूड अनालिस्ट्स के संस्थापक, वीर रामलुगन, हमें डायबिटीज़ की स्थिति में भोजन के प्रबंधन के सही तरीक़े समझाने में मदद कर रहे हैं.

1.भोजन के प्रकार का वितरण : 

प्लेट में भोजन का प्रकार 30-40-30 नियम के आधार पर तय करना चाहिए. यानी प्लेट में 30 फ़ीसदी कार्बोहाइड्रेट वाला खाना (बिना स्टार्चवाले, अधिक रेशेदार, कम ग्लाइसेमिक इन्डेक्स वाले कार्बोहाइड्रेट), 40 फ़ीसदी कम चर्बी वाले प्रोटीन पदार्थ और बाकी 30 प्रतिशत ज़रूरी वसायुक्त भोजन होना चाहिए. इस प्रकार आप ख़ून में ब्लडशुगर की मात्रा को संतुलित बनाए रख सकते हैं.

2.छोटे आकार के प्लेट और गिलास का इस्तेमाल :

अगर आपकी रसोई में बड़े आकार के प्लेट और गिलास हैं, तो उन्हें छोटे प्लेट और गिलास से बदलने की कोशिश करें. छोटे आकार के प्लेट से आप कम मात्रा में भोजन करेंगे. 12 इंच के प्लेट के बजाय 10 इंच के प्लेट में खाने से आपके खाने में करीब 22 फीसदी कम कैलोरी होगी. डायबिटीज़ प्रबंधन का आसान नुस्खा है, स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट सब्ज़ियों के ज़रिये कार्बोहाइड्रेट युक्त खाने की आदत डालना.

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3. जितना हो सके, बुफ़े भोजन से दूर रहें :

बुफ़े के लिए सजा डाइनिंग रुम देखने में भले ही शाही लगता हो, लेकिन इसके चलते आप ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाते हैं. बुफे का खाना हमारे दिमाग़ की भूख शांत करता है, न कि पेट की भूख. इसके अलावा पकाए गए भोजन के तरीक़े उसके सेहतमंद होने पर भी संदेह पैदा करते हैं.

4. रेडीमेड खाना ख़रीदते वक़्त पैकेट के लेबल की जांच करें :

खाद्य पदार्थों के पैकेट के लेबल में उससे जुड़ी लाभदायक जानकारियां छपी होती हैं. इनमें एडेड शुगर के बारे में भी जानकारी होती है. एडेड शुगर का मतलब शक्कर के अलग-अलग प्रकार हैं, मसलन, चुकन्दर या गन्ने से बनाया गया शक्कर, मक्के की चाशनी, शहद, जौ की चाशनी या पैकेटबंद भोजन में मिलाए गए अन्य मीठे पदार्थ.इनसे ख़ून में शक्कर की मात्रा बढ़ती है.ये भी ध्यान रखना चाहिए कि दूध में प्राकृतिक रूप से शक्कर पाया जाता है और लैक्टोस को एडेड शुगर की श्रेणी में नहीं रखा जाता है. इस प्रकार पैकेट के लेबल में दी गई जानकारियों से आप अपने भोजन का सही विकल्प तय कर सकते हैं.

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5. देखकर खाने के बारे में फ़ैसला करना सबसे फ़ायदेमंद है :

देखकर अपने मुताबिक़ खाने की मात्रा याद रखना आसान है. मसलन:

  • एक छोटी मुट्ठी – एक चौथाई कप सूखा मेवा, या एक आउंस बादाम
  • महिलाओं की मुट्ठी जितना सब्ज़ियाँ या कोई पूरा फल
  • माचिस की डिब्बी भर – 1 आउंस मांस या पनीर का एक टुकड़ा
  • ताश के पत्तों की डेक या हथेली के आकार के बराबर: (बिना उंगलियों के)3 आउंस मांस, मछली या पोल्ट्री या 10 फ्रेंच फ्राई
  • चेक बुक के बराबर – एक मछली (लगभग 3 आउंस)
  • टेनिस बॉल – 1/2 कप पास्ता या आइस क्रीम
  • कम्प्यूटर का माउस – मझोले आकार का एक पका हुआ आलू
  • कॉम्पैक्ट डिस्कएक मालपुआ
  • अंगूठे के आकार के बराबर – पनीर का एक टुकड़ा या एक चम्मच सलाद ड्रेसिंग
  • अंगूठे के नोक जितनी मात्रा – एक चम्मच तेल
  • एक बेसबॉल के बराबर – 8 आउंस दही, एक कप फली, या एक कप सूखा अनाज

आख़िर में सबसे महत्त्वपूर्ण है, खाना को अच्छी तरह चबाना. दिमाग को ये महसूस करने में 15-20 मिनट का वक़्त लगता है कि पेट भर गया है. लिहाज़ा धीरे-धीरे खाएं, स्वाद लेकर खाएं.

फ़ोटो साभार: Travis Yewell Unsplash

संदर्भ:

  1. Klok MD1, Jakobsdottir S, Drent ML. The role of leptin and ghrelin in the regulation of food intake and body weight in humans: a review. PMID: 17212793 DOI: 10.1111/j.1467-789X.2006.00270.x Obes Rev. 2007 Jan;8(1):21-34. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/17212793
  2. Marsh K1, Barclay A, Colagiuri S, Brand-Miller J. Glycemic index and glycemic load of carbohydrates in the diabetes diet. PMID: 21222056 DOI: 10.1007/s11892-010-0173-8 Curr Diab Rep. 2011 Apr;11(2):120-7. doi: 10.1007/s11892-010-0173-8. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21222056

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