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इन दिनों दिल की बीमारियां तेज़ी से बढ़ रही हैं और इसकी अहम वजहों में से एक है नुकसानदेह खानपान. जो लोग प्रोसेस्ड और ज़्यादा फ़ैट वाली चीज़ें खाते हैं, उनके शरीर में अक्सर कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है, जिससे उन पर दिल की बीमारी और स्ट्रोक का ख़तरा मंडराते रहता है.[1,2] लेकिन अच्छी बात ये है कि अपने खान-पान की आदतों में थोड़ा सा बदलाव करके इस ख़तरे को टाला जा सकता है. खाने की आसानी से मिलने वाली कुछ कुदरती चीज़ें ऐसी हैं, जो लाइफ़स्टाइल की वजह से होने वाली परेशानियों को दूर रखती हैं. और इनमें से एक है सोयाबीन. आइए, जानते हैं कि सोयाबीन आपके कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में किस तरह आपकी मदद कर सकता है.

सोयाबीन से भरपूर प्रोटीन मिलता है-

कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले फ़ूड के तौर पर सोय प्रोटीन की अपनी एक अलग पहचान है. ये प्रोटीन पेप्टाइड्स से बना होता है. लीवर सेल्स ख़राब कोलेस्ट्रॉल को बेहतर बनाने और प्रोसेसिंग का काम करते हैं और पेप्टाइड्स इसके लिए रिसेप्टर्स के लेवल को कंट्रोल करता है. इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल के बनने की रफ़्तार भी धीमी हो जाती है.[3,4]

सोयाबीन में आइसोफ्लेवोन्स भी होता है –

आइसोफ्लेवोन्स कई पौधों में पाए जाने वाले बायोएक्टिव कंपाउंड हैं. हालांकि ये कंपाउंड अकेले ख़राब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) के लेवल पर ख़ास असर नहीं डालते हैं, लेकिन किसी वजह से सोय प्रोटीन के साथ मिलकर इनमें कोलेस्ट्रॉल को कम करने की ख़ूबी आ जाती है. अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन में छपी एक स्टडी से पता चलता है कि आइसोफ्लेवोन्स की मौजूदगी में सोय प्रोटीन का असर बढ़ जाता है. साथ ही कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए इनके साथ एक काम करने की क्षमता बढ़ जाती है. इसके अलावा, सोयाबीन में मौजूद फ़ाइटोस्टेरॉल जैसे दूसरे कंपाउंड की वजह से शरीर ख़राब कोलेस्ट्रॉल का कम इस्तेमाल करता है.[3,5,6]

सोयाबीन में फ़ाइबर भी खूब होता है –

सोयाबीन में घुलने वाला फ़ाइबर पेक्टिन भी होता है. यह शरीर के ज़रिए खराब कोलेस्ट्रॉल को बेहतर बनाने के लिए की जाने वाली प्रोसेसिंग को बढ़ावा देता है, जिससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है.[3]

सोयाबीन की ये तीन खूबियां मिलकर उसे कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले फ़ूड का अच्छा स्रोत बनाती हैं. 

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यहां बताया गया है कि आप अपने खान-पान की आदतों में बदलाव लाकर सोयाबीन को कैसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते है.

  1. चिकन की जगह सोयाबीन खाएं– शाकाहारी लोग प्रोटीन के लिए सोयाबीन खा सकते हैं. यह चिकन से मिलने वाले प्रोटीन का एक अच्छा विकल्प है. अगर आप घर पर बनी सेहतमंद चीज़ों को चुनना चाहते हैं, तो सोय करी और बेक्ड सोयाबीन पैटीज़ की रेसिपी देख सकते हैं.
  2. सोय ड्रिंक – सोय से बने कई ड्रिंक जैसे मिल्कशेक और स्मूदी बाज़ार में मौजूद हैं. आप सुबह अपने नाश्ते में सोय मिल्कशेक ले सकते हैं. यह कसरत के बाद एक हेल्दी ड्रिंक के तौर पर भी लिया जा सकता है.
  3. सोय सिरिअल – इन्हें रोज़ाना पकने वाले गेहूं और दूसरे अनाजों में शामिल किया जा सकता है. इसे रेगुलर बनने वाली कई रेसिपी में रिफ़ाइंड आटे की जगह एक हेल्दी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. बाज़ार में कई तरह का मल्टीग्रेन आटा मिलता हैं, जिनमें सोय भी शामिल होता है.
  4. टोफ़ू – टोफ़ू को सोय मिल्क से तैयार किया जाता है, जो बाज़ार में आसानी से मिल जाता है. आपके पास      बेक्ड या ग्रिल्ड जैसे खाना पकाने के तरीकों का इस्तेमाल करके टोफ़ू से डिश तैयार करने के काफ़ी विकल्प हैं.

  आप करी में पनीर की जगह टोफ़ू इस्तेमाल कर सकते हैं.

सन्दर्भ:

  1. Cardiovascular disease. World Health Organisation (WHO). https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/cardiovascular-diseases-(cvds)
  2. American Heart Association. “Unhealthy diets linked to more than 400,000 cardiovascular deaths.” ScienceDaily. ScienceDaily, 9 March 2017. <www.sciencedaily.com/releases/2017/03/170309142345.htm>.
  3. Cereals and Pulses: Nutraceutical Properties and Health Benefits edited by Liangli L. Yu, Rong Tsao, Fereidoon Shahidi
  4. Michelfelder AJ1.Soy: a complete source of protein. Am Fam Physician. 2009 Jan 1;79(1):43-47.
  5. Ramdath DD, Padhi EM, Sarfaraz S, Renwick S, Duncan AM. Beyond the Cholesterol-Lowering Effect of Soy Protein: A Review of the Effects of Dietary Soy and Its Constituents on Risk Factors for Cardiovascular Disease. Nutrients. 2017;9(4):324. Published 2017 Mar 24. doi:10.3390/nu9040324
  6. Kyoko Taku et al. Soy isoflavones lower serum total and LDL cholesterol in humans: a meta-analysis of 11 randomized controlled trials. The Am J Clinical Nutrition, Volume 85, Issue 4, April 2007, Pages 1148–1156, https://doi.org/10.1093/ajcn/85.4.1148

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