Eat colourful
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क्या आपने कभी इन्द्रधनुष के रंगों को अपने थाली में देखने के बारे में सोचा है? खैर, शायद आपने इस बारे में कभी नहीं सोचा होगा, लेकिन खाने की रंग बिरंगी चीज़ों से मन पर काफी सकारात्मक असर पड़ता है और इससे शरीर को पोषक तत्व भी मिलते हैं.(1,2) फल और सब्ज़ियों के अलग-अलग रंग इसमें मौजूद कई बायोएक्टिव कम्पाउंड, विटामिन, मिनरल और कई दूसरे ज़रूरी तत्वों के मौजूद होने की ओर इशारा करते हैं.(1,2)

ऐसी डाइट जिसमें कई तरह के रंग वाले फल और सब्ज़ियां शामिल हों, उनसे डिस्प्लासिडीमिया को कंट्रोल में रखने में मदद मिल सकती है.(1) इस लेख में डिस्लिपिडेमिया में अलग-अलग तरह के खाने की चीज़ों और रंगीन खानों की अहमियत पर रोशनी डाली गई है.

डिस्लिपिडेमिया क्या है?

डिस्लिपिडेमिया एक ऐसी स्थिति है जो लिपोप्रोटीन के चयापचय यानी मेटाबोलिज्म पे असर डालती है. इससे कुल सीरम कोलेस्ट्रॉल, लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानी कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन, ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ जाता है और लोहाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानी उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन का लेवल कम हो जाता है.(3) डिस्लिपिडेमिया से दिल के ब्लड वेसल्स के संकरा हो जाने का बड़ा जोख़िम बना रहता है जिससे इस्केमिक हार्ट डिज़ीज़ (IHD) और दिल से जुड़ी दूसरी समस्याओं का खतरा मंडराता है.(3)

डिस्लिपिडेमिया में किस तरह की डाइट को अपनाने का सुझाव दिया जाता है?

डिस्लिपिडेमिया को मैनेज करने के लिए लाइफ़स्टाइल और डाइट में सेहतमंद बदलाव लाने से काफी फ़ायदे होते हैं.(1) शरीर के लिए मिनरल, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट हासिल करने के लिए रंगीन चीज़ें खाना सबसे आसान और असरदार तरीका है.(2) डिस्लिपिडेमिया को मैनेज करने के लिए डाइट में ये बदलाव करने का सुझाव दिया जाता है:

• सैचुरेटेड और ट्रांस फ़ैट कम खाना और कोलेस्ट्रॉल वाली खाने की चीज़ों में कटौती करना.(4)
• घुलने वाले फाइबर की मात्रा बढ़ाना.(4)
• जिन चीज़ों में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज़्यादा हो, उनसे परहेज़ करना. (2,4)
अपने रोज़ाना क डाइट में एंटीऑक्सिडेंट और बिना कोलेस्ट्रॉल वाली चीज़ों को शामिल करना.(2,4)

डिस्प्लासिडेमिया को मैनेज करने में रंगीन और कई तरह के खाने की चीज़ों की क्या भूमिका होती है?

रंगीन फल और सब्ज़ियां खाने से मन संतुष्ट होता है, ख़ुशी महसूस होती है, क्रिएटिविटी और जिज्ञासा पैदा होती है और साइकोलॉजिकल स्ट्रेस कम होता है.  इतना ही नहीं, ऐसे चीज़ें खाने हम शारीरिक रूप से भी सेहतमंद रहते हैं. पेड़-पोधों से मिले ज़्यादातर खाने की चीज़ों में उनके गहरे रंग के साथ एक से ज़्यादा रंग मौजूद होते हैं जो उनमें मौजूद फ़ाइटोन्यूट्रिएंट्स के प्रकार पर निर्भर करते हैं. इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • कैरोटेनॉइड वाले खाने की चीज़ों में नारंगी रंग होता है.(2)
  • फ्लेवोनोइड से भरपूर खाद्य पदार्थों में बैंगनी और पीले रंग के पिगमेंट होते हैं.(2,5)
  • कोलोरोफिल वाले खाने की चीज़ों में हरा रंग होता है.(2)
  • खाने की जिन चीज़ों में लाइकोपीन होता है, वे लाल रंग के होते हैं.(2)

कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि फाइटोकेमिकल्स से भरपूर अलग-अलग तरह के फल और सब्ज़ियों को खाने से वज़न नहीं बढ़ता है, वज़न कम होता है, लिपिड लेवल में सुधार होता है और हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर का जोख़िम कम होता है, उदाहरण के लिए, सफेद-और गहरे नारंगी रंग के फलों और सब्ज़ियों से स्ट्रोक और कोरोनरी का जोख़िम कम होता है. जबकि टमाटर जैसे लाल रंग के खाने की चीज़ों से लिपिड कम कम होते हैं.(1,2) इस तरह की डाइट में फ़ाइबर भी ज़्यादा होगा, कैलोरी कम होगी और पोषक तत्व की मात्रा भी ज़्यादा होगी.(1,2) कई तरह के और रंगीन चीज़ों में मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और ऊर्जा का घनत्व बहुत ज़्यादा होता है, इसलिए, ये कैलोरी को बढ़ाए बिना डिस्लिपिडेमिया को मैनेज करने में मदद कर सकते हैं.(1)

यहां कुछ ऐसे रंगीन और अलग-अलग तरह के खाने की चीज़ों के बारे में बताया जा रहा है, जो डिस्लिपीडेमिया में फ़ायदेमंद हैं:

  • सोया, जई और जौ जैसी चीज़ों में मौजूद घुलने वाले फ़ाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं.(5)
  • सोयाबीन, बीन्स और दूसरे फलियों में वेजिटेबल प्रोटीन होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए फ़ायदेमंद हैं.(5)
  • अंगूर, कोको, दालचीनी और क्रैनबेरी, रंगीन होती हैं जो पॉलीफेनॉल्स से भरपूर होते हैं. इनकी एंटीऑक्सीडेंट गुण की वजह से ये कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और कोलेस्ट्रॉल संश्लेषण को बाधित करने की क्षमता रखते हैं.(5)
  • करक्यूमिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो सेहतमंद लिपिड प्रोफ़ाइल को बनाए रखने में फ़ायदेमंद साबित होते हैं.(5)
  • लहसुन और प्याज़ में फ़ाइटोकोनस्टिटुएंट्स पाए जाते हैं और ये अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं.(5)

रिसर्च से ये बात सामने आती है कि अलग-अलग तरह की डाइट की ख़ासियत इसमें मौजूद अलग-अलग तरह के पोषक तत्व और पोषक तत्वों की घनत्व है. एक ही तरह की चीज़ खाने के मुक़ाबले अलग-अलग तरह की चीज़ें खाने से सेहत पर काफी अच्छा असर पड़ता है.(2)

अपने कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखने के लिए अलग-अलग तरह की, रंगीन और सेहतमंद चीज़ें चुनें और अपनी ज़िंदगी को अच्छी सेहत के रंगों से खूबसूरत बनाएं.

संदर्भ:

  1. Schwellnus MP, Patel DN, Nossel C, Dreyer M, Whitesman S, Derman W. Healthy lifestyle interventions in general practice. Part 8: Lifestyle and dyslipidaemia. S Afr Fam Pract. 2009;51(6):453-460. doi: 10.1080/20786204.2009.10873903.
  2. Minich DM. A review of the science of colorful, plant-based food and practical strategies for “Eating the Rainbow”. J Nutr Metab. 2019 Jun 2;(2):1-19. doi: https://doi.org/10.1155/2019/2125070.
  3. Ahmed, SM, Clasen, ME, Donnelly, JE. Management of dyslipidemia in adults. Am Fam Physician. 1998 May 1;57(9):2192-2204, 2207-8.
  4. Kelly, RB. Diet and exercise in the management of hyperlipidemia. Am Fam Physician. 2010 May 1;81(9):1097-102.
  5. Rosa Cde O, dos Santos CA, Leite JIA, Caldas APS, Bressan J. Impact of nutrients and food components on dyslipidemias: what is the evidence? Adv Nutr. 2015 Nov 13;6(6):703-11. doi: 10.3945/an.115.009480.

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