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कंटेंट की समीक्षा अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

डायबिटीज़ को नियंत्रित करने और इससे बचाव के लिए आपके पास सबसे बेहतर सलाहकार डॉक्टर होते हैं. तो तैयार हो जाइये उनसे मिलने पर अपने डायबिटीज़ को बेहतर ढंग से हैंडल करने और उनसे अच्छे तालुक बनाने के लिए. जो आपके लिए बेहतर नतीजे लेकर आए.

बेंगलुरु
के बैनरघट्टा में स्थित फ़ोर्टिस हॉस्पिटल के डायबिटीज़ सलाहकार, एंडोक्रिनोलॉजी और डाइबेटोलॉजिस्ट डॉ मंजूनाथ मलिगे, हमें वो 6 अहम बातें बता रहे हैं, जिसे हम सभी को डॉक्टर के पास जाने के समय याद रखनी चाहिए. और इन बातों को ध्यान में रखने पर आप अपने  डाइबेटोलॉजिस्ट से बेहतर नतीजे हासिल कर सकते हैं.

 1. ब्लड शुगर का ब्यौरा साथ रखें.

पिछली बार मिलने के बाद से अब तक आपका ब्लड शुगर कितना बढ़ा-घटा इसकी जानकारी आपके डॉक्टर के पास होनी ज़रूरी है. इसके ज़रिये ही डॉक्टर आपके डायबिटीज़ का बेहतर इलाज करने में कामयाब हो पायेगा या ज़रूरत पड़ने पर इलाज में बदलाव लाने से जुड़े फ़ैसले ले सकेगा.

इस तरह अपने डॉक्टर से बेहतर नतीजे पाने के लिए कुछ चीज़ों की आदत डाल लें. जैसे, घर पर ही अपने ब्लड शुगर लेवल की जांच करना शुरू कर दें. ऐसा करने के लिए ग्लूकोमीटर सबसे तेज़ और सरल साधन है. दिन में ज़्यादा से ज़्यादा 2 बार और कम से कम एक दिन के अंतराल में अपने ब्लड शुगर लेवल की नियमित जांच करते रहनी चाहिए. ग्लूकोमीटर से मिला अपने ब्लड शुगर लेवल का ब्यौरा और उसका क्रम दर्ज़ करने के लिए डायरी बनाएं. इस ब्यौरे के साथ जब अगली अपॉइंटमेंट में आप अपने डॉक्टर से मिलेंगे, तो उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि आपका ब्लड शुगर लेवल बहुत ज़्यादा कम या बढ़ क्यों रहा है.

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2. सभी सवालों की सूचि बनाएं.

डॉक्टर से मिलने और सलाह मशवरा करने से पहले, आपको डॉक्टर से क्या पूछना है, उन सभी सवालों की लिस्ट बनाएं. ऐसा करने से आप डॉक्टर से जो भी पूछना चाहते हैं,उसे याद रख सकेंगे. हम आपको यहाँ कुछ सवाल दे रहे हैं, जिसे आप अपने सवालों की लिस्ट में शामिल कर सकते हैं:

  • मेरा डायबिटीज़ पर नियंत्रण कैसा है? क्या मुझे अपने आहार और एक्सरसाइज़ में किसी तरह के बदलाव लाने की ज़रूरत है?
  • क्या मुझमें डायबिटीज़ से जुड़ी जटिलताओं जैसे हाई ब्लड प्रेशर, किडनी ख़राब होने, हार्ट या आँखों के ख़राब होने के आसार नज़र आ रहे हैं?
  • क्या मुझे डायबिटीज़ से जुड़ी दूसरी बीमारियों के होने का ख़तरा है? अगर है, तो इसे समय से पहले कैसे मालूम करूं?
  • क्या मुझे अपनी दवाओं को बदलने की ज़रूरत है? ( ऐसा तभी पूछें, जब आपको मौजूदा दवाओं से कोई साइड इफ़ेक्ट हुआ हो)

3. लक्षणों को खुलकर बताएं.

डॉक्टर से मिलने पर या उससे पहले आप उन लक्षणों को पता करें और डॉक्टर से शेयर करें, जिसपर आपका ध्यान गया हो. ख़ासकर जब आप ऐसा महसूस करें तो उस समय को भी लिखकर रख लें, यह भी लिखें कि कितने समय में कितनी बार आपको ऐसा महसूस हुआ. यह बहुत ज़रूरी है कि अपने डॉक्टर के सामने आप महसूस किए गए लक्षणों को पूरी ईमानदारी से खुलकर बताएं. भले ही आपको वह कभी-कभार ही क्यों न फ़ील हुआ हो. आपकी इस कोशिश से आपके डॉक्टर को डायबिटीज़ के लिए इलाज में सही फ़ैसले लेने और इन लक्षणों की वजह मालूम करने में मदद होगी.

4. डायबिटीज़ को कितना मैनेज करने की ज़रूरत है, इसका लक्ष्य निर्धारित करें.

मधुमेह से ग्रसित लोगों को इस बात को समझना ज़रूरी है, कि उनका डायबिटीज़ और लाइफ़स्टाइल किस तरह एक दूसरे के आड़े आ रहा है. इसके बाद डायबिटीज़ नियंत्रित रहे, उसी के मुताबिक़ उन्हें अपनी दिनचर्या में बदलाव लाने चाहिए. डायबिटीज़ को मैनेज करने के लिए अगर आपको अपनी लाइफ़स्टाइल में अचानक बहुत से बदलाव लाने पड़ें, तो हो सकता है कि आप ऐसा ना कर सकें.

इसलिए अपने डॉक्टर से जानना शुरू करें कि आपके लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं. लाइफ़स्टाइल को सही बनाए रखना और उसमें बदलाव लाना ही डायबिटीज़ मैनेजमेंट का मूल मन्त्र है. जिससे आप अपने शरीर में सुधार देख सकते हैं.

साथ ही,एक्सरसाइज़ शुरू करने पर, हो सकता है पैर क्यों जलते हैं. ख़ुद से इंसुलिन लेने का कोई दूसरा विकल्प है क्या, हर 2-3 घंटे में आपको भूख क्यों लग जाती है, जैसे छोटे से छोटे सवाल, जिनका सामना आप अपनी रोज़ाना की ज़िन्दगी में करते हैं उसकी चर्चा अपने डॉक्टर से करें. क्योंकि आपके इन सभी सवालों का सबसे बेहतर जवाब और सुझाव सिर्फ़ आपका डॉक्टर दे सकता है.

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5. डायबिटीज़ टूल्स जैसे: डाइट चार्ट्स के बारे में पूछें.

ऐसे कई साधन मौजूद हैं, जो आपके डायबिटीज़ मैनेजमेंट को आसान बना सकते हैं. जैसे कि आप डायबिटीज़ डाइट, एक्सरसाइज़, ब्लड शुगर मॉनिटरिंग, इंसुलिन इंजेक्शन कैसे लें, इस तरह की जानकारियों का, लो ब्लड शुगर और हार्ट डिज़ीज़ के ख़तरे को कम कैसे करें वग़ैरा की अहम चीजों के चार्ट्स जैसे डायबिटीज को नियंत्रित करने वाले साधनों के बारे में पूछें.

अपने आप को बहुत ज़्यादा इधर-उधर से मिली हुई जानकारियों में उलझाने के बजाय, आप अपने डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए कौन सी जानकारी ज़रूरी है, जो आपकी रोज़ाना की ज़िन्दगी में यूज़फुल हो.

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6. मालूम करें कहीं आपके बच्चें में भी डायबिटीज़ होने के आसार हैं क्या.

आपको डायबिटीज़ है तो ज़रूरी नहीं कि आपके बच्चों को भी डायबिटीज़ हो. जिन बच्चों का वज़न ज़्यादा हो, शारीरिक एक्टिविटीज़ कम हो और फ़ैमिली हिस्ट्री में डायबिटीज़ शामिल हो तो उन्हें डायबिटीज़ होने का ख़तरा ज्यादा होता है. याद रखें, भले ही डायबिटीज़ जीवनभर रहता है पर इसे कंट्रोल किया जा सकता है.

डायबिटीज़ मैनेजमेंट के लिए आहार से लेकर व्यायाम तक, सभी मामलों में आप अपने डॉक्टर की सलाह लेकर लाइफ़स्टाइल मैनेजमेंट का बेहतर प्लान बना सकते हैं.

फ़ोटो साभार: Shutterstock

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