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दुनिया भर में बड़ी तादाद में लोग डायबिटीज़ यानि मधुमेह से प्रभावित हैं और स्टडीज़ के मुताबिक़ आने वाले सालों में यह तादाद और ज़्यादा बढ़ने की उम्मीद है.1 टाइप-2 मधुमेह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें आपके ब्लड ग्लुकोज़ का लेवल लगातार ज़्यादा बना रहता है. यूं तो यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन आमतौर पर यह अधेड़ उम्र और उम्रदराजलोगों में दिखाई देता है.2 

जब मधुमेह कंट्रोल में नहीं होता, तो ख़ून में ग्लूकोज़ बढ़ने लगता है. कई स्टडीज़ में डिमेंशिया के बड़े जोखिमों का संबंध ब्लड ग्लूकोज़ के हाई लेवल से जोड़ा गया है. इस आर्टिकल में बताया जाएगा कि टाइप-2 डायबिटीज़ और डिमेंशिया के जोखिम के बीच क्या संबंध है.

डिमेंशिया क्या है?

डिमेंशिया अलग-अलग तरह की ख़ास मेडिकल कंडीशन के साथ एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्या है. डिमेंशिया की समस्या दिमाग़ में ऐसे बदलावों की वजह से होती है, जो सामान्य नहीं होते. इन बदलावों की वजह से व्यक्ति की सोचने-समझने की काबिलियत कम होने लगती है, जिससे उनकी रोजमर्रा की ज़िंदगी पर असर पड़ता है और उन्हें अपने रोज़ाना के सामान्य कामों के लिए दूसरों का सहारा लेना पड़ता है.4 डिमेंशिया की अहम वजहों में चोट लगना और बीमारियां होना शामिल हैं. वैस्कुलर डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर्स डिसीज़, डिमेंशिया के सबसे आम रूप हैं.5

डिमेंशिया के संकेत और लक्षण इस प्रकार हैं:5

  • कुछ समय के लिए सबकुछ भूल जाना
  • बातचीत करने और संपर्क करने में मुश्किल होना
  • कुछ सीखने, जोड़ने-घटाने और समझ पाने में परेशानी
  • व्यक्तिगत देखभाल में किसी दूसरे की मदद लेना
  • व्यवहार में बदलाव होना
  • समय और जगह से अनजान होना
  • चलने में कठिनाई होना

टाइप-2 डायबिटीज़ डिमेंशिया के ख़तरे को कैसे बढ़ाता है?

टाइप-2 डायबिटीज़ का संबंध खून में बहुत ज़्यादा शुगर जमा होने यानी हाई ब्लड शुगर लेवल से होता है, जिसका दिमाग़ पर असर पड़ सकता है. इससे अल्ज़ाइमर्स डिसीज़ हो सकती है, जिसका आगे चलकर डिमेंशिया का कारण बनना एक सामान्य बात है.6

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टाइप-2 डायबिटीज़, डिमेंशिया का ख़तरा कैसे बढ़ाता है, इसके संभावित पैथोफ़िज़ियोलॉजिकल मैकेनिज़्म हैं:6-8

  • डायबिटीज़, स्ट्रोक के लिए एक जाना-पहचाना जोख़िम है. चयापचय को प्रभावित करने वाली कई दूसरी कंडीशन के साथ मिलकर टाइप-2 डायबिटीज़ दिमाग़ की केशिकाओं की झिल्लियों को मोटा कर सकता है और माइक्रोवैस्कुलर बदलाव ला सकता है, जो दिमाग़ में इस्कामिया (दिमाग़ को ख़ून और ऑक्सीजन पहुंचने में कमी) की वजह बनता है. इस्कामिया से समझ-बूझ की क्षमता पर असर पड़ सकता है.  
  • ब्लड ग्लुकोज़ के हाई लेवल से सूजन हो सकती है, जिससे दिमाग़ की कोशिकाएं ख़राब हो सकती हैं और यह अल्ज़ाइमर्स डिसीज़ की वजह बन सकता है.
  • टाइप-2 डायबिटीज़ की शुरुआती स्टेज का संबंध ब्लड में इंसुलिन के हाई लेवल से होता है. ख़ून में इंसुलिन का ज़्यादा बढ़ा हुआ लेवल समझ-बूझ की क़ूवत के नुक़सान की रफ़्तार को तेज़ कर सकता है और डिमेंशिया का कारण बन सकता है.

डिमेंशिया का इलाज क्या है?

फ़िलहाल डिमेंशिया को ठीक करने या इसे बढ्ने से रोकने के लिए कोई खास इलाज मौजूद नहीं है. हालांकि, क्लिनिकल ट्रायल के ज़रिए नई दवाओं पर जांच चल रही है. इतना ज़रूर है कि देखभाल करने वाले और परिवार के सदस्य डिमेंशिया से प्रभावित लोगों का सहयोग कर उनके जीवन में सुधार ला सकते हैं. कंडीशन पर कंट्रोल करने लिए पहला लक्ष्य शारीरिक बीमारी और व्यवहार से जुड़े लक्षणों का जल्दी पता लगाना और इलाज करना होता है.5

डॉक्टर डिमेंशिया की पहचान कैसे करेंगे और क्या टाइप -2 मधुमेह में इसे रोक पाना मुमकिन है?

डिमेंशिया के लिए कोई ख़ास टेस्ट नहीं है. हालांकि, डॉक्टर प्रभावित व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच, लैब की जांचों और सोचने की क़ूवत में आए ख़ास बदलावों की जांच करके कंडीशन की पहचान कर सकते हैं.

हालांकि रिसर्च स्टडीज़ ने यह निश्चित नहीं किया है कि टाइप-2 डायबिटीज़ और डिमेंशिया होने के बीच कोई संबंध है ही, लेकिन इस बात के सुबूत मिले हैं कि कैसे बढ़ा हुआ ब्लड ग्लुकोज़ लेवल और इंसुलिन दिमाग़ के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए ब्लड ग्लुकोज़ का लेवल हेल्थी बनाए रखने से डिमेंशिया होने के ख़तरे को कम करने में मदद मिल सकती है.

लाइफ़स्टाइल में नीचे दिए गए बदलाव लाने से आपको अपने ब्लड ग्लुकोज़ लेवल को मैनेज करने में मदद मिल सकती है:2,3

  • वज़न कम करें: अगर आपके शरीर का वज़न ज़्यादा है, तो 5 से 7% वज़न कम करके डिमेंशिया की शुरुआत को रोका या कुछ समय के लिए टाला जा सकता है.
  • खान-पान सही रखें: खान-पान पर कंट्रोल रखने के लिए कार्बोहाइड्रेट और मीठी चीजों में कमी लाएं और बहुत ज़्यादा मात्रा में ना खाएं.
  • फ़िज़िकल तौर पर एक्टिव रहें: खाना खाने के बाद टहलें या हफ़्ते में पांच दिन कम से कम 30 मिनट तक ब्रिस्क वॉक यानि तेज कदमों से चलें.

अपने ब्लड ग्लुकोज़ लेवल पर कंट्रोल करके आप डिमेंशिया और हेल्थ से जुड़ी कई दूसरी समस्याओं से बचे रह सकते हैं!


संदर्भ:

  1. Matioli MNPDS, Suemoto CK, Rodriguez RD, Farias DS, da Silva MM, Leite REP, et al. Association between diabetes and causes of dementia: Evidence from a clinicopathological study. Dement Neuropsychol. 2017 Oct-Dec;11(4):406-412.
  2. National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases [Internet]. [updated 2017 May; cited 2019 Dec 19]. Available from: https://www.niddk.nih.gov/health-information/diabetes/overview/what-is-diabetes/type-2-diabetes.
  3. Harvard Health Publishing. Above-normal blood sugar linked to dementia [Internet]. [updated 2013 Aug 7; cited 2019 Dec 19]. Available from: https://www.health.harvard.edu/blog/above-normal-blood-sugar-linked-to-dementia-201308076596.
  4. Alzheimer’s Association. What is dementia? [Internet]. [cited 2019 Dec 19]. Available from: https://www.alz.org/alzheimers-dementia/what-is-dementia.
  5. World Health Organization. Dementia [Internet]. [updated 2019 Sep 19; cited 2019 Dec 19]. Available from: https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/dementia.
  6. Alzheimer’s Association. Alzheimer’s disease and type-2 diabetes [Internet]. [cited 2019 Dec 19]. Available from: https://www.alz.org/national/documents/latino_brochure_diabetes.pdf.
  7. Biessels GJ, Staekenborg S, Brunner E, Brayne C, Scheltens P. Risk of dementia in diabetes mellitus: a systematic review. Lancet Neurol. 2006 Jan;5(1):64-74.
  8. Gudala K, Bansal D, Schifano F, Bhansali A. Diabetes mellitus and risk of dementia: a meta-analysis of prospective observational studies. J Diabetes Investig. 2013 Nov 27;4(6):640-650.

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