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सुप्रिया गोपालन सुबह के चाय का आनंद यह सोचते हुए उठा रही थीं कि उनके 45 वें जन्मदिन पर उन्हें यूंही चक्कर आ गया होगा. और इस तरह उन्होंने इस बात को बहुत आसानी से नज़रअंदाज़ कर दिया. कुछ दिनों के बाद उन्होंने कुछ ऐसी चीज़ें नोटिस कीं जो पहले उनके साथ नहीं होती थी जैसे  तेज़ प्यास लगना, बार-बार पेशाब होना और सोने में दिक्कत होना. इसके आलावा उनका वज़न भी सामान्य से ज़्यादा था. उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया और कुछ टेस्ट के बाद पता चला कि उन्हें टाइप 2 डायबिटीज़ मेलिटस (T2DM) है. अचानक से ये बात पता चलने से वो काफी तनाव में आईं और इसका उन पर न सिर्फ मानसिक तौर पर बल्कि भावनात्मक तौर पर भी असर हुआ. उनकी उम्र सिर्फ 45 साल है और अपनी ज़िंदगी या अपनी सेहत के सिलसिले में ये बातें सुनने के लिए तैयार नहीं थी.

इन डायबिटीज़ केयर टिप्स के साथ डायबिटिक भी जी सकते हैं आम लोगों की तरह ख़ास ज़िंदगी!

बहुत से लोग जिन्हें हाल ही में मधुमेह होने की बात पता चलती है, वे बेचैन हो उठते हैं और उनकी ज़िंदगी थोड़ी अस्त-व्यस्त हो जाती है. लेकिन डायबिटीज़ विशेषज्ञ और डॉक्टर मानते हैं कि ऐसा नहीं होना चाहिए. सलाहकार एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया, SIMS हॉस्पिटल (चेन्नई) के एक सदस्य, डॉक्टर रविकिरन एम. का कहना है कि, “डायबिटीज़ से डरने या परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. यह ऐसी स्थिति है जिसे आसानी से मैनेज किया जा सकता है और सही डाइट, एक्सरसाइज़ और दवाओं को फ़ॉलो करके इसे ठीक भी किया जा सकता है. डायबिटीज़ के बारे में पता चलने पर काउंसलिंग के ज़रिए इस बीमारी के लिए मानसिक तौर पर तैयार होना पहला कदम है.” 

जब आपको डायबिटीज़ होने की बात पहली बार पता चलती है, तो आपको क्या करना चाहिए और आप क्या-क्या कर सकते हैं, वो बातें यहां बताई गई हैं:

1. अपने टेस्ट्स का ट्रैक रखें:

डॉक्टर आम तौर एक तय समय में ब्लड शुगर की जांच करते हैं. अगर आपके डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट करने के लिए कहें, तो उसे बिल्कुल भी नज़रंदाज़ न करें. शुगर के लिए किए जाने वाले अहम टेस्ट या जांच में शामिल हैं: खून में मौजूद हीमोग्लोबिन/कोलेस्ट्रॉल; ब्लड प्रेशर; शुगर की जांच करने के लिए मूत्र/यूरिया टेस्ट, मूत्र में मौजूद कीटोन्स और एल्ब्यूमिन; आंखों, पैरों, नसों और दिल का टेस्ट; डाइट और वज़न का मूल्यांकन. इन टेस्ट से ऐसी अहम जानकारी मिलती है जिससे आपको सेहतमंद बने रहने में मदद मिलती है, जैसे यह बात पक्की करना कि आपके मूत्र का रंग अभी भी बेरंग होने की जगह पीला है और ये जानना कि किन चीज़ों को खाने से बचना है.

2. दवाओं को समय पर खाएं:

डायबिटीज़ का संबंध हमारे शरीर के सिस्टम से होता है और हर शरीर अलग होता है. समान दवा और खुराक का असर दो अलग-अलग लोगों पर एक जैसा नहीं होता, उनका शरीर एक-दूसरे से बिलकुल अलग तरह से रिएक्ट करता है. यही वजह है कि डायबिटीज़ के लिए कोई एक इलाज उपलब्ध नहीं है. आपके टेस्ट के आधार पर आपके डॉक्टर आपको दवा और खुराक प्रिस्क्राइब करते हैं. आपको बताया जाता है कि इसे कब और कैसे खाया जाए. डॉक्टर आपके ब्लड शुगर और इंसुलिन स्राव को देखते हुए खुराक तय करते हैं और इसे सही होने में कुछ समय लगता है. डॉक्टर रविकिरन कहते हैं कि, “T2DM एक ख़ास कैटेगरी के अंदर आता है. फिलहाल डायबिटीज़ की 13 कैटेगरी मौजूद हैं.” वो आगे ये भी कहते हैं कि अपने डॉक्टर के बताए गए सलाह को फ़ॉलो करें और बेफ़िक्र हो जाएं.

इसे भी जानें: Diabetes Care: वो 6 टेस्ट जो डायबिटीज़ का पता लगाते हैं

3. सेहतमंद चीज़ें खाएं:

आप अपनी दवाओं और टेस्ट की बात को अपने डॉक्टर पर छोड़ सकते हैं, लेकिन एक ऐसी भी चीज़ है जो आपके हाथों में है और वो है अपने खान-पान को कंट्रोल में रखना. तली हुई, मसालेदार, मीठी और बहुत ज़्यादा नमक वाली चीज़ें खाने से बचें. इसके साथ ही बहुत ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीज़ें, मीठे फल न खाएं और दूध न पीएं. ज़्यादा प्रोटीन, वाईट व बिना फ़ैट वाला मांस और बाजरा, फ़ाइबर जैसे कॉम्प्लेक्स कार्ब्स को अपनी डाइट में शामिल करें. आपके कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल में रखने और लीवर को सेहतमंद बनाए रखने के लिए डाइट की भूमिका बहुत ज़्यादा अहम होती है. MRC मेडिकल सेंटर के डायबिटिक और हार्ट विंग के अनुसार हर दिन एक ही समय पर खाना खाने और बताए गए समय पर दवा लेने से आपकी बीमारी को बहुत बेतरीन तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है.

क्या खाना चाहिए: 

डायबिटीज़ वाले लोगों को अनाज और सीरियल खाने से मना किया जाता है और बहुत मुश्किल डाइट से भी बचने के लिए कहा जाता है. आपकी डाइट में ये चीज़ें शामिल होनी चाहिए:

  • 50 से 60 प्रतिशत कार्ब्स: ये फल, सब्ज़ियों या अनाज से मिल सकता है (न्यूट्रीएंट्स के लिए सभी फल खाएं, बस ध्यान रखें कि वो बहुत ज़्यादा मीठे न हों).
  • 20 से 25 प्रतिशत प्रोटीन: ये दाल, फलियों या बिना फ़ैट वाले मांस में मौजूद होता है.
  • 10 से 15 प्रतिशत फ़ैट: ये फली, मछली, तेल (पीनट का तेल, सीसम का तेल, सूरजमुखी का तेल, MUFA और PUFA के लिए कोड-लीवर का तेल) से मिल सकता है. महीने भर में अलग-अलग चीज़ों से मिलने वाले आधे लीटर तेल के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है. 
  • खाने की लोकल चीज़ों का भी मज़ा लें लेकिन संयम और संतुलन के साथ.

    4. सतर्क रहें:

आम तौर पर हर तीन महीने में डायबिटीज़ चेक करने की सलाह दी जाती है. इसे नियमित तौर पर कराएं और अपने डॉक्टर के बताए गए दिन पर ही टेस्ट कराएं.

5. एक्सरसाइज़ और लाइफ़स्टाइल:

आपको एक्सरसाइज़ को सबसे ज़्यादा अहमियत देनी चाहिए और इससे आपको बहुत ज़्यादा बेहतर महसूस होगा. हाई एक्टिविटी लेवल का मतलब है ज़्यादा शुगर बर्न करना और शुगर के चयापचय और खून में इसके लेवल को सेहतमंद बनाए रखने के लिए यह बहुत ज़रूरी है. “हर दिन 20 से 30 मिनट चहलकदमी करना, जिम में बिताना या दिन भर में कुछ न कुछ एक्टिविटी करना, T2DM को कंट्रोल करने के लिए बहुत बेहतर होता है”, ऐसा कहना है डॉक्टर रविकिरन का. चेन्नई में मौजूद डायबिटीज़ केयर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार डाइट और एक्सरसाइज़ के साथ शरीर के सही वज़न को मेंटेन करने की बहुत अहमियत होती है. सबसे पहले इस फ़ॉर्मूला का इस्तेमाल करके अपने शरीर के सही वज़न को तय करें:(सेमी में ऊंचाई -100) 0.9 से गुना; फिर हर दिन खुद का वज़न करें और अपने एक्सरसाइज़ रेजीम की निगरानी करें. अगर आपको अपना वज़न कम करना है, तो जितनी कैलोरी आप खाते हैं उससे यकीनन आपको ज़्यादा कैलोरी बर्न करनी होगी.

इसे भी देखें: कभी इंसुलिन लेना भूल जाएं तो उठाएं ये क़दम

6. शांत रहें और नींद पूरी करें:

बेचैन होने से आपका ब्लड शुगर बढ़ता है जिससे इंसुलिन के बनने में बाधा पहुंचती हैं और फिर आगे चलकर आपका डायबिटीज़ बढ़ जाता है. अपने स्ट्रेस को कम करने के तरीके ढूँढें या ऐसे काम करें जिससे आपको बेहतर महसूस होता हो. डायबिटीज़ वाले लोगों की नींद सही तरह से पूरी न होने पर उनका ब्लड ग्लूकोज़ बढ़ सकता है और बढ़े हुए ब्लड ग्लूकोज़ लेवल से और ज़्यादा नींद नहीं आती. अपने डॉक्टर की सलाह मानें और अच्छी तरह आराम करने के लिए उनके सभी टिप्स को अपनाएं. नींद के साथ कभी भी समझौता न करें और कम से कम छः से आठ घंटे की नींद पूरी करें. 

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