Unhealthy habits for diabetes
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कंटेंट की समीक्षा,अश्विनी एस कनाडे ने की है, वे रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहीं हैं.

अगर आप कुछ समय से डायबिटीज़ के साथ जी रहे हैं, तो बेहतर सेहत के लिए आपने अपनी लाइफ़स्टाइल में अब तक कई सारे बदलाव किए होंगे. वहीं, अगर आपको हाल ही में ख़ुद के टाइप 2 डायबिटीज़ से प्रभावित होने की जानकारी मिली हो, तो आप डायबिटीज़ से जुड़ी तमाम तरह की जानकारी के पुलिंदे पर बैठे सोच रहे होंगे कि आपको क्या चीज़ें करनी चाहिए और किन चीज़ों से बचना चाहिए. डायबिटीज़ जैसी परेशानी से निपटने के लिए हम कई ‘सेहतमंद’ आदतें अपनाते हैं और कभी-कभी पुरानी ‘बुरी’ आदतों से पल्ला भी झाड़ लेते हैं.

कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिनपर लोग आँख बंद करके भरोसा कर लेते हैं. पर ज़रूरी नहीं कि हर सलाह सभी के काम आए. सिर्फ़ इसलिए क्योंकि सभी लोग किसी चीज़ के बारे में बताते रहते हैं, इसका मतलब यह तो नहीं कि वह चीज़ वाक़ई काम करती हो. हमने कुछ ऐसी चीज़ों पर नज़र दौड़ाई जिसे डायबिटीज़ से प्रभावित लोग अक्सर अपनाते हैं. ये ऐसी चीज़ें हैं जो देखने में तो सही लगती हैं, पर इनसे फ़ायदा कम, नुक़सान कहीं ज़्यादा है.

1. एक्सट्रीम/फ़ैड डायटिंग

आपने शायद सुना होगा कि ज़्यादा वज़न से डायबिटीज़ बढ़ता है. हो सकता है इसे सुनकर आपने अपना वज़न कम करने की ठानी हो और फ़ैड डायटिंग का रास्ता अपनाया हो. फ़ैड डायटिंग एक ऐसी डायट होती है जिसमें कम समय में वज़न तेज़ी से कम करवाने का वादा किया जाता है. पर रुकिए! इसमें कोई दो राय नहीं कि फ़ैड डायटिंग से वज़न कम होता है. ये भी हो सकता है कि आप थोड़ी मेहनत और करें और अपने रूटीन में कसरत भी शामिल कर लें.पर एक बार डायटिंग छोड़ने के बाद जब आप वापस पुराने रूटीन पर लौटेंगे तो आपका वज़न बेशक न बढ़े, पर पुराने वज़न जितना तो ज़रूर हो जाएगा.  

इस तरह की डायटिंग की सलाह न देने की सबसे आम वजह ये है कि यह अपने आप में बहुत एक्सट्रीम चीज़ है. इसे ज़्यादा समय तक नहीं किया जा सकता, ज़िंदगीभर तो क़तई नहीं. इस डायटिंग से आपके शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे आपकी सेहत पर बुरा असर हो सकता है. यह भी हो सकता है कि डायबिटीज़ से जुड़ी कॉम्प्लिकेशन बढ़ जाए.

इसके बजाय, अपने खाने में छोटे-छोटे बदलाव करें, जिन्हें आप लंबे समय तक अपना सकें. पर्याप्त पोषण मिलने के साथ वज़न में धीरे-धीरे असरदार तरीक़े से कमी लाना आपका लक्ष्य होना चाहिए.

2. खाना न खाना

अगर आपसे जानबूझकर या ग़लती से खाना खाना रह जाता है, तो आप अपने आपको समझाते हैं कि कम खाने से वज़न कम होगा. पर ऐसा होता नहीं है, बल्कि खाना न खाने से आप हाइपोग्लाइसीमिया या हाइपरग्लाइसीमिया के शिकार हो सकते हैं. आप थकान, उलझन और वज़न में भी बढ़ोतरी महसूस कर सकते हैं.

आपको किसी भी हाल में खाना खाना छोड़ना नहीं चाहिए. अगर किसी दिन खाना खाने में देर होने वाली हो या आपको लगे कि शायद आज खाने का वक़्त नहीं मिल पाएगा, तो अपने साथ नाश्ता या कुछ स्नैक्स ले जाएँ. इसके लिए कोई भी सेहतमंद, आसानी से खाया जा सकने वाला ताज़ा नाश्ता आपके लिए एकदम सही और भूखे रहने से बेहतर है.

3. कम खाना

इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है पर आइए एक बात साफ़ कर लें कि सबसे अहम बात पर्याप्त मात्रा में संतुलित खाना खाना है. आम तौर पर किसी भी सामान्य व्यक्ति को अपनी भूख का 80% तक खाना खाना चाहिए. इससे ज़्यादा खाना खाने से आपके सिस्टम पर दबाव पड़ता है. अगर आप बहुत कम खाना खाते हैं, तो इससे पूरे पोषक तत्व नहीं मिल पाएंगे और आप थकान या कमज़ोरी महसूस करेंगे.  

4. कार्बोहाइड्रेट में कमी करना

इस बात में कोई शक नहीं कि कार्बोहाइड्रेट में शुगर होता है और आपके लिए इससे दूरी बनाए रखना ज़रूरी है. हालाँकि, डायबिटीज़ होने पर भी आपके शरीर को बाक़ी चीज़ों की तरह ही शुगर की भी ज़रूरत होती है. आपको अपने खाने में शुगर या कार्बोहाइड्रेट कम करने चाहिए पर इसे एकदम से हटा देना ठीक नहीं है. आप साबुत अनाज जैसे कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट खा सकते हैं, जो सेहत के लिए ठीक होते हैं. किसी फ़ूड ग्रुप को पूरी तरह अनदेखा न करें. इसकी जगह ज़्यादा प्रोटीन और फ़ाइबर वाला कार्बोहाइड्रेट अपने खाने में शामिल करें. इससे आप कम खाना खाकर भी भूख नहीं महसूस करेंगे.

5. लो शुगर वाली चीज़ें इस्तेमाल करना

अगर पैकेट के सामने वाले कवर पर ‘लो शुगर’ लिखा हो, तो पैकेट को पीछे पलटकर ज़रूर देखें. खाने की किसी चीज़ पर लो शुगर लिखे होने का मतलब शुगर की आम मात्रा से कम शुगर होना नहीं होता. खाने से जुड़ी चीज़ों को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए उनमें शुगर के साथ ही कई तरह के प्रिज़रवेटिव मिलाए जाते हैं. जिसका मतलब है कि शुगर किसी न किसी रूप में मौजूद है.

साथ ही जब हमें इस बात का भरोसा हो जाता है कि किसी चीज़ में शुगर कम है, तो हम अक्सर अपने आपको थोड़ा-सा और खाने से नहीं रोक पाते. हमें लगता है कि थोड़ा-सा खा लेने से कोई नुक़सान नहीं होगा. इसके बजाय अपने पसंदीदा खाने के बेसिक वर्शन पर टिके रहें, पर जितना आपको खाने की सलाह दी गई है, उतना या उससे थोड़ा कम खाएँ.

6. प्रोसेस करके पैक की गई खाने की चीज़ें

इसमें पैक किए गए मीट, फ़्रोज़न पिज़्ज़ा, रेडी टू ईट (पका पकाया तैयार खाना) और यहाँ तक कि आपके चिप्स के पैकेट भी शामिल हैं. खाने की ऐसी कोई भी चीज़ जिसे अलग से पकाने की ज़रूरत नहीं होती या जिसमें फ़ैक्ट्री से ही सोडियम और शुगर जैसी चीज़ें मिली हों, उनसे जितना हो सके बचें. ये चीज़ें आपको या तो कम या फिर किसी भी तरह का पोषण नहीं देतीं, बल्कि आपके शरीर में कुछ गंभीर असंतुलन पैदा कर सकती हैं.

इसी तरह ताज़े फल की जगह जूस पीना, ताज़े पेय पदार्थ के बदले पैक की गई चीज़ों का इस्तेमाल और रेडीमेड सॉस उपयोग में लाना कुछ ऐसी आदतें हैं जिनसे जितनी जल्दी दूरी बना लें, उतना बेहतर. फिर चाहे आपको डायबिटीज़ हो या न हो.

7. आर्टिफ़िशियल स्वीटनर का इस्तेमाल करना

इसमें कोई दो राय नहीं कि आपको ज़्यादा शुगर की ज़रूरत नहीं है और इसकी जगह कोई दूसरा सेहतमंद विकल्प इस्तेमाल करना बेहतर है. बशर्ते यह विकल्प आर्टिफ़िशियल स्वीटनर न हो. एफ़डीए ने कुछ आर्टिफ़िशियल स्वीटनर की वैरायटी को मान्यता दी है. पर ध्यान रखें कि आपको इनके ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल से बचना है. हमें लगता है कि ये असली शुगर से बेहतर हैं, तो इनका ज़्यादा इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इनसे बचें और इनकी जगह शहद या स्टीविया का इस्तेमाल करें.

डायबिटीज़ को क़ाबू में रखना इतना भी मुश्किल नहीं है. बस, खाने-पीने का सही तरीक़ा और सेहतमंद आदतें अपनाएँ और साथ ही बेहतरीन स्वास्थ्य के लिए बुरी आदतों से अपना पीछा छुड़ाएँ.

वीडियो देखें: ब्लड शुगर को कम कैसे करें?

 

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