When should you reveal your diabetic status
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आपने कभी न कभी ये कहावत ज़रूर सुनी होगी कि कुछ लोग खाने के लिए जीते हैं और कुछ जीने के लिए खाते हैं. ये बात ख़ास करके उन लोगों पर लागू होती है जो अपने काम की दीवानगी में या मजबूरी में अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते. भले ही आप खाने के शौक़ीन हों या न हों, अगर आप अपनी सेहत पर ही ध्यान नहीं दे पाते, तो ऐसे काम का क्या फ़ायदा. तेज़ी से भागती-दौड़ती ज़िंदगी में अपने लिए वक़्त निकालना किसी चुनौती से कम नहीं. आइए हम आपको बताते हैं कि किस तरह आप अपनी व्यस्तता के बीच थोड़ा सा वक़्त चुराकर ऑफ़िस में भी अपना ख़याल रख सकते हैं.

1. समझदारी से करें दिन की शुरुआत

ऑफ़िस जाने की तैयारी में कुछ चीज़ों पर ज़रूर ग़ौर करें. जैसे कि- आपकी नींद पूरी हुई हो. आप इतने वक़्त पहले उठे कि अफ़रा-तफ़री में नहीं बल्कि शांत दिमाग से तैयार हो सकें. सुबह का वक़्त मैडिटेशन, योग, जिम जैसी एक्टिविटी के लिए काफ़ी अच्छा होता है. शारीरिक एक्टिविटी सुबह ही कर लेने से आप दिनभर फ़्रेश और एनर्जेक्टिक महसूस करेंगे. सुबह हेल्दी नाश्ता करना न भूलें. ऐसा करने से आपके तनाव, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर लेवल पर नियंत्रण बना रहेगा. रास्ते में पीने के लिए पानी की बोतल रख लें.

2. सीनियर से कुछ बातें न छुपाएं

काम के दबाव के चलते अक्सर हम खाना या नाश्ता नहीं कर पाते. लेकिन मधुमेह जैसी परेशानी से प्रभावित लोगों को वक़्त पर खाना-पीना चाहिए. इसलिए बेझिझक अपने सीनियर या सह कर्मचारी को अपनी सेहत की जानकारी दें. जिससे आप काम के बीच अपनी दवा, लंच और नाश्ता खा सकें. इसके अलावा हाइपोग्लाइसिमिया या अस्थमा जैसे अटैक आने पर आपको बुनियादी मदद मिल सके. अगर आपके सीनियर आपकी सेहत को गंभीरता से न लें, तो डॉक्टर से ज़रूरी हिदायतों की पर्ची लिखवाकर उन्हें दिखा सकते हैं.

3.लालच पर क़ाबू रखें 

ऑफ़िस में सालगिरह, जन्मदिन की पार्टी में खाने की ढेर सारी लजीज़ चीज़ें मौजूद होती है. पर अफ़सोस कि इनमें ज़्यादातर चीज़ें स्वादिष्ट तो होती हैं पर सेहत के लिए ठीक नहीं होती. इसलिए बाक़ियों की तरह आप इन पर ना टूट पड़ें, बल्कि सही चीज़ें चुनें. बड़ी छूट का फ़ायदा उठाने के लिए ऑनलाइन कुछ भी मंगवाने से बचें. बेहतर होगा कि आप घर पर बनी चीज़ें अपने साथ रखें, जिससे खाने पर सबके साथ बैठें भी तो नुक़सानदायक चीज़ें खाने से बच जाएं.  

4.खाना और नाश्ता साथ रखें

कैंटीन या आपके कलिग आपके मुताबिक़ खाना नहीं परोस पाएंगे, परेशानी आपकी है तो इसका ख़याल भी आपको ही रखना होगा. इसलिए दिनभर जो भी खाना हो, सभी चीज़ें घर से लेकर ऑफ़िस जाएं. अपनी टिफ़िन में फ़ाइबर युक्त सब्ज़ी, सलाद, दाल, दही, मल्टीग्रेन आटे की रोटी जैसी चीज़ों को तरजीह दें. स्नैक्स में तली-भुनी चीज़ों के बजाय लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल, सूखे मेवे या अंकुरित अनाज वग़ैरह खाएं. पीने के लिए मिल्क टी, कॉफ़ी के बजाय ग्रीन टी, नींबू पानी वग़ैरह पिएं. कुछ मीठा खाएं भी तो शक्कर के दूसरे विकल्प चुनें. अक्सर हम बातों-बातों में खो जाते हैं और खाने की मात्रा का ध्यान ही नहीं रहता. इसलिए खाते वक़्त पोर्शन साइज़ और पोर्शन कंट्रोल इन दो बातों को ध्यान में रखें.

5.हर 30 मिनट के बाद कुछ पल ख़ुद को दें

आप डेस्क जॉब करते हैं, तो आपको होशियारी के साथ काम के बीच में कुछ पल फिज़िकल एक्टिविटी के लिए निकालने होंगे. हर 30 मिनट के बाद आप कुर्सी से उठकर कुछ चहल-कदमी करने की आदत बना लें. आप टाइमर की मदद ले सकते हैं. ऑफ़िस से आने-जाने के लिए लिफ़्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. ऑफ़िस बॉय से पानी न मंगवाकर ख़ुद अपनी बोतल भरें. आमने-सामने या फ़ोन पर चर्चा करते समय खड़े होने या चलने का मौका तलाशें. लंच-ब्रेक या स्नैक ब्रेक में बैठने की बजाय जितना हो सके टहलें. कुर्सी पर बैठे-बैठे बॉडी स्ट्रेच करें. कुछ मिनट गहरी सांस लेते हुए शांत बैठें.  

ज़रूरी बात: पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें.

6.आपात स्थितियों के लिए हमेशा तैयार रहें

डायबिटीज़ या अस्थमा जैसी परेशानियों में कई बार अचानक तबियत बिगड़ जाती है. लिहाज़ा सेहत से जुड़ी एमरजेंसी में काम आने वाली इंसुलिन, मीठी गोली, इनहेलर जैसी चीज़ें अपने पास रखें.

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7.जांच और डॉक्टर से मिलने का कैंलेंडर बनाएं

कई बार ऑफ़िस में छुट्टी लेने पर बड़ा तमाशा हो जाता है या सारा तय शेड्यूल बिगड़ जाता है. इसलिए डॉक्टर से कब-कब मिलना है, कब कौन से जांच करवाने हैं, इन सारी बातों का कैलेंडर बना लें. कोशिश करें कि जांच और विज़िट का समय आप छुट्टियों के दौरान शेड्यूल करें. लेकिन ऐसा मुमकिन न हो पाए, तो पहले से छुट्टी की अर्जी दे दें. जिससे आपको अपने काम या इलाज के साथ समझौता न करना पड़े.

8.परेशानी आसान तरीक़े से बयां करें

मुमकिन है, कुछ लोग आपके एहतियातों पर सौ सवाल पूछें और आपसे स्पष्ट बोलते न बने. ज़रूरी नहीं आपकी तकलीफ़ सभी को समझ आए, पर आपको तो ज़रूरत है कि कुछ मामलों में वे आपके साथ को-ऑपरेट करें. ऐसे में आप आसान तरीक़े से कम से कम शब्दों में उन्हें समझाने की कोशिश करें. जैसे कि अगर आपको टाइप 2 डायबिटीज़ है तो आप सीधे कहें कि ‘मुझे टाइप 2 डायबिटीज़ है, इसलिए मैं ज़्यादा मीठा नहीं खा सकता. मुझे अपनी दवाएं इस वक़्त लेने के लिए ब्रेक चाहिए.’

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9.अपनी तबियत पर निगाह रखें

काम के सिलसिले में अगर बाहर जाना पड़े, तो पहले डॉक्टर से ज़रूरी हिदायतों की लिस्ट बनवा लें. देर रात तक मीटिंग या प्रेजेंटेशन करने हों, तब भी खाना,दवा, इंसुलिन आदि के मामले में वक़्त के पाबंद रहें. अगर कभी तबियत ठीक न लग रही हो, तो कैलेंडर पर तारीख़ आने का इंतज़ार न करें, बल्कि फ़ौरन काम से वक़्त निकालकर डॉक्टर से मिलें. महिला कर्मचारी पीरियड्स के लिहाज़ से ज़रूरी चीज़ें अपने साथ रखें या ऑफ़िस में उपलब्ध करवाने के लिए कह दें.

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10.मौजूद सुविधाओं की जानकरी रखें

अपनी सेहत की ज़रूरतें नज़रअंदाज नहीं करनी है. सेहत की देखभाल के लिए ज़रूरी छुट्टियों या सुविधाओं पर आपका पूरा हक़ है. याद रखें तबियत ख़राब होने पर क़ानूनी रूप से आपको छुट्टी पाने का पूरा अधिकार है. ऑफ़िस की तरफ से उपलब्ध फर्स्ट एड या मेडिकल इंश्युरेंस जैसी सुविधाओं से अक्सर लोग अंजान होते हैं. इसलिए आप ऑफ़िस में मिलने वाली हर सुविधा की जानकारी पहले से हासिल कर लें और ज़रूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल करें.

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