Flour atta for diabetes
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कंटेंट की समीक्षा: अश्विनी एस कनाडे, रजिस्टर्ड डाइटीशियन हैं और वो 17 सालों से मधुमेह से जुड़ी जानकारियों के प्रति लोगों को जागरुक कर रहीं हैं.

तथ्यों की जांच: आदित्य नर, बी.फ़ार्मा, एमएससी, पब्लिक हेल्थ एंड हेल्थ इकोनॉमिक्स.

डायबिटीज़ (मधुमेह) के दौरान आपकी सेहत कैसी रहेगी ये आपके खान-पान की आदतों पर भी निर्भर करता है. ये बात तब और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब बात सही आटा चुनने की आती है.

डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों को सही आटा चुनने के दौरान इस बात का ख़याल रखना चाहिए कि वो जिस आटे का चुनाव कर रहे हैं वो तेज़ी से हज़म होने के बदले धीरे-धीरे हज़म हो. उसमें फ़ाइबर की मात्रा अधिक और कार्बोहाइड्रेट्स कम होने चाहिए, जिससे ब्लड शुगर लेवल (रक्त शर्करा) के स्तर को बनाए रखने में मदद मिले.

इन सब मापदंडों को देखते हुए बाज़ार में हमारे सामने आटे की कई तरह की “डायबिटिक फ्रेंडली” क़िस्में देखने को मिलती हैं. जो ये दावा करते हैं कि वो डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों के लिए फ़ायदेमंद है. कई दफ़ा इससे तंग आकर कोई ये सोच सकता है कि आटे से बनी चीज़ें खाना बिल्कुल भी आसान नहीं है.

लेकिन रुकिए, आज हम आपको आटे की उत्तम क़िस्मों और उनके प्रकार के बारे में बता रहे हैं, जो मधुमेह (डायबिटीज़) से ग्रसित लोगों के लिए अनुकूल होते हैं.

डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों के अनुकूल आटा बनाने की सही विधि

दिल्ली स्थित ‘ओबिनो’ में आहार विशेषज्ञ ज्योति सावंत के अनुसार, “डायबिटीज़ से ग्रसित लोगों के लिए मल्टीग्रेन आटे का इस्तेमाल करना फ़ायदेमंद होगा. साबुत अनाज जैसे रागी या नचनी, बाजरा, जौ, सोयाबीन, ज्वार, काबुली चना, रामदाना/राजगीरा को आपस में मिला लीजिये और उसे पीसने के बाद आपका डायबिटिक फ़्रेंड्ली आटा बनकर तैयार है. साबुत अनाज पोषक तत्वों से समृद्ध होता है और इनमें डाइट्री फ़ाइबर के साथ ही कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट अच्छी और उच्च मात्रा में होते हैं. मल्टीग्रेन्स की ये सभी  ख़ूबियाँ इसे ब्लड शुगर और वज़न को नियंत्रित करने के लिए एक बेहतर विकल्प बनाती है.”

घर पर कैसे बनाएं डायबिटीज़ फ़्रेंड्ली आटा
चपाती, फुलका या रोटी एक ऐसी डिश है जो भारत के लगभग हर घर में और हर हिस्से में बनती है. इसे और पौष्टिक बनाने के लिए कई लोग दुकानों से मल्टीग्रेन आटा ख़रीदते हैं, लेकिन आप चाहें तो इसे ख़ुद अपने घर पर बना सकते हैं और ये ताज़ा होने के साथ ही फ़ायदेमंद भी साबित हो सकता है. घर पर बनाए गये मल्टीग्रेन आटे की रोटियों /फुल्कों और चपातियों के स्वाद में भी आप काफ़ी बदलाव महसूस कर पाएंगे.

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ज्योति सावंत द्वारा होममेड मल्टीग्रेन आटा तैयार करने का तरीक़ा कुछ इस प्रकार है. ये पूरी तरह से मिलावट से मुक्त और स्वाद और पौष्टिकता से भरपूर है. 
एक किलो मल्टीग्रेन आटा बनाने के लिए आप उसमें-
बाजरे का आटा – 400 ग्राम
जौ का आटा- 100 ग्राम
सोया बीन का आटा- 150 ग्राम
रागी का आटा- 150 ग्राम
राजगीरा- 100 ग्राम
काबुली चने का आटा- 100 ग्राम.
अब आप बारीक आटे को किसी एयरटाइट कंटेनर में डालकर, ठंडी जगह पर रख सकते हैं. 
लीजिये आपका पौष्टिक मल्टीग्रेन आटा बनकर तैयार है, अब बस रोटियां बनने की देर हैं.

इसे भी पढ़ें: डायबिटिक लोगों के लिए आलू को सेहतमंद कैसे बनाया जा सकता हैै.

आपके आटे को ‘सुपरचार्ज’ करने की सामग्री

क्या आप अपने डाइबिटीज़ फ़्रेंड्ली आटे को और पौष्टिक बनाना चाहते हैं? ज्योति सावंत डायबिटीज़ के अनुकूल आटे को और पौष्टिक बनाने के लिए उसमें नीचे बताई जा रही सामग्री को जोड़ने की सिफ़ारिश करती हैं.

पिसा हुआ क्विनोआ

क्विनोआ प्रोटीन से भरपूर है और इसे अनाजों का राजा कहा जाता है. साथ ही इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम है, जिसका मतलब ये है कि यह ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) के स्तर में इज़ाफ़ा नहीं करेगा. क्विनोआ अमीनो एसिड्स का पैकेज माना जाता है, जो इसे डायबिटीज़ से प्रभावित लोगों के लिए फ़ायदेमंद बनाता है.

पिसे हुए चिया सीड्स या सब्ज़ा

चिया सीड्स या सब्ज़ा, फ़ाइबर से भरपूर होने के साथ ही इसमें ओमेगा 3एस, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स काफ़ी मात्रा में होते हैं.लेकिन इसका सबसे ख़ास फ़ायदा ये है कि इसमें फ़ाइबर कंटेंट मौजूद हैं. चिया के बीज रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा को कम करने में मददगार नज़र आते हैं, जिससे ये आपकी भूख को कम कर देते हैं.

पिसे हुए अलसी के बीज

अलसी के बीज हमारे शरीर की कार्यप्रणाली के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण है. इसमें पाया जाने वाला गोंद नुमा (म्युसीलेज) फ़ाइबर इसे डायबिटीज़ से ग्रसित लोगों के लिए और भी फायदेमंद बनाता है.  म्युसीलेज पाचन की प्रक्रिया को धीमा करने और भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज़ को पचाने में मदद करता है, साथ ही रक्त में इसे धीरे-धीरे जारी करता है.

डायबिटीज़ फ़्रेंड्ली आटे का वैज्ञानिक महत्व

मधुमेह के अनुकूल इस आटे के वैज्ञानिक महत्व की बात करें, तो इसमें एनर्जी वैल्यू ज़्यादा है. ये डाइटरी फ़ाइबर, प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन्स से भी भरपूर होता है. डायबिटीज़ के अनुकूल इस आटे में फ़ाइबर कंटेंट काफ़ी होता है. फ़ाइबर हमारे शरीर में ग्लूकोज़ के रिलीज़ होने की गति को कम कर देता है, जिससे शरीर इसे आसानी से हज़म कर सके. जिससे खाने के बाद हमारे शरीर में शुगर लेवल बढ़ता नहीं है, साथ ही सही आहार और जीवनशैली की मदद से ब्लड शुगर कंट्रोल में बना रहता है.

नीचे बताई गईं सामग्री अगर डायबिटीज़ से ग्रसित लोग आटे के साथ मिलाएं तो फायदेमंद नतीजे मिल सकते हैं

डायबिटीज़ के लिए बाजरे का आटा

बाजरा डायबिटीज़ के प्रबंधन और उसके नियंत्रण के लिए काफ़ी मशहूर है. बाजरे में डाइट्री फ़ाइबर होने के चलते ये इसे मधुमेह से ग्रसित लोगों के लिए आटे की फ़ायदेमंद किस्मों में से एक बनाता है. [2] ख़ासकर, भारत और अफ्रीका में उगाये जाने वाली रागी की क़िस्में.

डायबिटीज़ के लिए जौ का आटा

स्वीडन के लुंड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अध्ययन में ये बात सामने आई कि जौ के ज़रिए गट हार्मोन को बढ़ाया जा सकता है, जो चयापचय (मेटाबॉलिज्म) और भूख को स्थिर करने में मदद करता है. इसके अलावा अध्ययन से भी पता चला है कि जौ खाने से दिल से जुड़ी बीमारी और मधुमेह से दूरी बनाई रखी जा सकती है.[3]

डायबिटीज़ के लिए सोयाबीन का आटा

शोधकर्ताओं ने सोया बीन के आटे में कुछ ऐसे गुणों की पहचान की है, जिससे सोया बायोएक्टिव कम्पाउंड (यौगिकों) आइसोफलैवोनेस  नामक  खाद्य पदार्थों के ज़रिए डायबिटीज़ और हृदय रोग के खतरे को कम करने में मदद मिलती है. इतना ही नहीं, मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट में हुए एक अध्ययन के मुताबिक़, सोया से बने खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल से कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) के स्तर में कमी, साथ ही डायबिटीज़ से ग्रसित लोगों के ग्लूकोज़ टॉलरेंस में सुधार देखा गया है यानी शरीर में ग्लूकोज़ आसानी हज़म होता है और इंसुलिन थोड़ा बेहतर तरीक़े से काम करता है.[4]

डायबिटीज़ के लिए रागी का आटा:

रागी में टोटल कोलेस्टेरॉल, एलडीएल कोलेस्टेरॉल, ट्राइग्लिसराइड लेवल्स को कम करने और एंटीडायबिटिक गुण मौजूद होते हैं [5], रागी या नचनी की फ़सल ग्लूटेन फ़्री (लस-मुक्त) गुणों के लिए जानी जाती है। यह दुनिया में उगाई जाने वाली पांचवी अनाज की सबसे महत्वपूर्ण फ़सल है.

डायबिटीज़ के लिए रामदाना का आटा:

ऐमरैन्थ यानी चौलाई/रामदाना डायबिटीज़ से लड़ने के गुणों और एंटीऑक्सीडेंटिव तत्वों के मौजूद होने के लिए जाना जाता है. इसमें प्रोटीन, खनिज, विटामिन बी, लिपिड काफ़ी मात्रा में पाया जाता है और ये आसानी से पचने योग्य है. देखा जाए तो इसे डायबिटीज जैसे विकार को रोकने और उसे कम करने में इस्तेमाल में लाया जा सकता है. [6]

डायबिटीज़ के लिए काबुली चने का आटा:

काबुली चना एक तरह का घुलनशील फ़ाइबर है, जो न सिर्फ़ आपके ब्लड कोलेस्टेरॉल लेवल को कम करता है, बल्कि हमारे ख़ून में शुगर के धीमे अवशोषण में भी मदद करता है. इसके अलावा इसमें रिफ़ाइंड कार्बोहाइड्रेट्स के बदले कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जिससे हमारे शरीर की पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, और शरीर ऊर्जा का इस्तेमाल ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदेमंद तरीक़े से करता है. साथ ही इसका ग्लाइसेमिक लोड कम होने के चलते ये डायबिटीज़ को रिवर्स करने में सहायक है.[7]

बाज़ार में मिलने वाला उत्तम रेडीमेड मल्टीग्रेन आटा
डॉ. सावंत तीन मल्टीग्रेन ब्रांडों की सिफारिश करती हैं, जिन्हें आप ऑनलाइन या किसी सुपरमार्केट में ख़रीद सकते हैं.

  • जीवा डायबिटिक केयर आटा
  • पतंजलि नवरत्न आटा
  • आशीर्वाद मल्टीग्रेन आटाबाज़ार में रेडीमेड मिलने वाले डायबिटीज़ के अनुकूल आटे की क़ीमत आम आटे के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है, पर इसे आप पैसा वसूल और फ़ायदेमंद मान सकते हैं.

    किसी भी गुणवत्ता वाले न्यूट्रीशियन के लिए आपको थोड़ी ज़्यादा क़ीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन अगर आप अतिरिक्त पैसा ख़र्च नहीं करना चाहते, तो आप हमारे बताए गये होममेड मल्टीग्रेन आटा रेसिपी को अपना सकते हैं.

    नोट: हम आटे के किसी भी ब्रांड की सिफ़ारिश नहीं कर रहे हैं
  • फ़ोटो साभार: Shutterstock, Pixabay 

    संदर्भ
  1. Frayn KN1, Arner P, Yki-Järvinen H. Fatty acid metabolism in adipose tissue, muscle and liver in health and disease. US National Library of Medicine National Institutes of Health. 2006. Available at: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/17144882
  2. Jason Kam, Swati Puranik, Rama Yadav, Hanna R. Manwaring, Sandra Pierre, Rakesh K. Srivastava. Dietary Interventions for Type 2 Diabetes: How Millet Comes to Help. Frontiers in Plant Science. Sept 27, 2016. Available at: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5037128/
  3. Anne C. Nilsson, Elin V. Johansson-Boll, Inger M. E. Björck. Increased gut hormones and insulin sensitivity index following a 3-d intervention with a barley kernel-based product: a randomised cross-over study in healthy middle-aged subjects. British Journal of Nutrition, 2015; 114 (06): 899 DOI: 10.1017/S0007114515002524
  4. Young-Cheul Kim. University of Massachusetts Amherst. “How Soy Reduces Diabetes Risk.” ScienceDaily. ScienceDaily, 7 October 2009. www.sciencedaily.com/releases/2009/10/091006120510.html
  5. Ji Heon Park, Sun Hee Lee, and Yongsoon Park. Sorghum extract exerts an anti-diabetic effect by improving insulin sensitivity via PPAR-γ in mice fed a high-fat diet. NCBI Nutrition Research and Practice. August 2012. Available at: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/
    articles/PMC3439576/
  6. Montoya-Rodríguez, A., Gómez-Favela, M. A., Reyes-Moreno, C., Milán-Carrillo, J. and González de Mejía, E. (2015), “Identification of Bioactive Peptide Sequences from Amaranth (Amaranthus hypochondriacus) Seed Proteins and Their Potential Role in the Prevention of Chronic Diseases.” Comprehensive Reviews in Food Science and Food Safety, 14: 139–158. doi: 10.1111/1541-4337.12125. Available at: https://phys.org/news/2015-02-amaranth-seeds-chronic-diseases.html#jCp
  7. Tasleem A. Zafar, Fatima Al-Hassawi, […], and Fatma G. Huffman. Organoleptic and glycemic properties of chickpea-wheat composite breads. Journal of Food, Science and Technology. April 2015. Available at: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4375205/

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