Tips To Support A Loved One Newly Diagnosed With Diabetes
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हाल ही में मेरी सहकर्मी स्मिता ऑफ़िस पार्टी के दौरान काफ़ी गुमसुम नज़र आ रही थी और ब-मुश्किल हँस रही थी. जब मैंने उससे इसकी वजह जाननी चाही तो उसने बताया कि जबसे उसके पति को ख़ुद के डायबिटिक (मधुमेह से पीड़ित) होने का पता चला है, तभी से वो काफ़ी अजीब व्यवहार कर रहे हैं.   

उसने बताया कि जब से डॉक्टर ने उन्हें उनकी डायबिटीज़ के बारे में जानकारी दी, उन्होंने परिवार के साथ बाहर खाना- खाना, घर में पुराने दोस्तों के साथ मौज मस्ती करना और इस तरह की दूसरी तमाम चीज़ें अचानक बंद कर दीं. बच्चे भी पिता के उस पुराने मस्ती भरे व्यवहार को काफ़ी याद करते हैं.अपने आंसुओं पर क़ाबू करने की कोशिश के दौरान स्मिता ने कहा कि वो इस बारे में अक्सर सोचती है, कि क्या पुराने दिन कभी लौट के आ पाएंगे?

ये सिर्फ़ स्मिता के घर की बात नहीं है, दुर्भाग्य से भारत में इस तरह के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, और ये तब है जब भारत डायबिटीज़ के मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है (1)

तो अगर आप ख़ुद को स्मिता की जगह देखते हैं, तो सबसे पहले आपको परेशान होना बंद करना होगा. अगर आप सकारात्मक सोच नहीं रखेंगे तो आप चीज़ों को सुधार नहीं पाएंगे और न ही अपने डायबिटिक प्रियजनोंके लिए कुछ कर पाएंगे. अपने डायबिटिक रिश्तेदार को सहयोग करने का प्रण लें और इन टिप्स को भी इस्तेमाल में लाएं जिनसे कईयों को फ़ायदा पहुंचा है.  

कम बोलें और ज़्यादा सुनें:
अगर डायबिटिक व्यक्ति आपसे बात करे, तो उसकी बात ध्यान से सुनें और इस बात का ख़याल रखें कि वो आपसे जो कुछ कहना चाहे, आप उसे ठीक से समझ सकें.

इस बात को भी समझने की कोशिश करें कि क्या डायबिटिक व्यक्ति आपसे सलाह मांग रहा है या सिर्फ़ अपने मन को हल्का कर रहा है?
क्या वो आपसे लो-कैलोरी डाइट रेसेपी चाहते हैं या सिर्फ़ इस बात का अफ़सोस जता रहे हैं कि वो अब तमाम तरह के कुरकुरे पकोड़ों का स्वाद नहीं उठा सकते?

उनकी बात तसल्ली से सुनें और अगर वो भावनात्मक तौर पर आपसे जुड़ना चाहें, तो उसमें उनकी मदद करें. जल्दबाज़ी में किसी तरह की सलाह देने से बचें, जब तक कि वो ख़ुद इसकी मांग न करें.

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प्रेरित करें, ज़बरदस्ती नहीं
बेंगलुरु के रामकृष्णा नर्सिंग होम में कंसल्टेंट फिज़ीशियन डॉ वत्सला काशी, एम.डी, बताती हैं, “चूंकि आज के दौर में डायबिटीज़ का होना काफ़ी आम बात है, इसलिए दोस्तों और रिश्तेदारों से आपको अक्सर कई टिप्स भी मिलती रहती हैं. इस सब से उस व्यक्ति के भीतर डर समा सकता है जिसे हाल ही में ख़ुद के डायबिटीज़ से ग्रसित होने का पता चला है. ख़ासकर तब, जब आपका जीवनसाथी लोगों से मिल रही इन सभी टिप्स को इस्तेमाल में लाने की पूरी कोशिश कर रहा हो. इसलिए बेहतर होगा कि डायबिटिक व्यक्ति को इस बात का फ़ैसला ख़ुद लेने दें कि उसके लिए क्या सही है और क्या ग़लत. जिसके बाद डायबिटिक व्यक्ति को सिर्फ़ उसके फ़ैसले के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए”.

व्यवहारिक तौर पर आप चाहें तो डायबिटीज़ से ग्रसित व्यक्ति के साथ मिलकर हेल्थी फ़ूड की ख़रीददारी साथ में कर सकते हैं. स्मिता ने भी कुछ ऐसा ही किया, उन्होंने महसूस किया कि अपने पति के साथ हर दिन वॉक पर जाने से वो इसे बीच में ही छोड़ नहीं रहे, बल्कि डॉक्टर की सलाह पर वो इसे अच्छे से कर रहे हैं.

अगर आपको लगे कि डायबिटिक व्यक्ति इस तरह की गतिविधियों को पसंद नहीं कर रहे हैं, तो ज़बरदस्ती न करें, और उतना ही सपोर्ट दिखाएँ, जितना कि सामने वाला लेना चाहे.

संवेदनशील रहे:
डायबिटिक व्यक्ति को अपनी डायबिटीज़ पर नियंत्रण रखने के लिए सही और स्वस्थ भोजन खाना ज़रूरी है, और ज़रूरी नहीं कि इसमें उन्हें मज़ा आ रहा हो, ऐसे में आपको  संवेदनशील रहने की ज़रूरत है ताकि आप उनकी परेशानियों को न बढ़ाएं. अगर आपको आइसक्रीम या पनीर बटर मसाला खाने का मन है तो ज़रूर खाएं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि ये सब आप उनके सामने ही खाना शुरू कर दें. ऐसा कुछ न करें, जिससे डायबिटिक व्यक्ति को तकलीफ़ पहुंचे.

अगर आप किसी सोशल इवेंट में शिरकत कर रहे हैं जहाँ खाना भी शामिल हैं, तो हर किसी से इस बात का ज़िक्र करने से बचें कि आपके परिजन को डायबिटीज़ है, भले ही वो कभी-कभी किसी तरह का अनहेल्थी फ़ूड का सेवन करते हों.

यदि आप डायबिटिक व्यक्ति के खाने पीने की आदतों को लेकर चिंतित हैं, तो आपको कम से कम तब तक ऐसे सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने से बचने की कोशिश करनी चाहिए, जब तक डायबिटिक व्यक्ति मधुमेह के साथ बेहतर ढंग से तालमेल न बिठा ले.

वीडियो देखें: क्या डायबिटीज़ में गाड़ी चला सकते हैं?

अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं:
डायबिटीज़ सेहतमंद भोजन खाने का बहाना भी बन सकता है.मसलन, स्मिता को महसूस हुआ कि वो डायबिटीज़ से ग्रसित अपने पति के लिए अब भी उनकी पसंद का खाना बना सकती है, बस उन्हें खाने को फ्राई करने के बदले उसे बेक करना पड़ेगा.

खाना तैयार करने में आप थोड़ी रचनात्मकता ला सकते हैं. जिसमें आप हाई कैलोरी वाले भोजन को लो कैलोरी वाले भोजन से बदल सकें.

डायबिटीज़ का पता चलने के बाद भी आप अपने शहर में खाने-पीने की दुकानों का ज़ायक़ा लेना जारी रख सकते हैं, आपको बस कुछ एक बदलाव करने की ज़रूरत है. मसलन, आप हेल्थी फ़ूड सप्लाई करने वाले स्टोर्स ढूंढ सकते हैं, आप सेलेड बार और लो कैलोरी वाला खाना परोसने वाले रेस्त्रो का रुख़ कर सकते हैं.
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हर दिन व्यायाम करने पर ज़ोर दें :
बॉडी वेट और ब्लड ग्लूकोज़ लेवल्स पर नियंत्रण करने के अलावा नियमित व्यायाम से भी डायबिटीज़ से जुड़ी चिंता पर क़ाबू किया जा सकता है. आप डायबिटिक व्यक्ति के लिए कुछ ख़ास तरह के व्यायामों का भी सहारा ले सकते हैं. स्मिता के पति ने शुरुआत में बैडमिन्टन और साइक्लिंग की तरफ अपना रुझान बढ़ाया, लेकिन ये दोनों उनके लिए काफ़ी थकाऊ साबित होने लगे, जिसके चलते उन्होंने कई सेशन बीच में छोड़ने शुरू कर दिए. पर जल्द ही उन्होंने योग करना शुरू किया और उन्हें महसूस हुआ कि ये उनके लिए आसान है.

अगर आपका साथ डायबिटिक व्यक्ति को बेहतर व्यायाम करने में मदद करता है, तो आप भी उन्हें ज्वाइन कर सकते हैं. (3)

आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए व्यावहारिक उपाय सेट करें:
डॉ काशी बताती हैं कि डायबिटीज़ से उत्पन्न होने वाली चिंताओं में मरीज़ को सबसे ज़्यादा सामना हाइपोग्लाइसीमिक इमरजेंसी से करना पड़ सकता है.यानी कि ब्लड शुगर के लेवल का काफ़ी कम हो जाना.

इस तरह के हालात से निपटने का एक आसान तरीक़ा ये है कि आप अपने बैग में और आसपास कुछ चॉकलेट्स, बिस्किट रखा करें. अपने क़रीबियों, पड़ोसियों और दोस्तों के नम्बर स्पीड डायल में सेट करें. आपातकालीन स्थिति में डायबिटीज़ से ग्रसित अपने क़रीबियों को जितना भावनात्मक सहारा दे सकें, देने की कोशिश करें.

स्मिता का कहना है कि उनके पति को अपने डायबिटिक होने का पता चलने के बाद सबसे बड़ी परेशानी इस बात को स्वीकार करने में हुई कि उनकी ज़िन्दगी अब पहले जैसी नहीं होगी. बावजूद इसके उन्होंने एक दूसरे का सहारा बनना तय किया, क्योंकि उनका मानना था “अलग ज़िन्दगी” का मतलब  “दुखी ज़िन्दगी” नहीं  होता. शायद यही सोच डायबिटीज़ से लड़ने का राज़ है.

फ़ुटनोट: डॉ वत्सला काशी बेंगलुरु के रामकृष्णा नर्सिंग होम में कंसल्टेंट फिज़ीशियन हैं.

संदर्भ:

[1] D.C. Protasiewicz, M-M. Sandu, A.G. Firanescu, E.C. Lacatusu, M.L. Bicu, M. Mota. Data regarding the prevalence and incidence of diabetes mellitus and prediabetes. Rom J Diabetes Nutr Metab Dis.; 2016; 23(1); 095-103; DOI: 10.1515/rjdnmd-2016-0012

[2] A. Abbott. Understanding Diabetes. Diabetic Connect. http://www.diabeticconnect.com/diabetes-information-articles/general/487-5-ways-to-help-your-newly-diagnosed-diabetic-partner

[3] Y. P. S. Balhara and R. Sagar. Correlates of anxiety and depression among patients with type 2 diabetes mellitus. Indian J Endocrinol Metab; 2011; 15 (Suppl 1); S50-S54; DOI: 10.4103/2230-8210.83057

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